शिशु के पोषण के लिए ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान) को लंबे समय से सबसे अच्छा माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में इन्फेंट फॉर्मूला (फॉर्मूला मिल्क) में भी काफी सुधार हुआ है। जब ब्रेस्टफीडिंग संभव या पर्याप्त न हो, तो यह एक पोषण के लिहाज से एक संतुलित विकल्प के तौर पर काम करता है। इसे सुरक्षित भी माना जाता है।
ब्रेस्ट मिल्क और फॉर्मूला में क्या बेहतर है, इसका कोई सटीक जवाब नहीं हो सकता है, क्योंकि यह मेडिकल कंडीशन और कई पर्सनल कारणों पर भी निर्भर करता है। ऐसे में इसमें से किसी एक को 'अच्छा' या 'बुरा' मानने के बजाय आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि बच्चे को सही पोषण मिले, उसका विकास ठीक से हो और वह स्वस्थ रहे। अगर किसी कारण से आप बच्चे को 'फॉर्मूला मिल्क' दे रही हैं, तो इसके लिए आपको गिल्ट या परेशान होने की जरूरत नहीं है। चलिए एक्सपर्ट से इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। इस बारे में डॉ. खुशबू सक्सेना, सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी, शारदाकेयर-हेल्थसिटी जानकारी दे रही हैं।
ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क में क्या बेहतर है?
डॉक्टर खुशबू का कहना है कि बेशक ब्रेस्टफीडिंग किसी भी बच्चे के पोषण के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन अगर किन्हीं कारणों से बच्चे को मां का दूध नहीं मिल पा रहा है, तो फॉर्मूला फीडिंग भी की जा सकती है।
ब्रेस्ट मिल्क के फायदे
- मां का दूध शिशु की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है। इसमें प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल का सही संतुलन होता है, जो बच्चे की उम्र और विकास की जरूरतों के हिसाब से प्राकृतिक रूप से बदलता रहता है।
- सबसे जरूरी बात यह है कि मां के दूध में एंटीबॉडी, इम्यून सेल्स, एंजाइम, हार्मोन और फायदेमंद बैक्टीरिया होते हैं जो बच्चों को इन्फेक्शन, एलर्जी और बचपन की कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।
- American Academy of Pediatrics के अनुसार, बच्चे को शुरू के 6 महीने तक ब्रेस्टफीडिंग करवाने से सांस के इन्फेक्शन, दस्त और कान के इन्फेक्शन का खतरा कम होता है, और साथ ही यह भविष्य में मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज की संभावना भी होती है।
- नई मां के लिए भी ब्रेस्टफीडिंग के कई फायदे हैं, जैसे डिलीवरी के बाद तेजी से रिकवरी और ब्रेस्ट व ओवेरियन कैंसर का लंबे समय का खतरा कम होना।
फॉर्मूला मिल्क के फायदे
- बात अगर इन्फेंट फॉर्मूला की करें तो यह वैज्ञानिक रूप से तैयार किया जाता है। इससे उन बच्चों को पूरा पोषण मिलता है, जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पाता है। कमर्शियल फॉर्मूला में भी प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, विटामिन, मिनरल और सामान्य विकास व दिमाग के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्वों की सही मात्रा होती है। हालांकि फॉर्मूला मिल्क, मां के दूध में पाए जाने वाले पोशक तत्वों की हूबहू नकल नहीं कर सकता, लेकिन सही तरीके से तैयार और इस्तेमाल किए जाने पर यह स्वस्थ विकास में मदद करता है।
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- फॉर्मूला मिल्क की मात्रा और इसे देना सही है या नहीं, यह हर बेबी के लिए अलग हो सकता है।
- फॉर्मूला हमेशा साफ पानी और स्टेरलाइज किए गए बर्तनों का इस्तेमाल करके, बनाने वाली कंपनी के निर्देशों के अनुसार ही तैयार किया जाना चाहिए।
- गलत तरीके से घोल बनाने, साफ-सफाई की कमी या ठीक से स्टोर न करने से इन्फेक्शन और पोषण की कमी का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह जब मां, ब्रेस्ट मिल्क पंप करती है, तो उसे सुरक्षित रूप से निकालना, स्टोर करना और सही तरह से संभालना जरूरी है।
- माता-पिता को घर पर बने इन्फेंट फॉर्मूला या बिना जाचे-परखे तरीकों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है और ये सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
- यहां यह समझना भी जरूरी है कि बेबी के जन्म के बाद कुछ मां आसानी से ब्रेस्टफीडिंग करवा पाती हैं, वहीं कुछ पूरी कोशिश के बाद भी चुनौती का सामना करती हैं। ऐसे में आप डॉक्टर की सलाह के आधार पर फॉर्मूला मिल्क का चुनाव करें।
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