आज के समय में ज्‍यादातर लोग फ्लाइट से ट्रैवल करते हैं, लेक‍िन क्‍या आपने कभी सीट के नंबरों पर ध्‍यान द‍िया है क‍ि इसमें 13 नंबर की सीट नहीं होती है? कई एयरलाइंस में 12 नंबर की रो के बाद सीधे 14 नंबर की रो शुरू हो जाती है। यही वजह है कि कई लोग पहली बार इसे देखकर हैरान हो जाते हैं और सोचते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है?

क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक है या इसके पीछे कोई खास वजह है? दिलचस्प बात तो यह है कि ऐसा सिर्फ हवाई जहाज में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में होटलों, ब‍िल्‍ड‍िंग और लिफ्ट में भी देखने को मिलता है। इसके पीछे कोई टेक्‍न‍िक नहीं है बल्‍क‍ि लोगों की सोच और साइकोलॉजी से जुड़ी हुई वजह है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों कई एयरलाइंस 13 नंबर की सीट या रो को अपने प्‍लेन में शामिल नहीं करते हैं?

आखिर क्यों प्‍लेन में नहीं होती 13 नंबर की सीट?

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यही बताई जाती है क‍ि 13 नंबर को अशुभ माना जाता है। खासकर यूरोप और अमेरिका के कई जगहों पर लोग इस नंबर को लेकर अंधविश्वास रखते हैं। इसी कारण कई एयरलाइंस अपने प्‍लेन में 13 नंबर की रो ही नहीं बनातीं और 12 के बाद सीधे 14 नंबर आ जाता है।

क्या है ट्रिस्काइडेकाफोबिया?

13 नंबर से डरने वाली सि‍चुएशन को ट्रिस्काइडेकाफोबिया (Triskaidekaphobia) कहा जाता है। यह कोई एयरलाइन का नियम नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक मान्यता है। कई लोगों को सच में 13 नंबर देखकर डर लगता है। इसी वजह से कई कंपनियां इस नंबर का इस्तेमाल नहीं करती हैं।

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13 नंबर को अशुभ क्यों माना जाता है?

अब आप सोच रही होंगी क‍ि आख‍िर 13 नंबर को अशुभ क्‍यों माना जाता है? तो आपको बता दें क‍ि इस मान्यता की जड़ें वेस्‍टर्न कंट्रीज की धार्मिक और पौराणिक परंपराओं से जुड़ी हुई हैं। ईसाई मान्यताओं के मुताब‍िक, द लास्ट सपर में 13 लोगों की मौजूदगी के बाद ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। वहीं नॉर्स पौराणिक कथाओं में भी 13 नंबर से जुड़ी एक नकारात्मक घटना का जिक्र मिलता है। यही वजह है कि समय के साथ कई लोगों के मन में 13 नंबर को लेकर डर बैठ गया।

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एयरलाइंस इसे क्यों गंभीरता से लेती हैं?

दरअसल, फ्लाइट में ट्रैवल करना पहले से ही कई लोगों के ल‍िए तनाव भरा होता है। कुछ पसैंजर्स को उड़ान का डर भी होता है। ऐसे में अगर सीट का नंबर देखकर ही किसी यात्री को असहज महसूस होने लगे, तो उसकी पूरी ट्र‍िप खराब हो सकती है। इसी कारण कई एयरलाइंस ऐसी नंबरिंग अपनाती हैं, जिससे यात्रियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। इसे एक तरह की साइकोलॉजिकल स्ट्रैटेजी भी माना जाता है।

क्‍या इसमें बिजनेस का भी है फायदा?

इसके पीछे एक कारण यह भी है क‍ि अगर किसी यात्री को 13 नंबर की सीट पसंद नहीं आती और वह उसे लेने से मना कर देता है, तो एयरलाइन को नुकसान हो सकता है। कुछ सीटें खाली भी रह सकती हैं। यही वजह है कि कई कंपनियां शुरुआत से ही 13 नंबर की रो हटाकर इस परेशानी से बच जाती हैं। खासकर इंटरनेशनल फ्लाइट में, जहां अलग-अलग देशों के लोग सफर करते हैं, यह तरीका ज्यादा अपनाया जाता है।

क्या सभी एयरलाइंस ऐसा करती हैं?

अभी तक ऐसा कोई न‍ियम तो नहीं बना है। आज भी दुनिया की कई एयरलाइंस 13 नंबर की सीट और रो का इस्तेमाल करती हैं। वहीं कई एयरलाइंस इसे पूरी तरह छोड़ देती हैं।

सिर्फ 13 ही नहीं, 17 नंबर से भी बचते हैं कुछ देश

दिलचस्प बात तो यह है कि हर देश में अशुभ मानी जाने वाली संख्या एक जैसी नहीं है। इटली और ब्राजील जैसे कुछ देशों में 17 नंबर को भी अशुभ माना जाता है। इसकी वजह यह मानी जाती है कि रोमन नंबर में 17 को जिस तरह लिखा जाता है, उसे लैटिन भाषा में एक ऐसे शब्द की तरह ल‍िखा जाता है, जिसका मतलब होता है 'मैं अपना जीवन जी चुका हूं।' इसी कारण वहां कुछ जगहों पर 17 नंबर से भी बचा जाता है।

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सिर्फ विमान में ही नहीं, होटलों में भी दिखती है यह बात

अगर आपने विदेशों के कुछ होटल या ऊंची-ऊंची इमारतें देखी होंगी, तो वहां भी 13वीं मंजिल का नंबर कई बार नहीं द‍िखता है। लिफ्ट में 12 के बाद सीधे 14 लिखा होता है। इसका कारण भी वही है।

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तो अब तो आप जान ही गई होंगी क‍ि क्‍यों कुछ एयरलाइन 13 नंबर की सीट या रो नहीं रखती हैं। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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