हरी, लाल, सुनहरी या रंग-बिरंगी कांच की चूड़ियां देखते ही सबसे पहले यूपी के फिरोजाबाद शहर का नाम याद आता है। इसी वजह से इस शहर को सुहाग नगरी भी कहा जाता है। सावन, तीज, रक्षाबंधन, करवा चौथ और शादी-ब्याह के सीजन में यहां बनने वाली चूड़ियों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। देश के लगभग हर हिस्से में फिरोजाबाद की चूड़ियां पहुंचती हैं और बड़ी मात्रा में विदेशों में भी भेजी जाती हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी नाजुक और खूबसूरत कांच की चूड़ियां आखिर बनती कैसे हैं? इन्हें तैयार करने के लिए सिर्फ कांच ही नहीं, बल्कि कई दूसरे केम‍िकल्‍स का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद करीब 1300 डिग्री सेल्सियस तक गर्म भट्टियों में इन्हें पिघलाया जाता है। इस पूरे प्रॉसेस में कारीगरों की मेहनत और हाथों की सफाई सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। आइए जानते हैं कि फिरोजाबाद की मशहूर कांच की चूड़ियां कैसे तैयार होती हैं और आखिर इन्हें इतना खास क्यों माना जाता है।

फिरोजाबाद को क्यों कहा जाता है सुहाग नगरी?

आपको बता दें क‍ि फिरोजाबाद दशकों से भारत में कांच की चूड़ियों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां हजारों परिवार सदियों से इसी काम में लगे हुए हैं। चूड़ी बनाना यहां सिर्फ ब‍िजनेस ही नहीं बल्कि एक पारंपरिक कला है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आती रही है। आज भी यहां हाथ से बनने वाली चूड़ियों के साथ-साथ नए फैशन के हिसाब से अलग-अलग डिजाइन भी तैयार किए जाते हैं।

चूड़ियां बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?

कई लोगाें को लगता है क‍ि चूड़ियां सिर्फ कांच से बनती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। इन्हें तैयार करने के लिए सबसे पहले कई चीजों का म‍िक्‍सचर बनाया जाता है। इसमें ये शामिल होते हैं-

  • सिलिका सैंड (रेत)- कांच बनाने की सबसे मुख्य सामग्री यही है। इसके बिना कांच बनना मुमकिन नहीं है।
  • सोडा ऐश
  • कैल्साइट
  • जरूरत के ह‍िसाब से अलग-अलग कलर देने वाले केम‍िकल

इन्हीं सभी चीजों को मिलाकर कांच तैयार किया जाता है।

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1300 डिग्री की भट्टी में शुरू होता है असली काम

अब ये म‍िक्‍सचर तैयार करने के बाद मेन काम शुरू होता है। इन चीजों को बड़ी भट्टियों में डाला जाता है। इसके बाद इन्हें लगभग 1300 डिग्री सेल्सियस टेंपरेचर पर करीब 12 घंटे तक पिघलाया जाता है। जब ये मिश्रण पूरी तरह से प‍िघल पर ल‍िक्‍व‍िड कांच में बदल जाता है, तब असली काम शुरू होती है।

ऐसे बनती है गोल कांच की चूड़ी

रि‍पोर्ट्स के मुताब‍िक, भट्टी से पिघला हुआ कांच लोहे की लंबी रॉड की मदद से बाहर निकाला जाता है। इसके बाद जो लोग वहां काम करते हैं, वो उसे खास तरीके से शेप देते हैं। बता दें क‍ि ये काम एक बार में पूरा भी नहीं होता है। कांच की लेयर को कई बार चढ़ाया जाता है ताकि उसकी मोटाई सही बनी रहे।

फिर इसे बेलन जैसी मशीन पर चलाकर लंबी और बराबर मोटाई वाली कांच की डोर बनाई जाती है। इसके बाद इसी डोर को गोल शेप देकर लच्छा तैयार किया जाता है। आगे चलकर यही लच्छा अलग-अलग साइज की चूड़ियों में बदल जाता है।

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अब आती है रंग और डिजाइन की बारी

जब चूड़ियों का शेप तैयार हो जाता है, तब उन्हें ठंडा किया जाता है ताकि वो एकदम मजबूत बन सकें। इसके बाद उन पर अलग-अलग तरह का काम किया जाता है, जैसे-

  • कलर चढ़ाना
  • पॉलिश करना
  • ग्लिटर या स्टोन लगाना
  • कुंदन डिजाइन बनाना
  • अलग-अलग पैटर्न तैयार करना

इसी वजह से आज बाजार में सिंपल कांच की चूड़ियों से लेकर डिजाइनर चूड़ियों तक के कई ऑप्‍शन मिल जाते हैं।

मौसम के हिसाब से बदल जाते हैं रंग

फिरोजाबाद में चूड़ियां पूरे साल बनती हैं, लेकिन उनके रंग और डिजाइन मौसम और त्योहारों के हिसाब से बदलते रहते हैं।

  • सावन में हरे रंग की चूड़ियों की सबसे ज्यादा मांग रहती है।
  • तीज और हरियाली तीज पर भी ग्रीन चूड़ियां खूब बिकती हैं।
  • शादी के सीजन में लाल, मैरून और गोल्‍डन रंग की चूड़ियां ज्यादा बनाई जाती हैं।
  • करवा चौथ के समय भी लाल रंग की चूड़‍ियां ज्‍यादा बनाई जाती हैं।

अब तो आप जान ही गईं होंगी क‍ि कांच की चूड़‍ियों को कैसे बनाया जाता है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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