छोटे बच्चे को बार-बार डांटना और गुस्सा करना किसी भी माता-पिता को अच्छा नहीं लगता है। मगर उनके बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए पेरेंट्स बच्चों को डांट-डांटकर पढ़ने के लिए बैठाते हैं। हालांकि, छोटे बच्चे अपने मन के मालिक होते हैं और उन्हें जो अच्छा लगता है वे वह करते हैं। यह दिक्कत खासकर नर्सरी और केजी में पढ़ने वाले बच्चों के साथ थोड़ी ज्यादा होती है। अगर आपका बच्चा नर्सरी कक्षा में पढ़ रहा है और घर आकर पूरा समय मस्ती करता है। इस स्थिति में आप उसे क्यों न खेल-खेल ऐसी एक्टिविटी कराएं, जो उनकी नॉलेज को बढ़ाएं। नीचे लेख में जानें 5 ऐसी एक्टिविटी-
सॉर्टिंग गेम एक्टिविटी (चीजों को अलग करने वाले खेल)
सॉर्टिंग गेम इस खेल में अलग-अलग रंग, आकार और आकृति वाली चीजों को छंटाना होता है। इसके लिए एक टब में अलग-अलग रंगों की प्लास्टिक की गेंदें, ब्लॉक या घर में मौजूद सब्जियां जैसे आलू और टमाटर मिला दें। अब बच्चे से कहें कि वह लाल रंग की गेंदों को या आलू को एक अलग टोकरी में रखे। इससे बच्चे की पहचान करने की क्षमता और फोकस बढ़ता है।
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फ्लेश कार्ड्स और मैचिंग एक्टिविटी
पिक्चर वाले कार्ड्स बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। आप बाजार से फलों, जानवरों, और सब्जियों के फ्लेश कार्ड्स ला सकती हैं। फर्श पर कुछ कार्ड्स बिखेर दें। अब बच्चे से कहें कि वह सही जानवर को उसके नाम के पहले अक्षर या उसकी सही परछाई से मिलाए। इससे विजुअल मेमोरी तेज होती है।
क्ले मॉडलिंग एक्टिविटी
आमतौर पर बच्चों को रंग-बिरंगे क्ले से खेलना पसंद होता है। इसके लिएबच्चे को क्ले दें और उसे छोटे-छोटे गोले , सेब या एबीसीडी के अक्षर बनाने को कहें।इससे बच्चे की उंगलियों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे आगे चलकर उसे पेंसिल पकड़ने और लिखने में बहुत मदद मिलती है।
आर्ट एंड क्राफ्ट के साथ सेंसर प्ले एक्टिविटी
बच्चों को अलग-अलग चीजों को छूकर महसूस करने दें। इसके लिए एक चार्ट पेपर लें। अब बच्चे के हाथों पर वाटर कलर लगाएं और पेपर पर उसके हैंडप्रिंट लें। इसके अलावा, आप उंगलियों से पेंटिंग या कागज के छोटे-छोटे टुकड़े फाड़कर किसी ड्राइंग में चिपकाने की एक्टिविटी करा सकती हैं। इससे बच्चों की क्रिएटिविटी को बढ़ाता है और उन्हें रंगों को समझने में मदद करता है।
स्टोरीटेलिंग और राइम्स टाइम एक्टिविटी
नर्सरी के बच्चों के लिए भाषा और शब्दों को सीखने का यह सबसे बेस्ट तरीका है। हर दिन सोने से पहले या शाम को बच्चे को कोई छोटी और मोरल वाली कहानी सुनाएं। कहानी सुनाते समय अलग-अलग आवाजें निकालें और हाव-भाव बदलें। इसके साथ ही, एक्शन के साथ बालगीत गाएं और बच्चे को दोहराने को कहें। ऐसा करने से बच्चे की बोलने की क्षमता, नए शब्दों की वोकैबुलरी और कल्पना करने का विकास होता है।
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जब बच्चा खेल के मूड में हो, तब ये सारी एक्टिविटी कराएं। बच्चे की हर छोटी सफलता पर ताली बजाकर उसका हौसला जरूर बढ़ा सकती हैं। साथ ही,अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर करें। इसी तरह के और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी से।
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