राजस्थान के अनेक मंदिर अपनी प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। इन मंदिरों की पुरानी परंपराएं और धार्मिक कथाएं आज भी चलती आ रही हैं। हर साल हजारों लोग इन मान्यताओं के चलते यहां दर्शन के लिए आते हैं। हर मंदिर से कोई न कोई पुरानी कहानी या चमत्कार जुड़ा है और लोग इनपर भरोसा करते हैं। आप भी अगर राजस्थान आ रही हैं और अनोखे मंदिरों में दर्शन का प्लान कर रही हैं, तो यह आर्टिकल आपके काम आएगा।
बुलेट बाबा मंदिर
इस मंदिर के बारे में तो आप जानते ही होंगे। यहां भगवान की जगह एक रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल की पूजा होती है। इस मंदिर को ओम बन्ना मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि ओम बन्ना नाम का एक व्यक्ति बुलेट से पाली- जोधपुर मार्ग पर जा रहा था। रास्ते में सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई, जिसके बाद मोटरसाइकिल को पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इसके बाद बार-बार बाइक गायब होकर फिर से वहीं पहुंच जाती जहां हादसा हुआ था। इसलिए कई लोगों ने इसे चमत्कार माना और बाद में उसी स्थान पर बुलेट की पूजा शुरू कर दी गई।
मंदिर से जुड़ी जरूरी जानकारी
- यहां दर्शन के लिए आ रहे यात्री ध्यान रखें कि मंदिर बहुत भव्य महल जैसा नहीं है।
- इस मंदिर की खासियत मोटरसाइकिल ही है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
- पाली या जोधपुर रेलवे स्टेशन से आप यहां पहुंच सकती है।
- जोधपुर से पाली की ओर जाने वाले राजमार्ग से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
करणी माता मंदिर
राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित करणी माता मंदिर हजारों चूहों के लिए जाना जाता है। यहां लोग चूहों की सेवा करते हैं और उन्हें खाना खिलाते हैं। मान्यता है कि ये चूहे देवी करणी माता के भक्तों के रूप में पूजे जाते हैं। इसके साथ ही इस मंदिर की सबसे खास मान्यता सफेद चूहों को लेकर है। सफेद चूहा दिखाई देना शुभ माना जाता है।
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मंदिर से जुड़ी जरूरी जानकारी
- देशनोक रेलवे स्टेशन मंदिर पास पड़ता है, हालांकि आपको सभी बड़े शहरों से यहां के लिए सीधी ट्रेन नहीं मिलेगी।
- मंदिर बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है। आप यहां बस या कैब से पहुंच सकती हैं।
- मंदिर का मुख्य द्वार और चांदी के बने दरवाजे इस जगह की खासियत माने जाते हैं।
- अंदर संगमरमर की सुंदर नक्काशी और धार्मिक कलाकृतियां देखने को मिलती हैं।
काल भैरव मंदिर
राजस्थान के अजमेर में स्थित यह मंदिर अपने अनोखे प्रसाद के लिए जाना जाता है। मंदिर में भगवान भैरव को प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाने की परंपरा है। श्रद्धालु मानते हैं कि भैरव बाबा को यह भोग चढ़ाने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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मंदिर से जुड़ी जरूरी जानकारी
- ट्रेन से आ रहे हैं, तो अजमेर रेलवे स्टेशन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- जयपुर, दिल्ली और आसपास के शहरों से बस और कैब से भी यहां पहुंच सकते हैं।
इन तीनों मंदिरों की खासियत यह है कि इनकी पहचान केवल वास्तुकला से नहीं, बल्कि अलग-अलग लोक मान्यताओं के कारण भी देशभर से लोगों को आकर्षित करती हैं। यहां पहुंचना आसान है, इसलिए हर साल लाखों लोग यहां पहुंचते हैं।
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Image Credit- magnific
