सितंबर का महीना खत्म होते ही मौसम में बदलाव आने लगता है। मानसून के बाद हल्की सी ठंडक देखने को मिलती है, जिसे हम शरद ऋतु और गुलाबी ठंड की शुरुआत कहते हैं। मौसम के इस बदलते मिजाज के साथ-साथ हमारे खान-पान में भी खासे बदलाव आते हैं। भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि हमारे त्योहार और खान-पान पूरी तरह से आयुर्वेद और बदलते मौसम से जुड़े होते हैं। सितंबर महीने के बाद कुछ खास मिठाइयां बनाई जाती हैं, जो मुख्य रूप से शरद ऋतु के समय ही बनती हैं।

सितंबर और अक्टूबर के बाद बनने वाली 5 खास पारंपरिक मिठाइयां

सितंबर के बाद बनने वाली ये पारंपरिक मिठाइयां केवल स्वाद ही नहीं देतीं, बल्कि बदलते मौसम में शरीर को स्वस्थ और एनर्जेटिक रखने में भी बहुत मदद करती हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही 5 खास मिठाइयों के बारे में।

1. तिल और गुड़ के लड्डू और चिक्की

सितंबर-अक्टूबर के बाद जैसे-जैसे मौसम बदलता है, वैसे ही व्यंजनों में भी कई बदलाव देखने को मिलते हैं। इस दौरान तिल-गुड़ के लड्डू और चिक्की लोगों के द्वारा खूब पसंद किए जाते हैं। इनकी तासीर गर्म होती है और इनमें आयरन व कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो बदलते मौसम में शरीर को अंदर से गर्माहट देते हैं।

2. गोंद और ड्राई फ्रूट्स के लड्डू

गोंद और मेवे के लड्डू भी सितंबर-अक्टूबर के बाद विशेष रूप से बनाए जाते हैं। ये खास तौर पर ठंड में शरीर को ताकत देने के लिए तैयार किए जाते हैं। इनमें शुद्ध देसी घी, भुना हुआ आटा और तरह-तरह के ड्राई फ्रूट्स शामिल होते हैं। यह जोड़ों के दर्द को दूर करने और मौसम बदलने की वजह से होने वाली शारीरिक कमजोरी को कम करने में मदद करते हैं।

3. तिल-मूंगफली की गजक और रेवाड़ी

उत्तर भारत में सितंबर के महीने के बाद से ही बाजारों में मूंगफली, तिल और गुड़ से बनी गजक व रेवाड़ी मिलने लगती है। यह पारंपरिक मिठाई सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा बिकती है और शरीर में एनर्जी बनाए रखती है। 

4. मलाईदार घेवर

वैसे तो घेवर की शुरुआत सावन के महीने से हो जाती है, लेकिन शरद ऋतु और दिवाली के आसपास भी मलाईदार व रबड़ी वाले घेवर की बहुत ज्यादा डिमांड रहती है। इसे सितंबर-अक्टूबर के त्यौहारों के आसपास ज्यादा मात्रा में बनाया जाता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ त्यौहारों की मिठास को भी बढ़ा देता है।

5. केसर और ड्राई फ्रूट्स वाली गाढ़ी खीर

शरद पूर्णिमा और नवरात्रि के बाद से ताजा दूध की गाढ़ी खीर बनाने की विशेष परंपरा है। अधिकतर लोग ठंड के मौसम में यानी सितंबर-अक्टूबर के बाद ड्राई फ्रूट्स और केसर से बनी गाढ़ी खीर खाते हैं। इसकी औषधीय गुण और सुखद मिठास शरीर में पित्त को शांत करती है और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाती है।

इन मिठाइयों को बनाने के आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक कारण

यह सवाल आपके मन में जरूर आया होगा कि आखिर सितंबर के बाद ही इन मिठाइयों को क्यों बनाया जाता है? इसके पीछे ये खास वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक वजहें हैं -

  • बारिश का मौसम खत्म होते ही हवा में नमी कम होने लगती है और ठंडक बढ़ती है। ऐसे में घी, तिल और गुड़ जैसी गर्म चीजें शरीर के अंदरूनी तापमान को मेंटेन रखती हैं।
  • मौसम बदलने पर सर्दी, जुकाम और वायरल इन्फेक्शन होना एक आम बात है। ऐसे में ये पारंपरिक मिठाइयां शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करती हैं।
  • शरद ऋतु में स्किन का रूखापन बढ़ने लगता है। ऐसे में तिल और देसी घी जैसी चीजें स्किन को अंदर से पोषण देकर नेचुरली सॉफ्ट बनाए रखती हैं।

निष्कर्ष: सितंबर के बाद खाई जाने वाली ये 5 मिठाइयां न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद मानी जाती हैं। ये मिठाइयां आज से नहीं, बल्कि कई सौ सालों पहले से हमारे पूर्वजों द्वारा मौसम के हिसाब से खाई जाती रही हैं। ऐसे में अगर आप भी इस साल शरद ऋतु के दौरान अपने घर में कुछ खास मीठा बनाने की सोच रही हैं, तो इन 5 मिठाइयों को जरूर ट्राई कर सकती हैं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

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