डिजिटल भुगतान की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले यूपीआई को लेकर हाल ही में एक नया मोड़ सामने आया है। अब तक ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए पूरी तरह मुफ्त रहने वाले यूपीआई के फीस स्ट्रक्चर में बदलाव की तैयारी है। 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि इसका बोझ आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि UPI और कैश में से कौन सा ज्यादा सही है? इसके लिए हमने आरएसएम के अकाउंटेट चार्टर्ड हिमांशु गोयल से भी बात की है। जानते हैं आगे...

यूपीआई के फायदे और लिमिट

खरीदारी के लिए यूपीआई और कैश में से कोई भी एक माध्यम पूरी तरह से श्रेष्ठ नहीं है। रोज की सुविधा और खर्चों का हिसाब रखने के लिए जहां यूपीआई सबसे बेस्ट है, वहीं बजट नियंत्रण और मुश्किल परिस्थितियों के लिए नकद पैसा सबसे बेहतर माना जाता है।

सही माध्यम का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या खरीद रहे हैं और अपने बजट का प्रबंधन कैसे करते हैं।

  • बेहतर सुविधा: पर्स साथ रखे बिना केवल स्मार्टफोन से क्यूआर कोड स्कैन करके तुरंत भुगतान किया जा सकता है।
  • कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं: आम उपभोक्ताओं के लिए पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर और सामान्य खरीदारी पूरी तरह से मुफ्त है।
  • डिजिटल रिकॉर्ड: हर छोटे-बड़े खर्च का डिजिटल रिकॉर्ड बन जाता है, जिससे महीने के अंत में अपने खर्चों की समीक्षा करना बेहद आसान होता है।
  • ज्यादा खर्च की परेशान: ऑनलाइन भुगतान इतनी तेजी से होता है कि जेब से नकद पैसे निकलने का एहसास नहीं होता, जिससे अनचाही खरीदारी का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा, इसके लिए सक्रिय इंटरनेट और चार्ज्ड फोन की जरूरत होती है।

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कैश के फायदे और लिमिट

जेब से नकद निकलते समय इंसान ज्यादा सचेत रहता है। यह मानसिक दबाव आपको बेवजह की फिजूलखर्ची से रोकता है।

  • हर स्थिति में भरोसेमंद: सर्वर डाउन होने, इंटरनेट बंद होने, बिजली जाने या फोन की बैटरी खत्म होने पर भी कैश हर जगह स्वीकार्य है।
  • सिक्योर: कैश भुगतान का कोई डिजिटल निशान नहीं छूटता, जिससे सेफ्टी बनी रहती है।
  • रखरखाव में परेशानी: नकद पैसे चोरी होने या खोने का डर रहता है और हर छोटे-बड़े खर्च का हिसाब मैन्युअल डायरी में लिखना पड़ता है।

बचत की सबसे बेहतरीन योजना

किराना सामान, घर के बिल और रोजमर्रा के यातायात खर्चों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करें, ताकि हिसाब रखना आसान रहे। इससे अलग जिन चीजों में आप जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं, उनके लिए महीने की शुरुआत में तय नकद राशि अलग रख लें। इसके साथ ही, किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जेब में थोड़ा नकद बैकअप जरूर रखें।

निष्कर्ष

भारत पूरी तरह से 'कैशलेस' अर्थव्यवस्था बनने के बजाय 'कैश-लाइट' अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। यूपीआई ने आम जीवन में छोटे-मोटे खर्चों के लिए नकद की जगह ले ली है, लेकिन नकद की अपनी एक अलग सुरक्षा बनी हुई है।

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Images: magnific