आपने अक्सर नोटिस किया होगा, घर पर आपका BP बिल्कुल नॉर्मल 120/80 आता है, लेकिन जैसे ही आप हॉस्पिटल या क्लिनिक में डॉक्टर के सामने BP चेक कराती हैं, मशीन 140/90 या उससे भी ज्यादा दिखाने लगती है। आप सोचते हैं कि मशीन खराब है या आप बीमार हो गए हैं। असल में ये एक आम मेडिकल कंडीशन है, जिसे डॉक्टर व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कहते हैं। इसमें डॉक्टर के सफेद कोट को देखकर ही शरीर स्ट्रेस में आ जाता है।
क्या सच में व्हाइट कोट हाइपरटेंशन बीमारी है?
व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कोई नई बात नहीं है, हर 5 में से 1 व्यक्ति को इसका अनुभव होता है। ये तब होता है जब आप हॉस्पिटल के माहौल, डॉक्टर से मिलने की घबराहट या अपनी रिपोर्ट को लेकर टेंशन में होती हैं। इस टेंशन की वजह से आपका नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है और अचानक से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। हालांकि ये अस्थायी होता है, लेकिन इसे इग्नोर करना भी खतरनाक हो सकता है। आइए यू.एस के National Library of Medicine के PubMed Central 2020 की रिसर्च से जानते हैं कि व्हाइट कोट हाइपरटेंशन के क्या लक्षण होते हैं और कैसे इससे बचाव करें?
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क्लिनिक में ही BP क्यों बढ़ जाता है?
1. डॉक्टर से मिलने का डर
कई लोगों को मन में डर होता है कि कहीं कोई बड़ी बीमारी न निकल आए। यही एंग्जायटी BP बढ़ा देती है।
2. हॉस्पिटल का माहौल
हॉस्पिटल की भीड़, दवाइयों की गंध और दूसरी गंभीर मरीजों को देखकर दिमाग तनाव में आ जाता है।
3. अचानक भागदौड़
अक्सर हम जल्दी-जल्दी चलकर, सीढ़ियां चढ़कर सीधे BP चेक कराते हैं, जिससे शरीर थका होता है और BP हाई आता है।
4. नर्वस सिस्टम का रिएक्शन
घबराहट में शरीर एड्रेनालाईन हार्मोन छोड़ता है, जिससे दिल तेजी से धड़कता है और नसें सिकुड़ जाती हैं।
5. जांच से पहले की गलतियां
कभी-कभी ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह व्हाइट कोट हाइपरटेंशन के बजाय जांच से पहले की आदतें भी होती हैं जैसे, चाय-कॉफी पीना, धूम्रपान करना या जांच से पहले पर्याप्त आराम न करना। इसलिए, बीपी कराने का सही तरीका पता होना चाहिए।
इसके लक्षण कैसे पहचानें?
इसका सबसे बड़ा लक्षण यही है कि घर पर BP नॉर्मल और क्लिनिक में हाई। इसके अलावा क्लिनिक में जाते ही घबराहट, हाथों में पसीना, दिल की धड़कन तेज होना और बेचैनी महसूस होना भी इसके संकेत हैं। अगर आपके साथ हर बार ऐसा होता है तो डॉक्टर को जरूर बताएं।
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क्या व्हाइट कोट हाइपरटेंशन खतरनाक है?
व्हाइट कोट हाइपरटेंशन को हमेशा गंभीर बीमारी नहीं माना जाता है, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है। कुछ लोगों में आगे चलकर लगातार हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर बीपी की जांच कराते रहना चाहिए।
अगर क्लिनिक में बार-बार बीपी बढ़ा हुआ आता है, तो डॉक्टर घर पर रीडिंग दर्ज करने या 24 घंटे तक ब्लड प्रेशर की निगरानी कराने की सलाह देते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बीपी केवल अस्पताल में बढ़ता है या रोजमर्रा की जिंदगी में भी हाई रहता है।
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व्हाइट कोट हाइपरटेंशन से बचने के लिए क्या करें?
अगर डॉक्टर के पास जाते समय आपको घबराहट होती है, तो कुछ आसान आदतें मददगार हो सकती हैं।
- डॉक्टर के पास जाने से 15 मिनट पहले शांत बैठ जाएं, फोन न चलाएं।
- घर पर ही एक डायरी में रोज सुबह-शाम BP लिखें और डॉक्टर को दिखाएं, इसे होम BP मॉनिटरिंग कहते हैं।
- चेकअप से पहले चाय, कॉफी और सिगरेट से बचें।
- डॉक्टर से खुलकर बात करें, अपनी घबराहट बताएं और गहरी सांस लें।
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क्लिनिक में BP का बढ़ना सिर्फ एक नंबर का खेल नहीं है, बल्कि आपके मन और शरीर के कनेक्शन का सबूत है। अगर आपका BP सिर्फ डॉक्टर के पास ही बढ़ता है तो घबराने के बजाय उसे ट्रैक करना शुरू करें। घर पर BP मॉनिटर करें और सारी रीडिंग डॉक्टर के साथ शेयर करें। सही समय पर ध्यान देकर आप बेवजह की BP की दवाइयों से बच सकते हैं और अपने दिल को सेहतमंद रख सकते हैं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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