शादी के बाद जब दो लोग साथ मिलकर अपने जीवन का सुख-दुख साझा करने का संकल्प लेते हैं, तो सुरक्षित भविष्य के लिए उन्हें शुरुआत से ही वित्तीय मामलों के प्रबंधन में सावधानी बरतनी चाहिए। विवाह के बाद आपके सामने कई ऐसी नई जिम्मेदारियां आ जाती हैं, जिनका साथ मिलकर निर्वाह करना जरूरी हो जाता है। इसलिए आप दोनों को वित्तीय प्रबंधन, खर्चों की साझेदारी और निवेश संबंधी योजनाओं पर आपसी सहमति से काम करना चाहिए। शुरुआत से ही सही फाइनेंशियल प्लानिंग करना खुशहाल कपल के लिए बेहद जरूरी है।

ट्रांसपेरेंसी है जरूरी

कुछ दंपती वित्तीय मामलों में पारदर्शिता (Transparency) नहीं बरतते या इस मुद्दे पर बातचीत करते हुए उन्हें संकोच होता है। ये दोनों ही स्थितियां न केवल वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से, बल्कि आपके रिश्ते के लिए भी नुकसानदेह हो सकती हैं। इसलिए शादी के पहले अगर आपने कहीं कोई बचत या निवेश किया हो, पहले से किसी लोन की देनदारियां बकाया हों या आपके पास एक से अधिक क्रेडिट कार्ड हों, तो उसके बारे में अपने पार्टनर को जरूर बताएं।

हॉलिडे प्लानिंग, बिजनेस प्लानिंग, फैमिली प्लानिंग, भविष्य में बच्चे के जन्म और प्ले स्कूल के खर्च, कार-मकान की खरीदारी और रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे सभी मसलों पर एक-दूसरे से खुलकर बात करें। आकलन करें कि कैसे बीच का रास्ता निकालते हुए आप आपसी सहमति से एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं, जो आप दोनों को संतुष्ट करे।

बनाएं पारिवारिक बजट

अपने परिवार के लिए बजट बनाने में आप दोनों को साथ मिलकर काम करना चाहिए। कोशिश यही होनी चाहिए कि आपके परिवार के निर्धारित घरेलू खर्चों में आपकी कुल आमदनी का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खर्च न हो।

शादी के बाद आपको एक ज्वाइंट बैंक अकाउंट (Joint Bank Account) जरूर खोलना चाहिए, जिसमें आप दोनों पैसे जमा कर सकें और इससे परिवार से संबंधित संयुक्त जरूरतों के भुगतान कर सकें जैसे घर के लिए राशन लाना, यूटिलिटी बिल चुकाना, घरेलू सहायकों को वेतन देना आदि। आप इस बात का पूरा हिसाब-किताब रखें कि प्रतिमाह आप दोनों का कितना खर्च हो रहा है और कितनी बचत हो रही है।

जिम्मेदारियों का बंटवारा

अब सवाल यह उठता है कि शादी के बाद पति-पत्नी को अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों का निपटारा कैसे करना चाहिए? इसके लिए सबसे पहले आप दोनों शादी से पहले किए गए निवेश और कर्ज का हिसाब लगाएं। फिर शादी के बाद होने वाली आय, खर्च, निवेश, बचत और बीमा की किस्तों की राशि को भी जोड़कर देखें।

फिर यह तय करें कि आप किस तरह अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों का निबटारा करेंगे? जहां पति-पत्नी दोनों जॉब कर रहे हों, तो ऐसे में जिसकी आय ज्य़ादा हो बिजली का बिल, किसी महंगी शॉपिंग की पेमेंट, कहीं घूमने जाने पर होने यात्रा आदि का खर्च उसे ही उठाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर जिसकी आमदनी सीमित हो, उसे किचन से संबंधित खर्च वहन करना चाहिए। जहां पत्नी होममेकर हो वहां पारंपरिक तरीका आदर्श साबित होता है कि पति घर का खर्च चलाने के लिए प्रतिमाह नियमित रूप से पत्नी को एक निश्चित राशि दे, ऐसे में किफायत से खर्च करना पत्नी की जिम्मेदारी होती है, ताकि वह उसी राशि में से कुछ हिस्सा आकस्मिक स्थितियों के लिए बचा कर रखे। कोरोना-काल में यही तरीका उनके लिए बहुत उपयोगी साबित हुआ, जो लोग बेरोजगार हो गए थे।

जरूर बनाएं इमरजेंसी फंड

जीवन में कभी भी पैसों की जरूरत पड़ सकती है। यह इमरजेंसी नौकरी जाने या किसी गंभीर बीमारी से जुड़ी हो सकती है। ऐसी ही जरूरतों के लिए एक इमरजेंसी फंड अवश्य बनाएं। थोड़ा-थोड़ा करके आप अपने इस फंड में छह महीने के वेतन जितना पैसे जमा कर लें। हर महीने उसमें कुछ रकम जमा करते रहें, ताकि किसी गंभीर बीमारी या जॉब छूट जाने की स्थिति में आप अपने परिवार का खर्च चला सकें।

