हमारे यहां भारत में पूजा-पाठ, त्योहार और शादी-ब्याह जैसे मौकों पर माथे महिलाएं कुमकुम जरूर लगाती हैं। कुमकुम लगाने की परंपरा काफी पुरानी है। मंदिरों में पूजा करते समय कुमकुम लगाया जाता है और कई जगह इसे प्रसाद या आशीर्वाद के तौर पर भी माथे पर लगाया जाता है। जिस तरह गहने और ट्रेडिशनल कपड़े हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं, उसी तरह कुमकुम का टीका भी भारतीय लुक का हिस्सा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर माथे पर ही कुमकुम क्यों लगाया जाता है और इसके लाल रंग का क्या मतलब है?
दरअसल, कुमकुम को लेकर कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। हालांकि, हर कम्युनिटी में इसका मतलब एक जैसा नहीं है। इसके पीछे कुमकुम बनाने का एक दिलचस्प तरीका भी है। आज हम आपको अपने इस लेख में बता रहे हैं कि भारतीय परंपरा में कुमकुम का टीका इतना खास क्यों माना जाता है?
कुमकुम कैसे बनता है?
सबसे पहले तो यह जान लेते हैं कि कुमकुम बनाया कैसे जाता है? ताे आपको बता दें कि कुमकुम बनाने के लिए हल्दी पाउडर और बुझे हुए चूने का इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जिसका नेचुरल कलर पीला होता है। ऐसे में हल्दी और चूने के बीच जाे केमिकल रिएक्शन होता है उसकी वजह से इसका रंग लाल हो जाता है। बुझे हुए चूने का मतलब ये है कि जब सूखे चूने में पानी डाला जाता है, तो उसमें से बहुत गर्मी और धुएं के साथ एक केमिकल रिएक्शन होती है। ठंडा होने के बाद जो सफेद पेस्ट या पाउडर बनता है, वही बुझा हुआ चूना होता है।
माथे पर कुमकुम लगाने की क्या वजह है?
हमारे भारतीय परंपराओं में माथे को काफी खास जगह कहा जाता है। आमतौर पर भौंहों के बीच या माथे के बीच में ही कुमकुम लगाया जाता है। हालांकि अलग-अलग जगहों और रीति-रिवाजों के हिसाब से इसे लगाने का तरीका बदला हुआ भी नजर आ सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि आज जिस कुमकुम को सिर्फ महिलाएं लगाती हैं, पुराने समय में पुरुष इसे लगाते थे। खासकर पुजारी और जाे लोग धार्मिक साधना करते थे, वो इसे जरूर लगाते थे। बाद में महिलाओं में इसका इस्तेमाल बढ़ गया और यह धार्मिक कामों के साथ-साथ हमारे कल्चर का हिस्सा बन गया।
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भौंहों के बीच कुमकुम लगाने का क्या है थर्ड आई से कनेक्शन?
आपने अपने घरों में दादी नानी से यह बात जरूर सुनी होगी कि जिस कुमकुम को हम भौंहों के बीच लगाते हैं, इसका संबंध थर्ड आई यानी तीसरी आंख से है। योग परंपराओं में इसे आज्ञा चक्र कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि ये अंदर की समझ, ध्यान और जागरूकता से जुड़ी है। इसी वजह से कुछ लोग मानते हैं कि माथे के इस हिस्से पर टीका लगाने से मन शांत रहता है। हालांकि, इसे आपको समझना होगा कि थर्ड आई और कुमकुम के बीच का यह कनेक्शन सिर्फ एक मान्यता है।
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कुमकुम का लाल रंग क्यों है खास?
ये तो हम सभी जानते हैं कि हमारे यहां भारतीय रस्मों और त्योहारों में लाल रंग का इस्तेमाल जरूर होता है। इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि शादी-ब्याह और दूसरे मौकों पर लाल रंग के कपड़े और बाकी चीजें खूब देखने को मिलती हैं। कुमकुम का रेड कलर भी इन्हीं मान्यताओं से जुड़ा है।
पूजा और त्योहारों में क्यों लगाया जाता है कुमकुम?
हम अगर पूजा करते हैं या घर में कोई धार्मिक रस्में होती हैं तो कुमकुम का इस्तेमाल जरूर होता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे माथे पर लगाने के अलावा मंदिरों में भी पूजा के दौरान इस्तेमाल किया जाता है।
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कुमकुम से जुड़ी खास बातें
भारतीय परंपरा और धर्म में कुमकुम को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। ये हैं इससे जुड़ी जरूरी बातें-
- कुमकुम का इस्तेमाल पूजा, त्योहार और शादी जैसे मौकों पर किया जाता है।
- इसे माथे के बीच या भौंहों के बीच लगाया जाता है।
- हल्दी और बुझा हुआ चूना ही इसे बनाने में इस्तेमाल होता है।
- हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और बुझे हुए चूने के केमिकल रिएक्शन से इसका रंग पीले से लाल हो जाता है।
- पुराने समय में पुरुषों, खासकर पुजारियों और धार्मिक साधना से जुड़े लोग इसे लगाते थे।
- बाद में महिलाओं ने इसे लगाना शुरू किया।
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Image Credit- Freepik/AI
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