छोटे बच्चों को मन के सच्चे माना जाता है, लेकिन उनकी यही मासूमियत पेरेंट्स को ले डूबती है या परेशानी पैदा कर जाती है। जी हां, अनजाने में ही सही बच्चे कभी-कभी घर की पर्सनल बातें, जैसे- माता-पिता का झगड़ा, पैसों से जुड़ी बातें या किसी रिश्तेदार की बुराई आदि बाहर पड़ोसियों या दोस्तों के सामने बोल देते हैं। शुरुआत में यह आदत आम लगती है, लेकिन जैसे-जैसे समय निकल जाता है इसे सुधार पाना मुश्किल हो जाता है और यह परिवार के लिए सट्रेस का कारण बन सकती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि बच्चे ऐसा क्यों करते हैं और माता-पिता के तौर पर इस आदत को कैसे बदला जाए? आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। इस विषय पर हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...

आखिर बच्चे घर की बातें बाहर क्यों बताते हैं?

छोटे बच्चे प्राइवेट बात और पब्लिक बात के बीच का अंतर समझ नहीं पाते। उनके लिए हर बात एक कहानी जैसी होती है, जिसे वे दूसरों को सुनाना चाहते हैं। 

इससे अलग ध्यान आकर्षित करने की चाह कई बार बच्चों से यह गलती करा देती है। यदि घर में पेरेंट्स के बीच लगातार स्ट्रेस या पैसों की किल्लत को लेकर बहस होती है, तो बच्चा डरे होने के कारण अपने किसी करीबी दोस्त को सब बता सकता है।

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बच्चों की इस आदत से कैसे निपटें?

  • जब बच्चा बाहर की बात घर पर आकर बताए या घर की बात बाहर बोले तो उस पर न चिल्लाएं बल्कि उसे अकेले में ले जाकर प्यार से समझाएं कि ऐसा करना गलत है।
  • बच्चों को आसान शब्दों में यह भी बताएं कि कौन सी बातें बाहर दोस्तों से शेयर की जा सकती हैं और कौन सी बातें सिर्फ घर के अंदर रखनी हैं।
  • बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। ऐसे में आप भी खुद फोन पर या पड़ोसियों से दूसरों के घरों की बातें न करें।

एक्सपर्ट की राय

बच्चे को घर में ऐसा माहौल दें, जहां वह अपने मन की बात बिना किसी डर के आपसे कह सके। जब आप उसकी बातें सुनेंगे, तो वह बाहर जाकर बातें नहीं बताएगा।

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Images: magnific