भारत एक खामोश और चिंताजनक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। बीते कुछ दशकों से भारत भले ही कुपोषण की गिरफ्त से निकलता हुआ दिख रहा है, लेकिन अब एक नई तरह की चुनौती सामने है- बढ़ते मोटापे, डायबिटीज और कई सारे गैर-संचारी (एनसीडी) रोगों की। यह शहरीकरण, शिथिल होती जीवनशैली और हानिकारक भोजन पर बढ़ती निर्भरता की देन है। लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं और खानपान को लेकर बहुत लापरवाह हो चुके हैं। नींद, शारीरिक सक्रियता और आहार के बीच एक संतुलन बनाया जाए, तो यह अलग-अलग बदलावों के जोड़ से अधिक हो जाता है। यह हमारे जिंदगी में भी बड़ा बदलाव कर सकता है। अगर आप भी लंबा और हेल्‍दी जीवन जीना चाहते हैं तो इन 3 आदतों को जरूर अपनाएं। इनके बारे में हमें इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्‍टेंट डॉक्टर सुरनजीत चटर्जी बता रहे हैं।

हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल के फायदे

रिसर्च के अनुसार जीवन प्रत्याशा में 9.35 वर्ष और स्वस्थ जीवन अवधि में 9.46 वर्ष तक की वृद्धि के लिए 42 से 103 मिनट की एक्‍सरसाइज, प्रतिदिन सात से आठ घंटे की अच्छी नींद और स्वास्थ्यवर्धक आहार (जैसे-मछली, मोटा अनाज, सब्जी और फल आदि) जरूरी है। हालांकि, अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि आप दो मिनट एक्‍सरसाइज करें और यह मानकर चलें कि आपका लक्ष्य पूरा हो गया। आपको 20 से 30 मिनट तक तेज और सांस फुलाने वाली एक्‍सरसाइज करनी चाहिए, जिसमें स्ट्रेंथ और कार्डियो दोनों शामिल हों। इसी तरह अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड, स्‍मोकिंग, अल्कोहाल, बॉडी मास इंडेक्स, अनिद्रा, खर्राटे और दिन की समय में सुस्ती ना आए, इन सभी बातों का समान रूप से ध्यान रखना होगा। स्वस्थ जीवन की नींव स्वस्थ, संतुलित और व्यवस्थित दिनचर्या पर ही टिकी है, इसे समय रहते हमें स्वीकार कर लेना चाहिए।

1. कैसे प्लान करें वर्कआउट?

वर्कआउट का प्लान अक्सर सिर्फ शरीर को ही ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं, जिसमें कैलोरी बर्न करने, स्ट्रेंथ बढ़ाने या शरीर के लचीलेपन पर ही फोकस रहता है। हालांकि, एक्‍सरसाइज आपको मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहतर महसूस कराए, यह भी उतना ही जरूरी है। शोध बताते हैं कि एक्‍सरसाइज से एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षणों में कमी आती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है। एक्‍सरसाइज करते समय एकाग्र रहना और गहरी सांस लेना हमें सेहत के लक्ष्य के करीब ले जाता है।

  • एरोबिक फिटनेस: एक्‍सरसाइज करते समय जब आप तेजी से और गहरी सांस लेते हैं तो हार्ट तेजी से पंप करने लगता है। इससे मसल्‍स में ब्‍लड सर्कुलेशन तेज होता है। एरोबिक फिटनेस जितनी अच्छी होगी, हार्ट, फेफड़े और खून की नसें पूरे शरीर में ऑक्सीजन को उतनी ही कुशलता से पहुंचाएंगी। इसके लिए आप ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइकिलिंग, स्विमिंग, डांसिंग जैसे काम कर सकते हैं।
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: हड्डियों की ताकत और मसल्‍स की फिटनेस बढ़ाने में मस्कुलर फिटनेस मदद करती है। इसे हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर करना चाहिए। ये एक्‍सरसाइज वजन नियंत्रित रखने और शरीर में लचीलापन बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। इसमें पुशअप, पुलअप, सिटअप और लेग स्क्वाट्स आदि कर सकते हैं।
  • कोर एक्सरसाइज: फिटनेस प्लान का यह जरूरी हिस्सा होता है, इसमें पेट की मसल्‍स, गर्दन, पीठ और शरीर के निचले हिस्से को मजबूती मिलती है। इसमें प्‍लैंक, सिट-अप्स और फिटनेस बॉल एक्सरसाइज जैसे वर्कआउट किए जा सकते हैं।
  • फ्लेक्सिबिलिटी और स्ट्रेचिंग: जोड़ों को एक्टिव रखने और शरीर को संतुलित रखने के लिए यह जरूरी है। स्ट्रेच को कम से कम 30 सेकेंड तक रोकने का प्रयास करना चाहिए। अगर वर्कआउट से पहले स्ट्रेच करना चाहते हैं, तो पहले वार्म-अप जरूरी है। स्ट्रेचिंग से पहले पांच से 10 मिनट तक टहलना या एक्‍सरसाइज करना जरूरी है। इसके लिए योग सबसे बेहतर उपाय है।

