हर साल अक्टूबर का महीना ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है, जिसकी थीम है 'Every Story is Unique, Every Journey Matters'। आज के वक्त में ज्यादातर भारतीय महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो रही हैं, जिसकी जानकारी उन्हें कई वक्त के बाद होती हैं। वहीं, कई महिलाएं आईटी कंपनियों, बीपीओ, अस्पतालों और दूसरी जगहों पर नाइट शिफ्ट में काम करती हैं। किसी की ड्यूटी रात 10 बजे से शुरू होती है तो किसी को सुबह तक जागना पड़ता है। ऐसे में रातभर जागना और दिन में सोना उनका रूटीन बन जाता है।

ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि रात में लगातार काम करने का असर आपकी सेहत पर किस तरीके से पड़ता है? मुंबई के M।O।C कैंसर केयर के फिजिशियन डॉ. कार्तिक असुतकर के मुताबिक, रिसर्च में लंबे समय तक नाइट शिफ्ट करने और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध बताया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रात में काम करने वाली हर महिला को कैंसर होगा।

क्या नाइट शिफ्ट से बढ़ता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा?

भागदौड़ भरी जिंदगी में करियर और नौकरी की जरूरतें अक्सर हमारे रूटीन को पूरी तरह बदल देती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लंबे समय तक यह खराब रूटीन आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकता है? आइए जानते हैं कैसे?

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रात में काम करने से ब्रेस्ट कैंसर का क्या है कनेक्शन?

इसी खतरे को देखते हुए, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने साल 2019 में रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को कैंसर का खतरा बढ़ाने वाला माना था, जिन्हें ग्रुप 2A में रखा गया था। इस क्लासिफिकेशन में उन महिलाओं को रखा गया था, जिसमें ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े कुछ सबूत मिले थे। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि नाइट शिफ्ट करने वाले हर महिला को कैंसर होगा।

रात में जागने से शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

हमारा शरीर हर रोज 24 ऑवर साइकिल फॉलो करता है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहते हैं। यह रिदम दिमाग तक मैसेज पहुंचाती है कि कब सोना है, कब जागना है और शरीर के कई जरूरी काम किस समय होने चाहिए? जब कोई व्यक्ति लगातार रात में जागता है और दिन में सोता है, तो शरीर की यह वॉच बिगड़ सकती है।

वहीं, एक हार्मोन जिस पर रिसर्चर्स की खास दिलचस्पी है, वो मेलाटोनिन है, जो मुख्य रूप से अंधेरे में बनता है और नींद को कंट्रोल करने में मदद करता है। इस हार्मोन पर हुई रिसर्च से पता चलता है कि मेलाटोनिन शरीर में कैंसर से जुड़ी बातों को भी प्रभावित करता है। हालांकि, साइंटिस्ट अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि लंबे समय तक शरीर की यह रूटीन बिगड़ने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कितना बढ़ सकता है।

डॉक्टर ने नाइट शिफ्ट करने वाली महिलाओं को क्या सलाह दी?

डॉ कार्तिक असुतकर के मुताबिक, भारत में बहुत से लोगों के लिए नाइट शिफ्ट में काम करना मजबूरी या नौकरी का हिस्सा है। ऐसे में इसे लेकर बेवजह डरने की जरूरत नहीं है। लंबे समय तक नींद और जागने के बदलते रूटीन को जरूर गंभीरता से लेना चाहिए। रिसर्च में नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध सामने आया है, लेकिन दोनों के बीच संबंध मिलने का मतलब यह नहीं है कि नाइट शिफ्ट सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनती है।

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क्या कहती है ब्रेस्ट कैंसर पर हुई रिसर्च?

साल 2022 में प्रकाशित एक रिसर्च में 33 स्टडी का सामने आई थीं, जिसमें करीब 43 लाख लोगों को शामिल किया गया था। इस स्टडी से पता चला था कि रात की शिफ्ट में काम करने वाली 20 परसेंट महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा था। हालांकि, हर रिसर्च में एक जैसे नतीजे सामने नहीं आए हैं। कुछ बड़ी स्टडी में नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध न होने की बात कही गई है।

साल 2024 में प्रकाशित एक रिव्यू में भी इस टॉपिक पर हुई नई रिसर्च को स्टडी किया गया था। जिसमें लंबे समय तक लगातार या बार-बार नाइट शिफ्ट करने और ब्रेस्ट कैंसर के संबंध होने के कुछ संकेत मिले थे। हालांकि, इस बारे में पुख्ता नतीजे तक पहुंचने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है। ध्यान देने वाली बात यह है कि रिसर्च में सामने आया 20% ही खतरा है। इसका मतलब यह नहीं है कि नाइट शिफ्ट करने वाली हर पांच में से एक महिला को ब्रेस्ट कैंसर होगा।

ब्रेस्ट कैंसर पर एक अन्य एक्सपर्ट ने रखी अपनी राय

स्टरलिंग हॉस्पिटल की ऑन्कोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. पायल एस. गुप्ता का कहना है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। उन्हें पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और अपनी उम्र व हेल्थ के हिसाब से समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए।

नाइट शिफ्ट करने वाली महिलाएं अपनी सेहत का ख्याल कैसे रखें?

अगर आप भी रात में काम करती हैं, तो अपनी नींद और सेहत को नजरअंदाज न करें। कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी नींद की गुणवत्ता और सामान्य सेहत को बेहतर बना सकती हैं।

  1.  कोशिश करें कि हर दिन एक समय पर सोएं और ज्यादा से ज्यादा नींद लें।
  2.  दिन में सोते समय कमरे में पर्दे लगाएं, ताकि बाहर की रोशनी कमरे में न आएं।
  3.  सोने की जगह पर शोर कम करें, ताकि आपकी नींद बार-बार न टूटे।
  4.  अगर लंबे समय से ठीक से नींद नहीं आ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
  5.  अगर ब्रेस्ट में गांठ, स्किन में चेंज या निप्पल से डिस्चार्ज जैसी परेशानी दिखे, तो डॉक्टर से जांच करवाएं।
  6.  आपकी उम्र, परिवार में कैंसर की हिस्ट्री और दूसरे जोखिमों के आधार पर आप डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।

महिलाओं को अपनी नौकरी या काम के समय को लेकर खुद को दोषी नहीं मानना चाहिए। नाइट शिफ्ट करने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें कैंसर हो ही जाएगा। कुल मिलाकर, नाइट शिफ्ट करने वाली महिलाओं को डरने की नहीं, बल्कि अपनी नींद और सेहत का ध्यान रखने की जरूरत है। रात में काम करने और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संभावित संबंध को लेकर रिसर्च जारी है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।