हमारी रसोई में कई ऐसे मसाले मौजूद हैं, जो औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और जिनका इस्तेमाल केवल रंगत व स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत से जुड़ी कई दिक्कतों को दूर करने में भी किया जाता है। जीरा इन्हीं में से एक है। हम सभी दाल और सब्जी में जीरे का तड़का लगाते हैं, लेकिन कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि यह छोटा सा बीज कैसे डाइजेशन को दुरुस्त करके गैस और ब्लोटिंग को दूर कर सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि खानी पेट जीरे के पानी पीने से फैटी लिवर के लक्षण रिवर्स हो सकते हैं। क्या वाकई ऐसा है? चलिए इसका जवाब एक्सपर्ट से जानते हैं। इस बारे में Dr Sandhya Singh S, Dietitian, Apollo Hospitals, Bangalore जानकारी दे रही हैं।

गुणों से भरपूर होता है जीरा

जीरा एक ऐसा भारतीय मसाला है, जो गुणों से भरपूर होता है। इसमें एसेंशियल ऑयल, विटामिन, खनिज, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। इन तत्वों की मौजूदगी जीरे को एक खास मसाला बनाती है, जो शरीर में 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' को कम कर सकता है। हालांकि, इसे सही मात्रा में लेना बहुत जरूरी है। जीरे में मौजूद एसेंशियल ऑयल काफी तीखा होता है, इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए।

क्या जीरे के पानी से रिवर्स हो सकते हैं फैटी लिवर के लक्षण?

जीरे का पानी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। खाली पेट इसका सेवन करने से गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग और कब्ज दूर होती है। इससे फैटी लिवर के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि खाली पेट एक गिलास जीरा पानी पीने से शरीर को कुछ जरूरत मिनरल्स मिलते हैं और यह पाचन तंत्र की सफाई करने में मदद करता है। हालांकि, फैटी लिवर को कम करने के लिए सिर्फ इस पर निर्भर रहना ही सही नहीं होगा।

फैटी लिवर क्यों होता है?

फैटी लिवर का मुख्य कारण मेटाबॉलिज्म में होने वाले वे बदलाव हैं, जो सुस्त जीवनशैली, मोटापा, डिस्लिपिडेमिया (खून में फैट का असंतुलन), खराब खान-पान और नींद के गलत पैटर्न के कारण होते हैं। इसके अलावा, लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें, जैसे नियमित व्यायाम न करना, नाइट शिफ्ट में काम करना, खाने का कोई निश्चित समय न होना, डाइट में बहुत अधिक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, चीनी वाली चीजें, तला-भुना खाना, प्रोसेस्ड फूड और पैकेट बंद खाने का ज्यादा सेवन करना और तेल का बहुत अधिक इस्तेमाल, लिवर में कैलोरी और फैट जमा होने का कारण बनती हैं। इसके चलते लिवर सेल्स में फैट जमने लगता है, फैट का टूटना कम हो जाता है और लिवर से फैट बाहर निकलने में भी दिक्कत आती है, जिसके चलते लिवर फैटी होने लगता है।

फैटी लिवर पर ध्यान देना है जरूरी

फैटी लिवर लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रह सकता है और इसका पता अक्सर रूटीन ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड के दौरान ही चलता है। इसलिए, जिन लोगों को मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, पीसीओएस, थायराइड है या जिनके परिवार में मेटाबॉलिक बीमारियों का इतिहास रहा है, उन्हें केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। नियमित जांच, लिवर फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर की निगरानी और डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। फैटी लिवर, इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होने वाला एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। इसके लक्षणों को रिवर्स करने के लिए सिर्फ जीरे का पानी पीना काफी नहीं है। खान-पान की आदतों में बदलाव करें, वजन कम करें और नियमिनत जीवनशैली अपनाएं।

ज्यादा मात्रा में न पिएं जीरा का पानी

  • जीरे का पानी ज्यादा पीने से एसिडिटी और सीने में जलन हो सकती है। इसे दिन में 1 बार ही पिएं।
  • 1 टीस्पून जीरे को 1 गिलास पानी में भिगोएं।
  • सुबह इसे उबाल लें और छानकर पिएं।

 

 

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