बचपन में अक्सर हम अपनी मां से बातें छिपाते हैं, चाहे स्कूल की कोई शरारत हो या कॉलेज का कोई क्रश। हमें लगता है कि मां हमें डांटेगी या समझ नहीं पाएंगी, लेकिन उम्र बढ़ने और वक्त बदलने के साथ, एक दिन ऐसा भी आता है जब जिंदगी की हर छोटी-बड़ी बात बताने के लिए सबसे पहला फोन मां को ही जाता है। जी हां, एक बेटी का अपनी मां के साथ रिश्ता वक्त के साथ पूरी तरह बदल जाता है। आइए दो असली कहानियों और पर्सनल एक्सपीरियंस के जरिए समझते हैं कि यह खूबसूरत बदलाव कैसे आता है। जानते हैं आगे...
क्यों आया मां-बेटी के रिश्ते में बदलाव?
1 - रितु मित्तल और रिया मित्तल की कहानी (मोदीनगर): रिया बचपन से कॉलेज और ऑफिस तक की हर बात अपनी मम्मी रितु से छुपाती थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान जब वह घर आई, तो उसने अपनी मां का एक अलग ही रूप देखा। उसे अहसास हुआ कि उसकी मां अपने आप में कितनी पूर्ण और समझदार हैं।
दोनों ने साथ में कुकिंग करना शुरू किया। रिया को शुरुआत में कुछ नहीं आता था, लेकिन मम्मी ने बहुत प्यार से सिखाया। रसोई के इस सफर ने दोनों को करीब ला दिया और रिया धीरे-धीरे अपनी हर बात शेयर करने लगी। रिया को महसूस हुआ कि जो सलाह मम्मी दे सकती हैं वो कोई और नहीं दे सकता है।
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2 - रजनी गर्ग और हर्षी गर्ग की कहानी (सहारनपुर): रजनी एक टीचर थीं और कामकाजी होने के कारण बचपन में बेटी हर्षी के साथ इमोशनली ज्यादा नहीं जुड़ पाईं। घर पर भी उनका रवैया टीचर जैसा ही रहता था, जिससे हर्षी डरती थी। बचपन में हर्षी की एक यह भी शिकायत रहती थी कि वो जो बात मां को बताती है मां वहीं बात पापा को बता देती थीं लेकिन जैसे-जैसे हर्षी बड़ी हुई, उसने देखा कि मम्मी अब उसे डांटने के बजाय उसकी बातों को समझती हैं और सही सलाह देती हैं। वहीं, मां ने अपने पास हर्षी की कई बातों को संभालकर रखा। मां के बदले स्वभाव को देखकर हर्षी ने भी खुलकर सब बताना शुरू कर दिया और उनका रिश्ता मजबूत हो गया।
रिश्ते में बदलाव आना क्यों जरूरी था?
जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, पेरेंट्स और बच्चों के बीच का कम्युनिकेशन गैप दूर होना बहुत जरूरी हो जाता है। बचपन का डर अगर बड़े होने पर भी बना रहे, तो बेटियां अकेली पड़ जाती हैं। मां से बातें छिपाने से रिश्तों में दूरी आ जाती है। जब दोनों एक-दूसरे को एक दोस्त और इंसान के रूप में देखना शुरू करते हैं, तभी एक हेल्दी और मजबूत रिश्ते की नींव पड़ती है।
मां-बेटी का रिश्ता क्यों है बेस्ट फ्रेंड जैसा?
दुनिया में मां से बेहतर और सच्चा दोस्त कोई दूसरा नहीं हो सकता। दोस्त बदलते रहते हैं, लेकिन मां का प्यार बिना किसी शर्त के हमेशा एक जैसा रहता है। वह आपको बिना जज किए सुनती हैं और दुनिया में सबसे सुरक्षित महसूस कराती हैं। इससे अलग मां के पास जिंदगी का जो तजुर्बा होता है, उससे वह हमें सबसे सही सलाह दे सकती हैं, जो कोई और दोस्त नहीं दे सकता।
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अपनी मां के साथ यह रिश्ता?
- रितु और रिया की तरह साथ में कुकिंग करें, कोई नई हॉबी सीखें या वॉक पर जाएं। इससे रिश्ता मजबूत होता है।
- रजनी और हर्षी की तरह दोस्ताना व्यवहार रखें। मां को अपने काम और दोस्तों के बारे में बताएं। अपने सीक्रेट्स शेयर करें।
- यह न भूलें कि मां भी एक इंसान हैं, उनकी भी अपनी इच्छाएं और परेशानियां हो सकती हैं।
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