बर्तन धोने के साबुन और कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट दोनों में मौजूद केमिकल्स पेट और त्वचा दोनों के लिए बहुत ही नुकसानदायक होते हैं। इनके विकल्पों पर को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है लेकिन अब तक कोई खास समाधान नहीं निकल पाया है। आइए विशेषज्ञ से समझें कि इस्तेमाल के दौरान इनके नुकसान से कम से कम कैसे बचा जा सकता है...
साबुन के नुकसान से कैसे बचें?
एक रिसर्च के मुताबिक लगातार अगर बर्तन धोने या कपड़े धोने के साबुन या डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया गया तो न केवल पेट से जुड़ी समस्याएं होंगी बल्कि त्वचा भी प्रभावित होती है। बर्तन धोने के बाद जो कण बर्तन में अवशेष रह जाते हैं वे खाने के साथ पेट के अंदर जाने से फूड पॉइजनिंग, डायरिया, अल्सर जैसी बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है। इनके विकल्पों के तौर पर ऑर्गेनिक साबुन-सर्फ या फिर नेचुरल पदार्थों के इस्तेमाल की बात कही जाती है, लेकिन इनकी उपलब्धता कम होने के कारण ज्यादा लोग इनका लाभ नहीं उठा पाते हैं।
साबुन या डिटर्जेंट में हानिकारक कीटनाशक
बर्तन धोने के साबुन में ट्राइक्लोसन, फास्फेट, सोडियम लॉरिल सल्फेट के साथ आर्टिफिशियल महक मिली होती है। ये केमिकल बर्तन के बैक्टीरिया को मारने के लिए तो ठीक हो सकते हैं, लेकिन आपके पेट के लिए खतरनाक साबित होते हैं। ये सभी पेट के गुड बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं। वहीं, कपड़े धोने के साबुन और डिटर्जेंट में भी सल्फर ट्राईऑक्साइड, एथिलीन ऑक्साइड समेत कई तरह के हानिकारक केमिकल मिले होते हैं। इनमें से ज्यादातर केमिकल कीटनाशक के रूप में भी इस्तेमाल किए जाते हैं, जो त्वचा से संबंधित कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। इनमें सिरोसिस, एक्जिमा, खुजली, त्वचा का छिलना, लाल हो जाना, गलना और रेड रैशेज होना शामिल है।
अपना सकते हैं ये उपाय
- साबुन से बर्तन धोने के बाद उन्हें सूखे कपड़े से पोंछने की आदत डालनी चाहिए। इससे बर्तनों में साबुन के जो कण रह जाते हैं वे साफ हो जाते हैं और नुकसान कम होता है।
- वाटरप्रूफ रबर के ग्लव्स पहनकर बर्तन और कपड़े धोने की सलाह दी जाती है।
बर्तन धोने वाले साबुन के विकल्प
आप बर्तन धोने के लिए इन विकल्पों को आजमा सकती हैं-
- बेकिंग सोडा- बेकिंग सोडा और थोड़े से गर्म पानी का पेस्ट बनाकर बर्तनों पर लगाने से जिद्दी चिकनाई और दाग आसानी से साफ हो जाते हैं।
- नींबू और नमक- नींबू के रस में नमक मिलाकर बर्तनों पर रगड़ने से बर्तन चमक जाते हैं और बैक्टीरिया भी खत्म होते हैं।
- सिरका- पानी और सिरके को बराबर मात्रा में मिलाकर घोल बनाएं। यह चिकनाई हटाने में मदद करता है।
- राख या मिट्टी- राख और मिट्टी से बर्तन साफ करना एक पारंपरिक और प्राकृतिक तरीका है। इनसे बर्तन अच्छी तरह से साफ होते हैं।
अपोलो अस्पताल, दिल्ली के त्वचा रोग विशेषज्ञ, डॉ.संदीप अरोड़ा बताते हैं कि साबुन और सर्फ दोनों से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। बर्तनों के अवशेष कण खाने के साथ पेट के अंदर जाकर गंभीर रोग पैदा कर सकते हैं साथ ही स्किन की प्राकृतिक नमी और तेल नष्ट कर देते हैं। जिससे रूखापन, लालिमा, हाथों में खुजली, रैशेज, एलर्जी आदि समस्याएं शुरू होने लगती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए केमिकल फ्री, सुगंधहीन, ग्लिसरीन युक्त और पीएच बैलेंस वाले साबुन या डिटर्जेंट खरीदने की कोशिश करनी चाहिए। यही नहीं, गर्म पानी के बदले गुनगुने या फिर ठंडे पानी से ही धोने का काम करने से हाथ ज्यादा ड्राई नहीं होते। धोने के बाद हाथों को सूखा करके तुरंत एक अच्छा मॉइश्चराइजर लगा लें, जिससे स्किन की हाइड्रेशन बनी रहे। अगर स्किन में फटने वाली जगहों से खून आने लगे तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञों से परामर्श करना चाहिए।
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लेखक- सुमन अग्रवाल