जरूरी है इंश्योरेंस पॉलिसी

सेहत के मोर्चे पर पुख्ता व्यवस्था सबसे जरूरी है। इसलिए सबसे पहले आप दोनों एक हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लें। बीमा कंपनियां पूरे परिवार के लिए 'फैमिली फ्लोटर प्लान' भी देती हैं, जो तुलनात्मक रूप से काफी सस्ता पड़ता है।

बीमा के लिए लॉन्ग टर्म प्लान लेना ही सबसे सही रहता है। विवाह होते ही अगर आप 1 करोड़ रुपये तक का टर्म इंश्योरेंस प्लान लेते हैं, तो चूंकि इस उम्र में आप युवा हैं, इसलिए आपको बहुत कम प्रीमियम चुकाना पड़ेगा। ध्यान रहे कि बीमा पति और पत्नी दोनों के लिए जरूरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि व्यक्ति को अपनी वार्षिक आय का 10 से 15 गुना हिस्सा लाइफ इंश्योरेंस कवर के रूप में रखना चाहिए। अगर ऐसा संभव न हो, तो भी कम प्रीमियम वाली ही सही, लेकिन एक बीमा पॉलिसी जरूर खरीदें।

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लॉन्ग टर्म निवेश है फायदेमंद

अगर आप बड़ा मकान या गाड़ी लेने, या भविष्य में कोई नया बिजनेस शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, तो इसके लिए यह जरूरी है कि आप शुरू से ही निवेश करें। आप जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगी उतना ही बेहतर होगा, क्योंकि कंपाउंडिंग की मदद से आपका फंड समय के साथ तेजी से बढ़ता जाएगा। आइए जानते हैं निवेश के कुछ बेहतरीन विकल्प-

मकान या फ्लैट : अगर आपने शादी के तत्काल बाद ही मकान लेने का मन बना लिया है तो यह बहुत अच्छी बात है। आप जितनी जल्दी मकान लेंगे, वह आपके लिए उतना ही सस्ता पड़ेगा। इतना ही नहीं,आपको बहुत जल्दी होम लोन से छुटकारा भी मिल जाएगा। बस, आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि पत्नी को पति के साथ मिलकर होम लोन के लिए आवेदन करना चाहिए क्योंकि इससे पति-पत्नी दोनों को आयकर में मिलने वाली छूट से फायदा मिलेगा। इतना ही नहीं, अधिकतर बैंक महिलाओं को लोन देते हैं। इसलिए स्त्रियों को खुद प्राइमरी अप्लीकेंट बनना चाहिए और अपने पति को को-अप्लीकेंट बनाना चाहिए।

म्यूचुअल फंड : म्यूचुअल फंड्स लॉन्ग टर्म के लिए निवेश के बहुत अच्छे साधन माने जाते हैं। इसलिए आप दोनों को म्यूचुअल फंड्स में निवेश ज़रूर करना चाहिए। अगर आपने किसी टैक्स सेवर फंड में निवेश किया है, तो इससे आपकी टैक्स में भी बचत होगी। जब आप मिडिलएज में पहुंचेंगे तब तक आपके आप पास निवेश के हिसाब से पर्याप्त धनराशि जमा हो जाएगी।

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड : पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ भी लॉन्ग टर्म के लिहाज़ से निवेश का बहुत अच्छा साधन है क्योंकि इसमें बेहतर रिटर्न मिलता है और इस रिटर्न की गारंटी भी होती है, क्योंकि यह सरकारी योजना है। इसमें आप साल भर में 1.5 लाख रुपये जमा कर सकते हैं और इसमें 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है।

नेशनल पेंशन स्कीम : नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस)भी एक और लॉन्ग टर्म का ऑप्शन है जिसमें आप निवेश शुरू कर सकते हैं। भारत सरकार की इस योजना में अगर आपने शुरू में ही अच्छा निवेश करना शुरू कर दिया है, तो रिटायरमेंट के बाद आपका जीवन सुखमय हो सकता है। इससे हर साल टैक्स की बचत भी होगी।अगर आप शुरू से ही वित्तीय मामलों में सजग रहेंगे तो आपका भविष्य उज्ज्वल होगा।

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कुछ जरूरी सुझाव

  • अपना मैरिज सर्टिफिकेट जरूर बनवा लें, क्योंकि निवेश संबंधी कार्यों में हमेशा इसकी जरूरत पड़ती है।
  • अपने सभी सारी चल-अचल संपत्ति और वित्तीय जिम्मेदारियों की स्पष्ट सूची बनाएं।
  • एक ज्वाइंट बैंक अकाउंट जरूर खोलें।
  • अपने डेबिट कार्ड का पिन नंबर, नेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य अति आवश्यक गोपनीय जानकारियों को कागज पर नोट करके एक फाइल में सुरक्षित रखें। आपके जीवनसाथी को भी उसकी जानकारी अवश्य होनी चाहिए।
  • अपने बैंक अकाउंट, लोन और किसी भी निवेश में नॉमिनी के रूप में अपने जीवनसाथी का नाम जरूर दें।

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