कभी आफिस में अचानक सिरदर्द हुआ या किसी छोटी-सी जरूरत की चीज चाहिए हुई तो सबसे पहले नजर सहकर्मियों पर जाती है। फिर तुरंत किसी ऐसे व्यक्ति का नाम याद आता है, जिसके पास वह चीज मिल सकती है। किसी के पास सिरदर्द की दवा होती है, किसी के पास सैनिटरी पैड तो किसी के पास हेयर टाई या ईयरफोन। इस तरह की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अब कुछ युवतियां अपने आफिस बैग में ही एक छोटा सा पाउच रखने लगी हैं, जिसमें उनकी रोजमर्रा की जरूरी और कम्फर्ट देने वाली चीजें होती हैं।
इंटरनेट मीडिया पर ऐसे पाउच को ‘एंग्जाइटी बैग’, ‘पैनिक पाउच’ या ‘कंंफर्ट किट’ जैसे नाम दिए जा रहे हैं। इसमें लिप बाम, सैनिटरी पैड, ईयरफोन, हैंड सैनिटाइजर, छोटा पोर्टेबल फैन, हेयर टाई, जरूरी दवाइयां या हल्का स्नैक जैसी चीजें रखी जा सकती हैं। इसका मकसद किसी बीमारी या एंग्जाइटी का इलाज करना नहीं, बल्कि जरूरत के समय जरूरी चीज अपने पास उपलब्ध रखना है। खासकर कामकाजी युवतियों के लिए यह छोटी-सी तैयारी रोजमर्रा की असुविधा को कम करने में मदद कर सकती है।
कैसी होती है यह कंंफर्ट किट?
इस किट का कोई तय आकार या सामान नहीं होता। हर व्यक्ति अपनी जरूरत और दिनचर्या के अनुसार इसे तैयार कर सकता है। किसी के लिए पीरियड्स से जुड़ी चीजें जरूरी हो सकती हैं तो किसी के लिए लिप बाम, ईयरफोन या छोटा फैन। जिन दवाइयों की जरूरत पड़ती है, उन्हें भी रखा जा सकता है, लेकिन दवाइयां वही होनी चाहिए, जो व्यक्ति को पहले से चिकित्सक ने लेने की सलाह दी हो। इसे अपने पास रखने का फायदा यही है कि छोटी जरूरत के लिए बार-बार किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। हालांकि, घबराहट या लगातार तनाव की समस्या होने पर केवल ऐसी किट पर निर्भर रहना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
आफिस बैग में क्या हैं दूसरी जरूरी चीजें
कंंफर्ट किट के अलावा आफिस बैग में काम से जुड़ी कई जरूरी चीजें भी रहती हैं। लैपटाप, चार्जर, नोटबुक, पानी की बोतल और छाता जैसी चीजों के लिए टोट बैग सुविधाजनक हो सकता है। छोटे सामान को अलग पाउच में रखने से बैग व्यवस्थित रहता है।
लाइफ कोच और कारपोरेट ट्रेनर अंचल शाह जौरा बताती हैं कि आज की युवतियां अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर ज्यादा सजग हैं। जरूरी चीजें अपने पास रखना उन्हें छोटी असुविधाओं के लिए दूसरों पर निर्भर होने से बचाता है। कंंफर्ट किट भी इसी सोच का हिस्सा हो सकती है। इसमें वही चीजें रखनी चाहिए जिनकी वास्तव में जरूरत पड़ती है और जो व्यक्ति के लिए सुरक्षित हों। इसे एंग्जाइटी का इलाज समझना सही नहीं होगा।
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लेखक- सुमन अग्रवाल
Image Credit- shutterstock
