'इतनी-सी बात पर क्यों रो रहे हो?' या 'आंसू कमजोरी की निशानी हैं...' ये बात हमें बचपन से अक्सर कही जाती है और किसी वजह से हमें लगने लगता है कि शायद आंसू बहाना कमजोरी को दिखाता है या शायद मजबूत दिखने के लिए भावनाओं को अंदर दबा लेना ही सही है, लेकिन ऐसा नहीं है। असल में दुख, तनाव और भावनाओं को भीतर ही दबाकर रखना हमारी मेंटल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है। वहीं दिल भर आने पर खुलकर रो लेने से मन हल्का हो जाता है और यह मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है। चलिए जानते हैं कि मन भारी है तो जी भरकर रो लेना, मेंटल हेल्थ के लिए कितना सही है? इस बारे में Dr. Naveen Kumar Dhagudu, Senior Consultant Psychiatrist, Yashoda Hospitals, Hitec City जानकारी दे रहे हैं।
क्या दिल भर आने पर रो लेना मेंटल हेल्थ के लिए सही है?
डॉक्टर नवीन का कहना है कि अगर आप किसी बात को लेकर परेशान हैं, इमोशंस को मन में नहीं रख पा रहे हैं या कोई बात आपको बुरी लगी है, जिसे लेकर आपको रोना आ रहा है, तो बेशक ऐसा करना मेंटल हेल्थ के लिए सही होता है। इमोशंस को लंबे समय तक मन में दबाए रखने के चलते हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ दोनों खराब हो सकती है। इसके मेंटल हेल्थ को कई फायदे भी मिल सकते हैं।
स्ट्रेस कम होता है
- रोना भावनाओं को बाहर निकालने का एक स्वाभाविक तरीका है, जिससे मानसिक संतुलन वापस आता है और तनाव का स्तर कम होता है।
- रोने पर आपका शरीर एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे 'फील-गुड' केमिकल बनाता है, जो शारीरिक और भावनात्मक दर्द को कम करके शांति का एहसास कराते हैं।
दिमाग डिटॉक्स होता है
- यह एक बायोलॉजिकल डिटॉक्स प्रक्रिया है, जिससे आपको हल्का महसूस होता है। साथ ही, रोना शरीर से कोर्टिसोल जैसे तनाव वाले हार्मोन को बाहर निकालने में भी मदद करता है।
- इसके अलावा, रोने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जो शरीर को 'फाइट ऑर फ्लाइट' (लड़ने या भागने) की स्थिति से 'रेस्ट एंड डाइजेस्ट' (आराम करने और पचाने) की स्थिति में लाने में मदद करता है।
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भावनाएं मन में दबाने से हो सकता है डिप्रेशन
भावनाओं को दबाने से आगे चलकर एंग्जायटी, डिप्रेशन और यहां तक कि शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं। यहां एक बात और समझने की जरूरत है कि अगर रोना बहुत ज्यादा हो, उस पर काबू न पाया जा सके या रोजमर्रा के कामों में बाधा डाले, तो यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी समस्याओं का संकेत हो सकता है जिनके लिए प्रोफेशनल मदद की जरूरत होती है।
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