मेनोपॉज महिलाओं की जिंदगी में आने वाला एक नेचुरल फेज है, जिससे हर महिला को आमतौर पर 45-55 साल के बीच गुजरना पड़ता है। हालांकि, आजकल कई कारणों से चलते कुछ महिलाओं को 40 की उम्र मे भी मेनोपॉज के लक्षण महसूस होने लगते हैं। इस समय पर महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव आते हैं, जिनका असर उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के साथ नींद पर भी पड़ सकता है। कई महिलाओं को इस समय पर नींद मुश्किल से आती है, तो कई महिलाओं की नींद बार-बार खुल जाती है, ऐसा क्यों होता है और क्या यह नॉर्मल है, चलिए इसका जवाब एक्सपर्ट से जानते हैं। यह जानकारी हम डॉक्टर सोनू खोखर, एमबीबीएस डॉक्टर, हेल्थ एंड वेलनेस एक्सपर्ट (Dr. Sonu Khokhar, MBBS Doctor, Health and Wellness Expert) संग हुई बातचीत के आधार पर शेयर कर रहे हैं।
मेनोपॉज में रात को बार-बार क्यों खुलती है नींद?
डॉक्टर सोनू का कहना है कि सबसे पहले तो किसी भी महिला के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि मेनोपॉज में मूड स्विंग्स, नींद न आने, रात के समय ज्यादा पसीना आने, हॉट फ्लैशेज, मूड में बदलाव होने, हड्डियों के कमजोर और चिड़चिड़ापन महसूस होने जैसी बातें काफी हद तक नॉर्मल हैं और इनके लिए आपको घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं है। बेशक अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको बहुत अधिक परेशान कर रहा है या इसकी वजह से आपकी रूटीन पर असर हो रहा है, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। इस समय पर नींद न आने या रात को नींद बार-बार खुलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
1. एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होना
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने लगता है। अक्सर इस हार्मोन को सिर्फ महिलाओं की फर्टिलिटी और रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह शरीर के तापमान, बोन हेल्थ और नींद को कंट्रोल करने में भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इसके स्तर में बदलाव के कारण कुछ महिलाओं की नींद प्रभावित हो सकती है। उन्हें रात में बार-बार जागने या दोबारा सोने में परेशानी होने लगती है।
2. रात में अचानक गर्मी महसूस होना
मेनोपॉज के दौरान हॉट फ्लैशेज यानी अचानक तेज गर्मी महसूस होना एक आम लक्षण है। इसमें चेहरे, गर्दन और छाती पर गर्मी महसूस हो सकती है। कुछ महिलाओं को इसके साथ पसीना भी आता है। रात में ऐसा होने पर नींद अचानक खुल सकती है और शरीर को सामान्य महसूस होने में समय लग सकता है। यह भी रात में नींद न आने या नींद बार-बार टूटने की वजह सो सकती है।
3. एंग्जायटी और तनाव
मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों के चलते महिलाओं को कई बार तनाव और एंग्जायटी होने लगती है और इसकी वजह से रात में वे ओवरथिंकिंग करना शुरू कर देती हैं, जिसके चलते नींद नहीं आती है।
4. बार-बार यूरिन आना
कुछ महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान रात में बार-बार यूरिन जाने की जरूरत महसूस होती है। एस्ट्रोजन का लेवल कम होने के चलते यूरिनरी ट्रैक्ट के टिश्यूज पर असर होता है और यूरिन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। यह भी नींद टूटने का एक कारण होता है।
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मेनोपॉज में अच्छी नींद के लिए क्या करें?
मेनोपॉज के समय कुछ खास बातों का ध्यान रखने से आपकी मुश्किल कम होगी और नींद अच्छी आएगी।
- सोने और जागने का समय तय करें। रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।
- कमरे को ठंडा रखें ताकि नींद अच्छे से आए। हल्के कपड़े पहनें।
- शाम से ही चाय-कॉफी से दूरी बना लें।
- सोने से पहले मेडिटेशन करें।
- स्क्रीन टाइम कम करें।
नोट- अगर मेनोपॉज के दौरान आपको नींद न आने की दिक्कत हो रही है या अन्य कोई समस्या बार-बार परेशान कर रही है, तो इसे नॉर्मल समझकर नजरअंदाज न करें। इसे हर बार केवल हार्मोनल बदलावों से जोड़ना सही नहीं है। डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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