करवा चौथ का व्रत साल में सिर्फ एक बार आता है और सुहागिन महिलाओं के लिए इसका महत्व किसी तपस्या से कम नहीं होता है। निर्जला व्रत, सोलह श्रृंगार और चांद का इंतजार; हर महिला चाहती है कि वह इसे पूरे विधि-विधान से करें। इसी को लेकर अक्सर महिलाओं के मन में सवाल आता है कि अगर करवा चौथ वाले दिन ही पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें? क्या व्रत टूट जाएगा? क्या पूजा करनी चाहिए? साल 2026 में करवा चौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को है, ऐसे में यह सवाल और भी जरूरी हो जाता है।

मासिक धर्म में करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए या नहीं

हिंदू धर्म में मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ से दूर रहने की परंपरा बताई गई है, जिसे लेकर महिलाओं में असमंजस बना रहता है। शास्त्र कहते हैं कि पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, यह अशुद्धि नहीं है। इसलिए, करवा चौथ जैसा बड़ा व्रत इस वजह से छोड़ा नहीं जाता है। आइए पंडित अरुणेश कुमार से जानते हैं कि पीरियड्स में करवा चौथ का व्रत कैसे रखना चाहिए और पूजा का सही तरीका क्या है?

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क्या पीरियड्स में करवा चौथ का व्रत रख सकते हैं?

जी हां, बिल्कुल रख सकते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान व्रत रखने पर कोई मनाही नहीं होती है। करवा चौथ का संकल्प मन और श्रद्धा से जुड़ा है, शरीर की स्थिति से नहीं। अगर व्रत शुरू करने से पहले या व्रत वाले दिन पीरियड्स आ जाएं, तो भी आप सुबह सरगी खाकर, बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत का संकल्प ले सकती हैं। पूरे दिन आप निर्जला व्रत रख सकती हैं। अगर आपको कमजोरी, पेट दर्द या थकान ज्यादा महसूस हो रही है, तो अपनी सेहत को पहले ध्यान में रखें। ऐसी स्थिति में आप फलाहारी व्रत रख सकती हैं, जिसमें पानी, फल लेकर भी व्रत का पुण्य मिल सकता है।

पीरियड्स में पूजा कैसे करें?

व्रत रखने की छूट है, लेकिन पूजा करने के तरीके में बदलाव करना पड़ता है। इस दौरान सीधे पूजा सामग्री को स्पर्श करना वर्जित माना जाता है।

  1.  इस दिन आप खुद से दीया, करवा, सिंदूर, फूल या मूर्ति को स्पर्श न करें। पूजा की थाली किसी और से तैयार करवाएं।
  2.  आप घर की किसी अन्य सुहागिन महिला जैसे सास, ननद, जेठानी से अपनी जगह पूजा करवा सकती हैं। अगर घर में कोई और महिला नहीं है, तो आपके पति भी आपकी ओर से पूजा कर सकते हैं, क्योंकि पति-पत्नी को एक-दूसरे का पूरक माना गया है।
  3.  पूजा स्थल से थोड़ी दूरी पर बैठकर आप करवा चौथ की वीरावती वाली कथा सुन सकती हैं। आप फोन पर रिकॉर्डेड कथा सुन सकती हैं या किताब से भी पढ़ सकती हैं। मन ही मन मंत्र जाप करना भी पूरी तरह मान्य है।
  4.  पीरियड्स में सजने-संवरने पर कोई रोक नहीं है। आप मेहंदी, बिंदी, सिंदूर और सुहाग का जोड़ा पहनकर व्रत की सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रख सकती हैं।
  5.  अगर आप पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने जा रही हैं और उसी दिन पीरियड्स आ गए हैं, तो कई पंडित सलाह देते हैं कि इस साल व्रत की शुरुआत अगले साल से करें। अगर आप पहले से व्रत रखती आ रही हैं, तो आपको व्रत नहीं छोड़ना चाहिए।

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क्या पीरियड्स में चांद को अर्घ्य दे सकते हैं?

हां, दे सकते हैं। पीरियड्स के दौरान चंद्रमा को अर्घ्य देने पर कोई पाबंदी नहीं है। रात में जब चंद्रोदय हो तो आप छलनी से चांद को देख सकती हैं। अगर आप खुद थाली न छूना चाहें तो पति या किसी और की मदद से अर्घ्य दिलवा सकती हैं। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलना पूरी तरह से शुभ माना जाता है।

शास्त्रों का सार यही है कि भगवान भावना देखते हैं, नियम नहीं। करवा चौथ प्रेम और समर्पण का व्रत है। पीरियड्स आने पर खुद को दोषी न मानें और न ही घबराएं। अपने शरीर का ध्यान रखते हुए, मन में पति के लिए प्रार्थना बनाए रखते हुए आप इस व्रत को पूरी श्रद्धा से पूरा कर सकती हैं। याद रखिए, आपकी नीयत ही आपकी पूजा है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।