सिर्फ टहलना पर्याप्त नहीं होता, अगर चल रहे हैं तो तीन से चार किलोमीटर तेज चलें। कोई भी एक्‍सरसाइज करने से पहले अपनी सेहत, हार्ट की स्थिति को भी जानना आवश्यक है। अगर सांस फूल रही है या कोई अन्य समस्या है तो डाक्टर से परामर्श जरूर करना चाहिए। जिम जाना ही अनिवार्य नहीं है, अगर आप ब्रिस्क वॉक करें, तो वह भी सेहतमंद रहने के लिए पर्याप्त है। आप साइकिलिंग, तैराकी, रनिंग कुछ भी कर सकते हैं। भोजन करने के बाद टहलने की आदत नहीं होती। टहलने के लिए दौरान ध्यान रखें कि चलने की गति और दूरी दोनों का ध्यान रखना होता है। 30 से 35 मिनट तीन से चार किलोमीटर चलें तो यह सात में से पांच दिन चलें तो वह भी पर्याप्त होता है।

2. सेहत के लिए हो संतुलित भोजन

शुगर और हानिकारक वसा की अधिकता वाले प्रोसेस्ड फूड्स पर निर्भरता बड़ी आबादी को अब बीमार बना रही है। इस तरह के भोजन मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हार्ट बीमारियों का कारण बन रहे हैं। सही जीवनशैली अपनाकर टाइप-2 डायबिटीज की आशंका को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। आज के समय में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। इसी तरह ज्‍यादा कैलोरी, न्यूनतम पोषक वाले आहार मेटाबॉलिक डिसआर्डर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और लंबी अवधि की बीमारी का कारण बन रहे हैं। घर में बने भोजन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और हमेशा बेहतर विकल्प माने जाते हैं। आइसीएमआर ने आहार आदतों में सुधार के लिए व्यापक गाइडलाइन जारी की है। सही खानपान के लिए इन बातों पर फोकस बढ़ाया जा सकता है-

  • भोजन में नमक की मात्रा को सीमित करना चाहिए।
  • तेल और फैट के प्रयोग को कम करके नट्स, सीड्स और सीफूड्स से हेल्‍दी फैट प्राप्त करना चाहिए।
  • शुगर और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड कम करने की जरूरत है।
  • डिब्बाबंद फूड्स लेते समय इसके लेबल पर दर्ज जानकारियों को जांचना चाहिए।
  • भोजन में 45 प्रतिशत कैलोरी अनाज और मिलेट्स से, 15 प्रतिशत दालों, फलियों, दूध और फलों से प्राप्त करनी चाहिए।

3. नींद है बहुत जरूरी

आज के समय में नींद सबसे जरूरी हो गई है। अगर आप छह से आठ घंटे की नींद लेते हैं, तो दिमाग की सक्रियता बनी रहती है। इससे डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। हार्ट, लिवर जैसी अनेक समस्याओं के पीछे आज खराब नींद भी एक बड़ा कारण बन रही है। आज के समय में तनाव, बीमारी और जिम्मेदारी का बढ़ता बोझ नींद में व्यवधान डाल रहे हैं। नींद को प्रभावित करने वाले कई सारे कारणों पर आपका जोर नहीं होता, लेकिन आदतों में थोड़ा सा सुधार करें तो नींद की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं

  • सोने-जागने का तय करें समय: सात से आठ घंटे की अच्छी नींद के लिए सोने और जागने का एक समय तय करना जरूरी है। समय तय होने से शरीर के सोने-जागने चक्र व्यवस्थित हो जाता है। अगर बिस्तर पर जाने के बाद 20 मिनट के अंदर नींद नहीं आती, तो दिमाग को शांत करने वाले कार्य करना चाहिए।
  • खाने-पीने पर करें गौर: रात में सोने से कुछ घंटे पहले ही भोजन कर लेना जरूरी होता है। इसी तरह निकोटीन, कैफीन और अल्कोहल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
  • स्लीप हाइजीन: सोने के कमरे को शांत, अंधेरा और ठंडा रखना चाहिए। कृत्रिम रोशनी में लगातार रहने से नींद में व्यवधान आता है। इसी तरह रात में सोने से घंटे भर पहले स्मार्टफोन, टीवी और अन्य गैजेट्स से दूरी बना लेनी चाहिए।
  • शारीरिक सक्रियता: दिन के समय में शारीरिक तौर पर सक्रिय रहने, एक्‍सरसाइज करने से रात की नींद बेहतर होती है। दिन में सोने से बचना चाहिए।

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जरूरी फैक्ट्स

दुनियाभर में शारीरिक निष्क्रियता 2024 में WHO के अनुसार, करीब 1.8 अरब वयस्क पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे थे।
भारत में शारीरिक निष्क्रियता करीब 50% भारतीय वयस्क पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करते।
एक्सरसाइज और असामयिक मृत्यु रोज 10 मिनट मध्यम से तीव्र एक्सरसाइज से असामयिक मृत्यु का खतरा 15% तक कम हो सकता है।
अस्वस्थकर भोजन और बीमारियों का बोझ ICMR के अनुसार, 56.4% बीमारियों का बोझ अस्वस्थकर भोजन से जुड़ा है।
अनाज 180-360 ग्राम प्रतिदिन
फल और सब्जियां 400–600 ग्राम प्रतिदिन
दालें 85 ग्राम प्रतिदिन
पोल्ट्री, अंडे और सीफूड दालों के विकल्प के रूप में लगभग 30 ग्राम 
डेयरी प्रोडक्‍ट्स  300 मिलीलीटर प्रतिदिन

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Image Credit: magnific.com

लेखक- ब्रह्मानंद मिश्र