जब बच्चे मैसेज पर सिर्फ ब्लू टिक छोड़ देते हैं या फैमिली वॉट्सएप ग्रुप में कोई जवाब नहीं देते, तो अक्सर पेरेंट्स को लगता है कि बच्चे उनकी अनदेखी कर रहे हैं। हालांकि, इसके पीछे केवल आलस नहीं बल्कि बच्चों की बदलती सोच, उनका मनोविज्ञान और डिजिटल आदतें शामिल होती हैं। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...

फैमिली ग्रुप में बच्चों के एक्टिव न रहने की वजहें

बच्चों का ग्रुप में एक्टिव न रहने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं-

1. फोन को पर्सनल प्रॉपर्टी मानना

  • बच्चे अपने स्मार्टफोन को दोस्तों के साथ बातचीत की निजी जगह मानते हैं। फैमिली ग्रुप उन्हें एक ऐसे मंच जैसा लगता है जहां परिवार के सभी बड़े उन पर नजर रख रहे हैं।
  • जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे बड़ों के नियंत्रण से थोड़ा दूर होकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना चाहते हैं।

2. आलोचना और सलाह मिलने का डर

  • जब बड़े रिश्तेदार बच्चों के पहनावे, पसंद या दोस्तों पर टिप्पणी करते हैं या सलाह देने लगते हैं, तो बच्चे खुद को बचाने के लिए चैट से दूरी बना लेते हैं।
  • पूरे खानदान के सामने किसी सवाल का जवाब देना या खुद को साबित करना बच्चों में झिझक और मानसिक तनाव पैदा करता है।

3. फॉरवर्डेड मैसेज और बोरिंग बातचीत

  • ग्रुप में आने वाले लंबे मैसेज, अनगिनत फॉरवर्डेड चुटकुले और बड़ों की बोरिंग बातचीत बच्चों को नीरस लगती है।
  • बच्चों के लिए अपने दोस्तों से जुड़ना ज्यादा जरूरी होता है, इसलिए वे ग्रुप के मैसेज को बाद के लिए छोड़ देते हैं।

4. नोटिफिकेशन का भारी दबाव

  • दिनभर ग्रुप में आने वाले दर्जनों मैसेज के नोटिफिकेशन से बच्चे मानसिक रूप से थक जाते हैं।
  • इस डिजिटल शोर से बचने के लिए ज्यादातर युवा फैमिली ग्रुप को म्यूट करके रखते हैं और केवल जरूरत पड़ने पर ही देखते हैं।

5. बातचीत का अलग तरीका

  • आजकल की नई पीढ़ी लंबे टेक्स्ट मैसेज लिखने के बजाय मीम्स, फोटो, शॉर्ट वीडियो या इमोजी के जरिए जल्दी और खुलकर बात करना पसंद करती है।
  • बड़ों का गंभीर और औपचारिक अंदाज बच्चों के बातचीत करने के रोजमर्रा के तरीके से मेल नहीं खाता।

माता-पिता के लिए एक्सपर्ट की सलाह

एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चों को फैमिली ग्रुप में जबरदस्ती एक्टिव करने के बजाय उनकी प्राइवेसी का सम्मान करें। उनसे वॉट्सएप के बजाय आमने-सामने बैठकर बात करने की आदत डालें। इसके साथ ही, उनके दोस्तों वाले ग्रुप पर भी नजर रखें ताकि वे किसी भी तरह के डिजिटल दबाव या ऑनलाइन बुलिंग का शिकार होने से बचे रहें।

निष्कर्ष

बच्चों का फैमिली ग्रुप में सक्रिय न होना उनके बड़े होने का एक स्वाभाविक हिस्सा है। इसे उनकी उदासीनता मानने के बजाय, माता-पिता को उनकी बदलती डिजिटल प्राथमिकताओं और मानसिक स्थिति को समझना चाहिए।

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Images: magnific