डॉ. शोभा अपने क्लीनिक में रोज की तरह एक के बाद एक मरीज देख रही थीं। वह जल्दी से अपना काम खत्म करके घर जाने की सोच रही थीं। मरीजों से फ्री होकर जैसे ही वह घर के लिए निकलने लगीं, तभी एक सुंदर-सी महिला क्लीनिक में आ गई। उसकी उम्र करीब पच्चीस साल रही होगी। डॉ. शोभा ने उसे पूछा, “कहो, क्या परेशानी है?” अब तक उस लड़की को देखकर डॉ. शोभा मन ही मन अंदाजा लगा चुकी थीं कि शायद वह अबॉर्शन के लिए उनसे मिलने आई है। आजकल के खुले माहौल में पली-बढ़ी लड़कियां अक्सर लड़कों के बहकावे में आकर ऐसे गलत कदम उठा लेती हैं और बाद में डॉक्टरों के क्लीनिक के चक्कर लगाकर इस परेशानी से छुटकारा पाना चाहती हैं। डॉ. शोभा से उस नवयुवती ने कहा, “क्या मैं यहां बैठ सकती हूं? मुझे आपसे दो मिनट बात करनी है।” डॉ. शोभा वापस अपनी चेयर पर जाकर बैठ गईं और वह लड़की, जिसका नाम रोली था, उनके ठीक सामने बैठ गई। डॉ. शोभा की आंखों में देखते हुए रोली ने बिना किसी झिझक के सीधे-सीधे अपनी बात कह दी, “क्या आप मेरी मां बनना पसंद करेंगी?” फिर तुरंत ही वह बोली, “नहीं-नहीं, आपको मेरी मां बनना ही पड़ेगा, हर हाल में। डॉक्टर तो वैसे भी लोगों को जीवनदान देते हैं और यहां तो मामला मेरे पापा की खुशियों का है। मेरे पापा की जिंदगी में खुशियों के रंग सिर्फ आप ही भर सकती हैं।”
रोली की आत्मविश्वास से भरा बात करने का तरीका देखकर डॉ. शोभा हैरान रह गईं। आखिर यह लड़की कहना क्या चाह रही थी? डॉ. शोभा कुछ समझ नहीं पा रही थीं और सोच में पड़ गईं। तभी रोली ने फिर बोलना शुरू किया, “मेरा नाम रोली है। मैं डॉ. रमन माथुर की बेटी हूं, जिन्हें आप अच्छी तरह जानती हैं।” “करीब सालभर पहले ही मेरी मां की कैंसर से मौत हो गई। तभी से पापा डिप्रेशन में हैं। कभी-कभी मैंने उन्हें धीमी आवाज में आपका नाम लेते हुए सुना है।”
“पापा मुझ पर जल्दी शादी करने के लिए दबाव बना रहे हैं, लेकिन मैं उन्हें इस हालत में अकेला छोड़कर जाने के बारे में सोच भी नहीं सकती। पापा को उनके हिस्से की खुशियां देने के बाद ही मैं अपना घर बसाने के बारे में सोचूंगी। आपके और मेरे पापा के बारे में मुझे डॉ. रेखा ने सब कुछ बता दिया है। डॉ. रेखा ही मेरी होने वाली सास हैं।”
रमन का नाम सुनते ही शोभा के मन में जैसे अचानक तरंग-सी बज उठी। उन्होंने रोली की तरफ ध्यान से देखा। वह बिल्कुल हू-ब-हू रमन की कॉपी थी। उसका बात करने का अंदाज भी बिल्कुल रमन जैसा ही था, सीधा और साफ। सामने वाला क्या सोचेगा या उसे बुरा लगेगा, इसकी परवाह किए बिना अपनी बात कह देना रोली की बातें सुनकर शोभा जैसे 20 साल पीछे अपने पुराने दिनों में पहुंच गई थीं। उम्र के 45 बसंत देखने के बाद भी उन दिनों की यादें उनके दिल से धुंधली नहीं हुई थीं। आखिर दिल की गहराई भी तो समुद्र से कम नहीं होती। डॉ. शोभा आज अपने अतीत के सारे पन्ने एक बार फिर पलटना चाहती थीं। अक्सर जब जिंदगी में कुछ अच्छा होने वाला होता है, तो इंसान अपने बीते दिनों को मन ही मन याद करने लगता है। फिर धीरे-धीरे उस समय से जुड़ी सारी बातें और घटनाएं एक-एक करके याद आने लगती हैं। रमन का नाम सुनते ही शोभा को उससे जुड़ी हर बात याद आने लगी थी।
जब वह मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं, तब रमन उनसे एक साल सीनियर थे। हॉस्पिटल में ड्यूटी के दौरान अक्सर दोनों की ड्यूटी एक साथ लग जाती थी। पहले दोनों की पहचान हुई, फिर यही पहचान धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई। कुछ ही दिनों में दोनों के दिल में एक-दूसरे के लिए प्यार भी पैदा हो गया था। फाइनल ईयर खत्म होते ही रमन ने शोभा के सामने अपने प्यार का इजहार कर दिया और उसे शादी के लिए प्रपोज कर दिया। रमन की बात सुनकर शोभा शरमा गई थीं। उन्होंने अपनी नजरें झुका ली थीं और उनके गाल खुशी से लाल हो गए थे। उस दिन शोभा का मन खुशी से भरा हुआ था। वह खुशी-खुशी घर पहुंची और शाम को डाइनिंग टेबल पर बैठकर अपने पापा को रमन के बारे में सब बता दिया। लेकिन रूढ़िवादी सोच रखने वाले उनके पिता ने एक मिनट में अपना फैसला सुना दिया, “दामाद और वह भी दूसरी जाति का? मेरे जीते-जी ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता।” शोभा ने हिम्मत जुटाई और आखिरकार अपने दिल की बात कह ही दी, “अगर शादी करूंगी तो सिर्फ रमन से ही करूंगी...” लेकिन क्या डॉ. शोभा के पिता इस शादी से नहीं माने? क्या इसी वजह से रमन ने रोली की मां से शादी की थी?
आप भी अगर यह जानना चाहते हैं और क्या डॉ. शोभा रमन से शादी के लिए मान जाएंगी? जानने के लिए इंतजार करें अगले पार्ट का।
लेखक- स्मिता
image credit- बबीता, gemini
