जैसे ही लोगों को सिर में या हाथ में दर्द होता नहीं कि वे तुरंत फोन उठाकर गूगल करने लगते हैं। इंटरनेट पर बीमारियों के लक्षण ढूंढ़ने की यह आदत आजकल आम हो चुकी है, जिसे मेडिकल भाषा में 'साइबरकॉन्ड्रिया'के नाम से जानते हैं। मामूली सर्दी-खांसी को भी गंभीर बीमारी मान लेना मानसिक सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, लेकिन आपको पता होना चहिए कि हर छोटे लक्षण को सर्च करने की यह आदत फायदे की जगह नुकसान पहुंचा रही है। जी हां, यह आदत लोगों को बेवजह गंभीर मानसिक तनाव और एंग्जायटी यानी घबराहट की ओर धकेल रही है। इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
हम इंटरनेट पर बीमारियों के लक्षण क्यों सर्च करते हैं?
आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट पर जानकारी पाना बेहद आसान और फ्री हो गया है। जब भी शरीर में कोई नया लक्षण महसूस होता है, तो लोग तुरंत जानने और परेशानी को दूर करने के लिए गूगल की मदद लेते हैं।
कई बार डॉक्टर के पास जाने के आलस या फीस से बचने के चक्कर में लोग खुद ही डायग्नोसिस करना बेहद ही आसान लगता है। ऐसे में तुरंत राहत पाने की यही चाहत धीरे-धीरे एक लत बन जाती है।
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यह आदत कैसे बढ़ा रही है तनाव?
- बता दें कि इंटरनेट पर जो जानकारी पाई जाती है वो अधूरी होने के साथ-साथ बेहद सामान्य भी है। जब आप किसी सामान्य लक्षण जैसे- सिरदर्द या थकान गूगल पर सर्च करते हैं, तो सर्च इंजन कई बार उसे किसी गंभीर या जानलेवा बीमारी से जोड़कर दिखा देता है, जिससे स्ट्रेस बढ़ता है।
- यही कारण है ये सब पढ़कर व्यक्ति बिना वजह डर जाता है और उसका दिल तेजी से धड़कने लगता है।
- यह डर आपके दिमाग में घर कर जाता है, जिससे स्ट्रेस का स्तर बढ़ जाता है।
- यह स्थिति आपकी रोज की लाइफ, नींद और काम को बुरी तरह प्रभावित करने लगती है।
इससे खुद को कैसे बचाएं?
- इसके लिए आपको अपनी डिजिटल आदतों से छुटकारा पाना होगा।
- ऐसे में शरीर में कोई भी लक्षण दिखें तो तुरंत फोन उठाकर सर्च करने की आदत पर लगाम लगाएं।
- खुद को यह समझाएं कि इंटरनेट पर लिखी हर बात आपके शरीर पर लागू नहीं होती।
- सेहत से जुड़ी जानकारियों के लिए मेडिकल वेबसाइट्स पर ही भरोसा करें या डॉक्टर से मिलें।
एक्सपर्ट की सलाह
इंटरनेट सिर्फ जानकारी दे सकता है, इलाज या सही डायग्नोसिस नहीं। हर व्यक्ति का शरीर और मेडिकल हिस्ट्री अलग होती है। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को सलाह देते हैं कि अगर कोई लक्षण 2-3 दिनों से ज्यादा समय तक परेशान कर रहा है, तो डॉक्टर से मिलकर सही जांच करवाएं।
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