हमारा शरीर अक्‍सर छोटी-छोटी परेशानियों के जरिए अनहेल्‍दी होने का संकेत देता है, लेकिन कई बार हम इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। आयुर्वेद में माना गया है कि शरीर के अलग-अलग अंगों और सिस्‍टम को हेल्‍दी रखने के लिए प्रकृति में मौजूद कई हर्ब्‍स को ट्रेडिशनल रूप से इस्‍तेमाल किया जाता रहा है।

आयुर्वेद में हर हर्ब के अपने स्‍पेशल गुण बताए गए हैं। कुछ हर्ब्स को दिल की सेहत के लिए अच्‍छा माना जाता है, तो कुछ डाइजेशन, सांसों, आंखों और लिवर जैसे अंगों को सपोर्ट करने के लिए इस्‍तेमाल किए जाते हैं।

हालांकि, किसी भी हर्ब को लेने से पहले अपनी सेहत को ध्‍यान में रखना जरूरी है। हर्ब्‍स के फायदे तभी मिल सकते हैं, जब इनके साथ बैलेंस डाइट, अच्‍छी नींद और हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल को भी अपनाया जाए। आइए ऐसे ही कुछ आयुर्वेदिक हर्ब्स के बारे में जानते हैं। इसकी जानकारी मुंबई की सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट और Eatfit 24/7 की फाउंडर श्वेता शाह ने शेयर की है।

अर्जुन और अनार- दिल की सेहत

आयुर्वेद में अर्जुन की छाल का इस्‍तेमाल लंबे समय से दिल को हेल्‍दी रखने के लिए किया जाता रहा है। साथ ही अनार भी शरीर को पोषण देता है और दिल को हेल्‍दी रखता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट्स, विशेष रूप से पॉलीफेनॉल्‍स, शरीर को ऑक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस से बचाते हैं।

पुनर्नवा और गोखरू- किडनी हेल्‍थ

पुनर्नवा और गोखरू जैसे हर्ब्‍स को किडनी और यूरिनरी सिस्‍टम की हेल्‍थ के लिए जरूरी हर्ब्‍स माना जाता है। पुनर्नवा अपने डाययूरेटिक गुणों के लिए जानी जाती है, जो शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करती है। गोखरू का सेवन करने से किडनी के काम सही तरह से होते रहते हैं।

पिप्पली और मुलेठी- रेस्पिरेटरी सिस्टम

आयुर्वेद में पिप्पली और मुलेठी का इस्‍तेमाल सांस से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है। ये दोनों चीजें गले और रेस्पिरेटरी सिस्टम को आराम देने में मददगार मानी जाती हैं।

कुटकी और भूम्यामलकी- लिवर के लिए

कुटकी और भूम्यामलकी का इस्तेमाल आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में लिवर की हेल्‍थ को सपोर्ट करने के लिए किया जाता रहा है। कुटकी शरीर से पित्त और कफ को बैलेंस करती है और डाइजेशन को सुधारती है। साथ ही यह लिवर को डिटॉक्सीफाई करने और पीलिया या फैटी लिवर जैसी समस्याओं से बचाने में भी मदद करती है। भूम्यामलकी लिवर की कार्यप्रणाली को सही बनाने और लिवर की सूजन कम करने वाला अच्‍छा हर्ब है।

आंवला और त्रिफला- आंखों के लिए

आंवला विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत माना जाता है और त्रिफला का इस्‍तेमाल आयुर्वेद में डाइजेशन और आंखों से जुड़ी समस्‍याओं के लिए सदियों से किया जा रहा है।

आपको इस बात का ध्‍यान रखना होगा कि आयुर्वेद‍िक हर्ब्‍स हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल का हिस्‍सा हो सकते हैं, लेकिन इन्‍हें किसी भी बीमारी का इलाज समझना सही नहीं है।

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Image Credit: Shutterstock & magnific.com