मोहम्मद रफी सिर्फ एक गायक नहीं थे, बल्कि भावनाओं की आवाज थे। उन्होंने हर इमोशन को आवाज दी। चाहे प्यार भरे गाने हों, दर्द भरे नगमे हों, प्रेरणादायक गीत हों, भजन हों या देशभक्ति के गीत...उनकी आवाज सभी के दिलों को छू जाती थी। उनकी आवाज में कई ऐसे गाने हैं, जो आज भी लोगों को इमोशनल कर देते हैं। क्या आपको पता है कि उनका गाया एक ऐसा गाना भी था, जिसने हमारे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी भावुक कर दिया था। यहां तक कि इंदिरा गांधी ने रोने लगी थीं और रोते हुए उन्होंने यह भी कह दिया था कि वो उस गाने को और नहीं सुन पाएंगी। चलिए आपको बताते हैं यह दिलचस्प किस्सा।

पंडित नेहरू को समर्पित था मोहम्मद रफी साहब का यह गाना

यह दिलचस्प किस्सा साल 1967 की फिल्म ' नौनिहाल' से जुड़ा है। इसे सावन कुमार ने बनाया था, लेकिन यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया गया था। सावन कुमार, नेहरू जी का बहुत सम्मान करते थे और उनके निधन के बाद उनके जीवन, सोच और विचारों को आने वासी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने यह फिल्म बनाई थी।

इस फिल्म में वो एक ऐसा गीत भी चाहते थे, जो उनकी जिंदगी की कहानी कह सके। यह गाना था- 'मेरी आवाज सुनों प्यार का राग सुनो।' इस गाने के बोल कैफी आजमी ने लिखे थे और मोहम्मद रफी ने इसे आवाज दी थी। कहा जाता है इस गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त रफी साहब भी काफी इमोशनल हो गए थे और उस वक्त कई लोग इस गाने को दोबारा सुनने के लिए भी फिल्म देखने जाते थे।

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मोहम्मद रफी के इस गाने को सुनकर रोने लगी थीं इंदिरा गांधी

फिल्म को काफी लोग पसंद कर रहे थे, लेकिन सावन कुमार के मन में इच्छा थी कि यह फिल्म देश के हर कोने तक पहुंचें और इसे ज्यादा से ज्यादा लोग देखें। ऐसे में किसी ने उन्हें सुझाव दिया कि अगर सरकार इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दे, तो टिकट सस्ती हो जाएगी और ज्यादा लोग इसे देख पाएंगे। इसी बात को मन में लेकर वो लोग इंदिरा गांधी से मिलने पहुंचे थे। उस वक्त देश के प्रधानमंत्री के ऑफिस तक पहुंचना इतना आसान नहीं था।

ऐसे में बहुत जतन करके सावन कुमार, फिल्म के संगीतकार मदन मोहन और उस वक्त के एक बड़े नेता हरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय प्रधानमंत्री के ऑफिस पहुंचे थे। वहां उन्होंने इंदिरा गांधी से फिल्म को टैक्स फ्री करवाने की बात कही और बताया कि यह फिल्म जवाहर लाल नेहरू जी के जीवन पर बनी है। इंदिरा गांधी के पास फिल्म देखने का समय नहीं था और ऐसे में उन्हें मोहम्मद रफी साहब का आवाज में फिल्म का गाना 'मेरी आवाज सुनों प्यार का राग सुनो...' सुनाया गया और वो काफी इमोशनल हो गईं। उन्होंने आंसू रोकते हुए कहा कि गाने को प्ले करना बंद कर दें...वो और नहीं सुन पाएंगी। इसके बाद उन्होंने फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया था।

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