पता नहीं क्यों, बड़े भैया से अब भी मुझे बहुत डर लगता है। हमारी उम्र में मात्र पांच वर्ष का अंतर है, फिर भी मैं उनके साथ सहज नहीं हो पाती। बचपन में हर बात के लिए भैया मेरे साथ रोक-टोक करते थे। अब भी उनकी यह आदत नहीं बदली, जिससे पति और बच्चों के सामने मुझे अक्सर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है।

भाई-बहनों के बीच मामूली नोक-झोंक स्वाभाविक है। समस्या तब होती है, जब कोई एक शांत हो, लेकिन दूसरे का व्यवहार बहुत रूखा हो। ऐसी स्थिति में अगर माता-पिता अपने बच्चों के संबंध सुधारने की कोशिश न करें, तो उनके मन के किसी कोने में एक-दूसरे के लिए कटुता और द्वेष की भावना दबी रहती है।

कुछ पुरुष भी ऐसी ही शिकायत करते हैं कि छोटी या बड़ी बहन के साथ उनका सही तालमेल नहीं बैठ पाता। यह जरूरी नहीं है कि किसी गंभीर मुद्दे को लेकर उनके बीच कोई झगड़ा या मनमुटाव हो। फिर भी जब रिश्तों में तनाव महसूस होता है, तो इसकी वजह कहीं न कहीं बचपन के पारिवारिक माहौल से जुड़ी होती है। इसके लिए हमने चाइल्ड काउंसलर पूनम कामदार से भी बात की है। जानते हैं...

न टालें अपनी जिम्मेदारी

अधिकतर परिवारों में जहां एक से अधिक बच्चे होते हैं या दो बच्चों की उम्र में लगभग पांच वर्ष से अधिक फासला होता है, वहां माता-पिता बड़ी संतान पर छोटे भाई या बहन की देखभाल की जिम्मेदारी सौंप देते हैं। कई बार बड़े बच्चे अपने इस अधिकार का दुरुपयोग करके छोटे भाई या बहन को डराने-धमकाने लगते हैं।

भोपाल के 42 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल सुबोध वर्मा बताते हैं, "पांच भाई-बहनों में मैं सबसे छोटा हूं। मम्मी पर घरेलू काम का बहुत ज्यादा बोझ था, ऐसे में बड़ी दीदी मेरी देखभाल करती थीं। मैं जब भी उनकी बात नहीं मानता, तो वह अक्सर मेरी पिटाई कर देती थीं। इससे धीरे-धीरे मेरे मन में उनके प्रति आक्रोश की भावना पनपने लगी, लेकिन आज जब सोचता हूं, तो लगता है कि इसमें दीदी का कोई दोष नहीं था। उन पर एक पांच साल के बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी, जिससे व्यवहार में झल्लाहट आना स्वाभाविक था। हालांकि, समय के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। आजकल माता-पिता अपनी जिम्मेदारियां बड़ी संतान पर नहीं थोपते, बल्कि उसे भी अपना बचपन जीने की आजादी देते हैं।"

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सिखाएं शेयरिंग और केयरिंग

भाई-बहन के रिश्ते में प्यार के साथ थोड़ी प्रतिद्वंद्विता भी होती है, जिसे नियंत्रित करते हुए उनके भावनात्मक बंधन को मजबूत बनाने के लिए हर माता-पिता को प्रयास करना चाहिए।

दिल्ली की गृहणी अर्चना बंसल कहती हैं, "जब मेरी बेटी अन्वी तीन साल की थी, तब बेटे कुंश का जन्म हुआ। मैंने तभी सोच लिया था कि बिना किसी भेदभाव के दोनों बच्चों का समान रूप से ध्यान रखूंगी। अपने छोटे भाई को देखकर शुरुआत में बेटी मुझसे अक्सर कहती थी कि आप हमेशा उसे ही गोद में लेकर बैठी रहती हैं। तब मैं उसे समझाती थी कि तुम्हारा भाई अभी बहुत छोटा है, उसे बड़ों की मदद की जरूरत है। फिर रोजाना समय निकालकर मैं बिटिया को भी गोद में बैठाती और उसे अपने हाथों से खाना खिलाती, ताकि वह खुद को उपेक्षित महसूस न करे। जब दोनों स्कूल जाने लगे तो मैंने उन्हें समझाया कि तुम्हें एक-दूसरे का ध्यान रखना चाहिए। अब मेरी बेटी 20 वर्ष की और बेटा 17 वर्ष का हो चुका है। वे हमेशा एक-दूसरे की मदद के लिए तैयार रहते हैं। उनके बीच ऐसा प्यार देखकर मुझे बहुत खुशी होती है।"

न करें भेदभाव

यह अच्छी बात है कि अब लोग बेटे और बेटी की परवरिश में भेदभाव नहीं करते, फिर भी कई बार उनके व्यवहार से बच्चों की कोमल भावनाएं आहत हो जाती हैं। अगर किसी संतान को ऐसा लगे कि माता-पिता उसके भाई या बहन को उससे ज्यादा प्यार करते हैं, तो उसका यह भ्रम दूर करना बहुत जरूरी है।

अगर बेटे-बेटियों को समान रूप से पढ़ने और आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए, तो वे न केवल एक-दूसरे का ख्याल रखेंगे, बल्कि समाज के प्रति भी संवेदनशील बनेंगे।

मजबूत हो रिश्ता

आप बच्चों को इस बात का अहसास दिलाएं कि सभी के जीवन में दोस्तों के अलावा भाई और बहन की भी खास जगह होती है। बच्चों से सिर्फ ऐसा कहना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत बनाने के लिए आप निरंतर प्रयास करते रहें। परवरिश एक प्रक्रिया है, इसलिए इस दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें-

  • किसी भी मामले में बेटे और बेटी के बीच भेदभाव न करें। अगर कभी बेटी को किसी बात के लिए रोकते हैं, तो उसे उसका कारण अवश्य बताएं।
  • बेटियों को भी उनकी रुचि के अनुरूप करियर चुनने की आजादी दें।
  • घरेलू काम में बेटों से भी सहयोग लें। इसी तरह बेटियों को भी ड्राइविंग और बिजली के उपकरणों की मामूली मरम्मत जैसे काम सिखाएं, जिन्हें अब तक केवल लड़कों का काम माना जाता था।
  • अगर कोई रिश्तेदार भाई-बहनों के बीच तुलना करे, तो विनम्रतापूर्वक उसे ऐसा करने से मना करें।
  • बच्चों के साथ अपने बचपन की यादें साझा करें कि आप लोग अपने भाई-बहनों के साथ मिलकर कैसे खेलते थे। यह सुनकर उन्हें अच्छा लगेगा और उनके बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होगा।

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लेखक- विनीता

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