हमारा देश अपनी अनूठी संस्कृति और आस्था के लिए जाना जाता है। देश में हजारों प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन राजस्थान के पाली-जोधपुर हाईवे पर स्थित ओम बन्ना धाम यानी बुलेट बाबा मंदिर सबसे अलग और अनूठा है। जी हां, आमतौर पर मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियां होती हैं, लेकिन यहां 350cc की एक रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक की पूजा होती है। कहत है कि इस हाईवे से गुजरने वाले हर यात्री की सुरक्षा स्वयं ओम बन्ना की आत्मा करती है। यही वजह है कि यहां से गुजरने वाली हर गाड़ी रुककर शीश झुकाती है। आइए जानते हैं इस धाम के बनने की पूरी कहानी के बारे में।
बुलेट बाबा कौन थे?
बुलेट बाबा का असल नाम ओम सिंह राठौड़ था, जिन्हें प्यार से सब 'ओम बन्ना' कहते थे। वे पाली जिले के चोटिला गांव के रहने वाले थे। 5 मई 1988 को ओम बन्ना अपनी बुलेट से बंगड़ी से चोटिला जा रहे थे। रास्ते में संतुलन बिगड़ने के कारण उनकी बाइक सड़क किनारे एक पेड़ से टकरा गई। इस भयंकर दुर्घटना में ओम बन्ना का मौके पर ही निधन हो गया और उनकी बाइक पास की खाई में जा गिरी।
जब थाने से अपने आप गायब हुई बुलेट
ओम बन्ना के निधन के बाद घटी घटना ने स्थानीय लोगों और पुलिस के होश उड़ा दिए। कहते हैं कि इसी घटना ने इस जगह को एक दैवीय स्थान बना दिया। हादसे के बाद पुलिस बुलेट को जब्त करके पास के थाने ले गई, लेकिन अगली सुबह बाइक थाने से गायब हो गई और ठीक दुर्घटनास्थल पर खड़ी मिली। पुलिस अधिकारियों ने दोबारा बाइक को थाने लाकर उसका पेट्रोल टैंक खाली कर दिया और उसे मजबूत जंजीरों से बांध दिया, लेकिन अगली सुबह बाइक फिर से थाने से गायब होकर उसी हादसे वाली जगह पर सही-सलामत खड़ी मिली। बार-बार इस चमत्कार को होते देख स्थानीय लोगों और पुलिस ने इसे ओम बन्ना का दैवीय संदेश माना और उस जगह पर मंदिर बनाने का फैसला लिया।
मंदिर की अनूठी परंपराएं और पूजा का तरीका
बता दें कि जोधपुर टूरिज्म की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, बुलेट बाबा धाम में पूजा-अर्चना का तरीका सामान्य मंदिरों से काफी अलग है-
- शराब का प्रसाद: इस धाम की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां भक्त ओम बन्ना को प्रसाद के रूप में शराब की बोतलें चढ़ाते हैं।
- सुरक्षा की मन्नत: यात्री अपनी गाड़ियों के सुरक्षित सफर के लिए बुलेट पर लाल धागा बांधते हैं और माथे पर तिलक लगाते हैं।
- हाईवे सुरक्षा का प्रतीक: मान्यता है कि जो व्यक्ति यहां रुककर नमन नहीं करता तो उसके साथ हाईवे पर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
यह भी पढ़ें- साल में सिर्फ एक बार ही खुलते हैं भगवान शिव के ये 2 मंदिर, दर्शन मात्र से पूरी होती है कामना
बुलेट बाबा मंदिर कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 51 किमी की दूरी पर है।
रेल मार्ग से: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पाली (20 किमी) है, जो जयपुर, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है।
सड़क मार्ग से: आप जोधपुर या पाली से प्राइवेट टैक्सी या RSRTC की सरकारी बसों के जरिए आसानी से NH-62 पर स्थित इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
मंदिर से जुड़ी जरूरी जानकारी
- मंदिर का समय: प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से रात 10:00 बजे तक।
- प्रवेश शुल्क: नि:शुल्क (कोई शुल्क नहीं)।
- घूमने का सबसे अच्छा समय - अक्टूबर से मार्च।
यह भी पढ़ें- सावन में लखनऊ से ऐसे करें उज्जैन की यात्रा, जानें बेस्ट रूट और पूरा ट्रैवल प्लान
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Images: incredible india website/jodhpur tourism official website
