किसी के घर पर मेहमान बनकर जाना, केवल मिलने जाना नहीं होता, बल्कि उनके निजी संसार और जिंदगी में प्रवेश करना होता है। आज की पीढ़ी में सामाजिक मेलजोल बढ़ाने के मामले में कई बार कुछ गलतियां कर जाती हैं, जिसका उन्हें अंदाजा नहीं होता। अगर आप अतिथि बनकर किसी के घर जा रहे हैं तो किन शिष्टाचार का पालन करना चाहिए आइए लाइफ स्किल ट्रेनर से जानते हैं...

क्या आप भी मेहमान के रूप में कर जाते हैं ऐसी गलतियां?

पहले शिष्टाचार की बातें बहुत ही सामान्य हुआ करती थी, इन्हें सीखने की कोई आवश्यकता नहीं होती थी, लेकिन समय बदलने के साथ-साथ नई पीढ़ी को ये सब सिखाने की जरूरत होने लगती है, क्योंकि कई बार वे अतिथि के रूप में मेजबान को कुछ ऐसे शब्द बोल जाते हैं जो उन्हें नहीं कहने चाहिए। ऐसे में शिष्टाचार से जुड़ी कौन सी बातें याद रखनी चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए, ये जानना बहुत महत्वपूर्ण है। दरअसल, ये बारीक बातें ही हमारे व्यक्तित्व और परवरिश को दर्शाती हैं। इसलिए समय पर इनका ध्यान रखना जरूरी है।

दूसरे के समय का सम्मान करना

अतिथि बनकर आपका सबसे पहला कर्तव्य है कि दूसरों के समय का सम्मान करना। आप जिनके घर जा रहे हैं, उनकी सुविधा अनुसार जाएं। बगैर जानकारी दिए किसी के घर जाना उचित नहीं माना जाता है। यही नहीं, आपको एक और बात का ध्यान रखना होता है कि किसी के घर पर तय समय से ज्यादा नहीं रुकना चाहिए।

निजी मामलों पर टिप्पणी करना

कई लोगों की आदत होती है कि वे दूसरों के निजी मामलों में टिप्पणी करते हैं। जब तक आपसे कुछ पूछा न जाए, तब तक कोई राय देना उचित नहीं होता।

वीडियो या तस्वीरें लेना

कई बार ऐसा होता है कि आपको किसी के घर की कोई चीज या वस्तु अच्छी लगी और आपने बगैर उनकी अनुमति के उसकी फोटो या वीडियो ले ली। यह भी बिल्कुल गलत तरीका माना जाता है, ऐसा करना शिष्टाचार के खिलाफ है।

अपने घर से तुलना करना

कई मेजबान की आदत होती है कि वे दूसरे के घरों की व्यवस्था, खान-पान और लाइफस्टाइल की तुलना अपने घर से करने लगते हैं। कभी भी बतौर मेहमान ऐसा नहीं करनी चाहिए, इससे सामने वाला व्यक्ति अपमानित महसूस कर सकता है।

जब तक कोई खाने के लिए न पूछे तब तक अपने मन से कुछ भी खाना नहीं चाहिए। इसके अलावा, ज्यादा बोलना भी ठीक नहीं लगता।

लाइफ स्किल ट्रेनर आंचल शाह जौरा बताती हैं कि शिष्टाचार का अर्थ केवल नियमों की लंबी सूची को याद रखना नहीं है। उनके प्रति सजग रहकर, सही समय पर उनका पालना करना है। हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि हमारे किसी भी तरीके या व्यवहार से कोई बुरा न माने। हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारे व्यवहार से कोई दुखित न हो। ये सारी चीजें काफी हद तक हमारी परवरिश पर निर्भर करती है, जिसमें हमें केवल यह नहीं सिखाया जाता कि अपने जीवन को कैसा बनाएं बल्कि किसी और के साथ कैसा व्यवहार रखें, कहां बोलना है, क्या बोलना है, कितना बोलना है, कब रुकना है, क्या पूछना है, कहां चुप रहना है आदि चीजें सिखाई जाती हैं। हमें हमेशा दूसरों की सीमाओं का सम्मान करना चाहिए।

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

लेखक- सुमन अग्रवाल