घूमने का शौक तो हम सभी को होता है। अक्सर हम यही कहते हैं कि चलो कहीं घूम आते हैं। कभी हम हिल स्टेशंस पहुंच जाते हैं तो कभी किसी शहर को एक्सप्लोर करने निकल जाते हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं जो छुट्टियों में समुद्र किनारे समय बिताना पसंद करते हैं। इसे ही हम यात्रा कहते हैं, लेकिन जब हम किसी मंदिर, पवित्र नदी के घाट या किसी धार्मिक जगह पर भगवान के दर्शन और पूजा करने के लिए जाते हैं, तो इसे तीर्थ यात्रा कहा जाता है।

यह दोनों ही शब्द सुनने में एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनका मतलब अलग होता है। यात्रा में जहां नई जगह देखना, आराम करना और अच्छा समय बिताने पर फोकस होता है, वहीं तीर्थ का कनेक्शन भक्ति और मन की शांति से होता है। यही वजह है कि तीर्थ और सामान्य यात्रा को अलग-अलग समझा जाता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-

यात्रा का मतलब क्या होता है?

यात्रा का सीधा मतलब है एक जगह से दूसरी जगह जाना। जब आप छुट्टियां बिताने के लिए मनाली, गोवा या किसी दूसरी जगह जाते हैं, तो इसे यात्रा या ट्रिप कहा जा सकता है। किसी को लाइफ में एंटरटेनमेंट चाहिए होता है, तो कोई आराम करने के लिए बाहर जाता है और किसी को नई जगहों को देखना और एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है। यात्रा में हमारा ध्यान ज्यादातर बाहर की चीजों पर ही रहता है। रास्ते में खूबसूरत नजारे देखना, वहां का खाना खाना, नई जगहों की तस्वीरें लेना या आसपास घूमना यात्रा का ही हिस्सा है।

क्या होता है तीर्थ का मतलब?

आपको बता दें कि तीर्थ शब्द संस्कृत की ‘तॄ’ धातु से बना है। इसका मतलब तैरने या पार जाने से है। सीधे तौर पर समझें तो तीर्थ का मतलब यह होता है जब हमें जीवन के दुख-दर्द से ऊपर उठकर ईश्वर से जुड़ना होता है, तो तीर्थ से ही हमें राह मिलती है। इसका मकसद सिर्फ किसी जगह पर जाना नहीं होता है। यहां भक्ति, भगवान के प्रति समर्पण और मन की पवित्रता पर पूरा फोकस होता है।

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कौन सी जगहें तीर्थ कहलाती हैं?

हर धार्मिक या खूबसूरत जगह को तीर्थ नहीं कहा जाता है। तीर्थ वो होता है जहां भगवान का कोई अवतार हुआ हो या कोई प्राण प्रतिष्ठित मंदिर हो। इसके अलावा जहां संतों और ऋषि-मुनियों ने लंबे समय तक साधना की होती है, उस जगह को भी तीर्थ की कैटेगरी में रखा जाता है।

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तीर्थ यात्रा और सामान्य यात्रा में अंतर

अंतर का आधार सामान्‍य यात्रा तीर्थ यात्रा
मकसद घूमना, आराम करना और एंटरटेनमेंट भक्ति, दर्शन और भगवान से जुड़ने की भावना
फोकस बाहर की खूबसूरती और नजारों को देखने पर मन को अंदर लगाने और ईश्वर को याद करने पर
एक्‍सपीर‍ियंस रोज की भागदौड़ से ब्रेक और रिफ्रेशमेंट मन और आत्मा की गहराई से शांति
जगह का महत्व कोई भी सुंदर या फेमस टूरिस्ट स्पॉट धार्मिक या आध्यात्मिक महत्व वाला पवित्र स्थान

तीर्थ यात्रा और घूमने वाली यात्रा में असली अंतर क्‍या है?

अब इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकती हैं। अगर आप किसी जगह सिर्फ वहां की खूबसूरती देखने के लिए जा रही हैं, तो यह नॉर्मल यात्रा है, लेकिन अगर आपका मकसद किसी पवित्र स्थान पर जाकर भगवान के दर्शन करना और पूजा करना है, तो इसे तीर्थ यात्रा कहा जाएगा। दोनों के बीच कुछ बड़े फर्क इस तरह समझ सकती हैं-

  • मकसद अलग होता है: सामान्य यात्रा में घूमना, आराम और एंटरटेनमेंट की सब कुछ होता है। तीर्थ यात्रा में भक्ति और भगवान से जुड़ने की भावना ज्यादा होती है।
  • ध्यान किस पर होता है: घूमने के दौरान हम बाहर की चीजों पर ध्यान देते हैं। तीर्थ में मन को अंदर की ओर लगाने और ईश्वर को याद करने पर जोर रहता है।
  • एक्‍सपीर‍ियंस अलग होता है: नॉर्मल यात्रा रोज की भागदौड़ से ब्रेक लेने वाली होती है। तीर्थ यात्रा को मन और आत्मा की शांति से जोड़ा जाता है।
  • जगह का महत्व: नॉर्मल यात्रा किसी भी जगह की हो सकती है, जबकि तीर्थ के पीछे धार्मिक या आध्यात्मिक महत्व होता है।

तो क्या तीर्थ यात्रा भी एक यात्रा है?

हां, इसे ऐसे समझ सकते हैं कि तीर्थ यात्रा भी एक तरह की यात्रा ही है, क्योंकि इसमें भी इंसान अपने घर या एक जगह से निकलकर किसी दूसरी जगह पहुंचता है। बस फर्क उसके मकसद का होता है।

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