भारत के महान ग्रंथों में से एक है श्रीमद्भगवद्गीता जिसका जीवन में विशेष महत्व है। इसमें लिखी हर एक बात यदि व्यक्ति जीवन में ढाल ले तो कभी असफलता नहीं मिल सकती है। महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिए थे, वो गीता में अंकित हैं। सदियों से ये उपदेश व्यक्ति को सही दिशा में कर्म करने में मदद करते आ रहे हैं। गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला भी सिखाती है। अगर बचपन से ही बच्चों को गीता की कुछ महत्वपूर्ण शिक्षाएं सिखाई दी जाएं, तो बच्चे जीवन की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं। अगर आप भी बच्चों को गीता के कुछ उपदेशों के बारे में शुरुआत से ही शिक्षा देंगी, तो बच्चे को सदैव जीवन में सफलता मिलेगी। आइए जानें गीता में लिखी उन बातों के बारे में जो हर बच्चे को बचपन से ही सिखानी चाहिए।
कर्म करो, फल की इच्छा मत करो
गीता का सबसे मुख्य उपदेश है कि मनुष्य को अपना कर्म पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए, लेकिन उसके फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। यदि पेरेंट्स बचपन से ही बच्चे को इस बात की शिक्ष देंगे तो बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ेगा और कर्म करते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। कई बार बच्चे परीक्षा, प्रतियोगिता या किसी अन्य कार्य के परिणाम के बारे में पहले से सोचकर ही तनाव में आने लगते हैं। ऐसे में यदि बच्चों को पहले से ही ये शिक्षा दी जाएगी कि वो सिर्फ अपने कर्म पर ध्यान दें, तो बच्चों को परिणाम सोचकर कोई तनाव नहीं होगा।
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किसी भी काम को कल पर न टालें
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे किसी काम को आने वाले समय पर टाल देते हैं और उनकी ये काम को टालने वाली आदत उनके स्वभाव में शामिल हो जाती है। पेरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चे को शुरू से ही इस बात की शिक्षा दें कि बच्चा कोई भी काम कल पर न टाले बल्कि जो काम आज करना है उसे आज ही करे। जब बच्चे में शुरू से ही ये आदत विकसित हो जाएगी तो वह हर काम को समय पर करेगा और कभी भी टालेगा नहीं। चाहे बच्चे का होमवर्क हो या पढ़ाई बच्चे को हर काम निर्धारित समय पर करने की आदत हो जाएगी।
सही दिशा में कर्म करना है जरूरी
बच्चों को शुरू से ही ये सिखाएं कि उनके लिए सिर्फ मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही दिशा में मेहनत करना जरूरी है। गीता हमें सिखाती है कि आपका हर एक कारण नैतिकता और अच्छे विचारों से पूर्ण होना चाहिए। यदि आप बच्चे को भी यही सिखाएंगे कि वो अपना एक लक्ष्य निर्धारित करे और उसी लक्ष्य के लिए सही कर्म करे तो जीवन में सफलता निश्चित मिल सकती है। यही नहीं जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता भी बच्चों में शुरुआत से ही विकसित होनी चाहिए।
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हर परिस्थिति में सच बोलना चाहिए
गीता में लिखी इस बात का जीवन में विशेष महत्व होता है। बच्चे को हर परिस्थिति में सच बोलना सिखाना पेरेंट्स की जिम्मेदारी होती है। आपको भी इस बात का ध्यान देने की जरूरत है कि बच्चे को इस बात की शिक्षा दें कि चाहे कैसी भी समस्या हो हमेशा सच बोले। भले ही बच्चे के कम नंबर आएं या स्कूल में किसी बात को लेकर डांट पड़े उसे हमेशा घर में माता-पिता से सच ही बोलना चाहिए। माता-पिता बच्चे के सच को देखकर आगे के लिए कोई निर्णय ले सकते हैं।
अगर आप भी गीता में लिखी इन चार बातों को अपने बच्चों को शुरुआत से ही सिखाएंगी, तो बच्चे को कभी भी जीवन में असफलता का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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