फिल्मों में हीरो को खतरनाक रास्तों पर चलते देखकर, कई बार हमारे मन में भी यह ख्याल आता है कि काश, हम भी अपनी जिंदगी में ऐसा ही कुछ एडवेंचर कर पाते। दुनिया में ऐसी कई जगहें मौजूद हैं, जहां आप फिल्मों में दिखाए गए कुछ सीन्स को हकीकत में महसूस कर सकती हैं। जी हां, इस लेख में हम आपको ऐसी ही एक खूबसूरत जगह के बारे में बताएंगे, जो भारत के सबसे खतरनाक और रोमांचक ट्रेक्स में से एक है।

भारत का खतरनाक ट्रेक

अगर आपको भी एडवेंचरस एक्टिविटीज करने का बहुत शौक है, तो आप मेघालय के खासी हिल्स में स्थित 'यू मावरिंगखांग' जा सकती हैं।

मेघालय के खासी हिल्स में स्थित 'यू मावरिंगखांग' ट्रेक

मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स में एक खतरनाक ट्रेक है, जिसका नाम यू मावरिंगखांग ट्रेक है। इसे भारत के सबसे डेंजरस ट्रेक्स में गिना जाता है। यह एक ऐसा अनोखा रास्ता है, जो गहरी घाटियों, विशाल चट्टानों और बहती नदियों के ऊपर से होकर गुजरता है। दरअसल यहां बांस से बना एक पतला पुल है, जो हवा में लटकता हुआ नजर आता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह ट्रेक कमजोर दिल वाले लोगों के लिए बिल्कुल नहीं है। हालांकि एडवेंचर के शौकीनों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।

वाहकैन गांव और स्थानीय आदिवासियों की मेहनत से बना ट्रेक

एडवेंचर लवर्स अगर कुछ डिफरेंट और नया एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो उनके लिए मेघालय की खासी हिल्स में छिपा यू मावरिंगखांग ट्रेक परफेक्ट रहेगा। यू मावरिंगखांग ट्रेक की शुरुआत शिलांग और सोहरा से कुछ दूरी पर बसे वाहकैन नाम के एक छोटे और खूबसूरत गांव से होती है। सबसे खास बात यह है कि इस रोमांचक ट्रेक को बनाने का काम वाहकैन गांव के स्थानीय खासी आदिवासियों ने खुद किया है। उन्होंने अपनी पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए बांस और बेत की डोरियों से इन पुलों और सीढ़ियों को तैयार किया है।  

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किंग ऑफ स्टोंस तक पहुंचने का अनोखा सफर

मेघालय पर्यटन विभाग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस ट्रेक को बनाने का मुख्य उद्देश्य एक विशालकाय पवित्र चट्टान तक पहुंचना था। इस चट्टान को स्थानीय लोग किंग ऑफ स्टोंस यानी पत्थरों का राजा कहते हैं। इस ट्रेक पर आपको पूरे रास्ते में सैकड़ों फीट गहरी खाई के ठीक ऊपर लटकते बांस के पुलों से होकर गुजरना पड़ता है। यही नहीं, कई जगहों पर बांस की संकरी सीढ़ियां भी बनाई गई हैं। इस रास्ते से गुजरते समय जब लोग नीचे उफनती नदी को देखते हैं, तो उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।  

इस थ्रिलिंग सफर पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान - 

अगर आपने भी यहां जाने का मन बना लिया है, तो जानें से पहले कुछ जरूरी बातों का खास ध्यान रखें -

  • स्थानीय निवासी समय-समय पर इस बांस के पुल की मरम्मत करते रहते हैं, जिस वजह से इसे काफी मजबूत माना जाता है।
  • इस ट्रेकिंग के दौरान आपको करीब 3,000 सीढ़ियां पार करनी होती हैं और इस ट्रेक को पूरा करने में लगभग 3 से 4 घंटे लग सकते हैं।
  • अगर आपको ऊंचाई से डर लगता है या खाई देखते ही आपकी दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, तो यहां जाने से पहले सोच-समझकर निर्णय लें।
  • बारिश के मौसम में इन बांसों पर फिसलन काफी बढ़ जाती है, इसलिए संभलकर चलें और अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज का ही इस्तेमाल करें। 

ऐसे पहुंचें यू मावरिंगखांग -

अगर आप भी यू मावरिंगखांग जाना चाहती हैं, तो इस तरह से पहुंच सकती हैं - 
  • सबसे पहले अपने घर के नजदीकी एयरपोर्ट से गुवाहाटी के गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा तक का टिकट लें।
  • आप चाहें, तो रेल मार्ग से भी गुवाहाटी रेलवे स्टेशन तक जा सकती हैं।
  • गुवाहाटी से आप सीधा शिलांग जाएं, फिर शिलांग से वाहखेन गांव पहुंचें।
  • वाहखेन गांव से आप प्राइवेट कैब या किराए की बाइक और स्कूटर लेकर यहां तक पहुंच सकती हैं।
  • शिलांग से वाहखेन जाने के लिए लगभग 2 से 2.5 घंटे का समय लगता है।

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अगर आप भी अपनी जिंदगी में लीक से हटकर कुछ ऐसा थ्रिल अनुभव करना चाहती हैं, तो मेघालय के इस हवा में लटकते बांस के पुल की सैर आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकती है। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

Image Credit:  magnific