हम महिलाओं के साथ अक्सर ऐसा होता है कि दिनभर हम काम में बिजी रहते हैं, लेकिन रात को बिस्तर पर लेटते ही हजारों ख्याल हमारे दिमाग में आने लगते हैं। कई बार पूरे दिन की बातें, तो कभी-कभी सैकड़ों पुरानी बातें हमें परेशान करने लगती हैं। रात के समय ओवरथिंकिंग क्यों बढ़ जाती है और क्यों रात को बिस्तर पर लेटते ही हजारों ख्याल दिमाग में दौड़ने लगते हैं, चलिए इसके पीछे की वजह एक्सपर्ट से समझते हैं। इस बारे में Dr. Naveen Kumar Dhagudu, Senior Consultant Psychiatrist, Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad जानकारी दे रहे हैं।

दिन में मजबूत दिखने वाली महिलाएं रात में क्यों सोचती रहती हैं हर छोटी-बड़ी बात?

  • कई महिलाओं को रात में सोने के समय बहुत सारे विचार आने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रात में मन को शांत होने का मौका मिलता है।
  • दिनभर काम, घर-परिवार की जिम्मेदारियों और दूसरी गतिविधियों में दिमाग व्यस्त रहता है, लेकिन जब रात में शांति होती है और ध्यान भटकाने वाली चीजें कम हो जाती हैं, तो मन में दबी चिंताएं, अधूरे काम, रिश्तों से जुड़ी परेशानियां और भविष्य को लेकर कई तरह के सवाल आने लगते हैं।
  • कई बार पुरानी बातें और गलतियां भी हमें याद आने लगती हैं। इस स्थिति में दिमाग लगातार सोचता रहता है और शरीर को आराम करना मुश्किल हो जाता है।
  • इसे संज्ञानात्मक उत्तेजना (Cognitive Arousal) कहा जाता है। इसकी वजह से तनाव बढ़ सकता है और नींद आने में परेशानी हो सकती है।

हार्मोनल बदलाव भी डालते हैं असर

महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, बच्चे को जन्म देने के बाद और मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी नींद और भावनाओं पर असर डाल सकते हैं। इसके अलावा, तनाव, चिंता, देर रात तक मोबाइल चलाना, कैफीन का ज्यादा सेवन और सोने-जागने का समय बार-बार बदलना भी इस समस्या को बढ़ा सकता है।

रात में ओवरथिंकिंग की यह भी हो सकती है वजह

रात में ओवरथिंकिंग करने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी होती है कि जब मन परेशान होता है, तो रात में कई ख्याल हमें घेर लेते हैं। जब आपका मूड अच्छा होता है, तो रात में आप ओवरथिंकिंग नहीं करते, बल्कि आपको आसानी से नींद आ जाती है, लेकिन जब किसी बात को लेकर तनाव होता है, तो चाहकर भी हम रात को चैन से नहीं सो पाते हैं।

रात में ओवरथिंकिंग से कैसे बचें?

  • रोज एक ही समय पर सोने की कोशिश करें।
  • सोने से पहले अपनी चिंताओं और अगले दिन के कामों को लिख लें।
  • रात में मोबाइल का इस्तेमाल कम करें।
  • धीरे-धीरे गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।
  • शाम के समय चाय-कॉफी से बचें।

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