पहली बार जब आप अपने शहर से किसी दूसरे राज्य में घूमने जाती हैं, जहां की भाषा और खान-पान अलग है, तो वहां आपको अपनी पसंद का खाना ऑर्डर करने में कई परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग केवल गूगल पर देखकर नाम सर्च करते हैं और खाना मंगा लेते हैं, लेकिन उन्हें इसके स्वाद के बारे में नहीं पता होता। इसी तरह मीठा खाने के शौकीन लोगों को भी बंगाल की केवल रोसोगुल्ला या संदेश जैसी डिश के बारे में ही पता होता है। इसी चलते वह कुछ ऑर्डर नहीं कर पाते। आज के इस आर्टिकल में हम आपको कोलकाता के फेमस स्वीट डिशेज के बारे में बताएंगे, जिसे आप बिना मेन्यू पढ़े भी ऑर्डर कर सकते हैं।
छेना पायस
बंगाल की यह डिश भी काफी फेमस मानी जाती है। यह दिखने में आपको खीर जैसी लग सकती हैं, लेकिन इसका स्वाद बहुत अलग होता है। इसमें इस्तेमाल होने वाला ताजा छेना इस खीर का स्वाद अलग बनाता है। बंगाली मिठाइयों में छेना का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है। रसगुल्ला, संदेश और कई दूसरी मिठाइयों में आपको छेना खाने को मिल जाएगा। यह सब दूध से ही बनाया जाता है।
इसकी खासियत
- इस स्वीट डिश को बनाने के लिए दूध को गाढ़ा करके उसमें छेना, चीनी और खुशबूदार चीजें मिलाई जाती है।
- इसे आप खीर की तरह समझ सकते हैं, लेकिन फर्क यह है कि चावल नहीं डाले जाते हैं, इसलिए इसका टेक्सचर थोड़ा अलग लगता है।
- इसमें चावल की जगह छेना डाला जाता है।
- इसमें छेना थोड़ा दानेदार और सॉफ्ट टेक्सचर में रहता है।
- गाढ़े दूध के कारण इसमें मलाई का स्वाद ज्यादा आता है, जो इस डिश की सबसे बड़ी खासियत होती है।
पंतुआ
इसे देखकर आपको गुलाब जामुन की याद आ जाएगी, क्योंकि यह वैसा ही दिखता है। हालांकि, इसे बनाने का तरीका अलग है और इसका स्वाद भी अलग होता है। यह मिठाई छेना, खोया, मैदा और चीनी से बनती है।
इसकी खासियत
- पंतुआ बनाने के लिए सबसे पहले छेना और खोया को अच्छी तरह मिलाया जाता है।
- ताजे दूध को फाड़कर पहले छेना बनाया जाता है।
- छेना जितना ताजा और नरम होगा, पंतुआ की बनावट उतनी अच्छी बनती है।
- इसका शेप बनाने के लिए थोड़ी मात्रा में मैदा मिलाकर नरम आटा जैसा मिश्रण तैयार किया जाता है।
- इसके बाद इसे गोल शेप देकर घी या तेल में तला जाता है।
- लास्ट में इसे गर्म या गुनगुनी चीनी की चाशनी में डाल दिया जाता है।
- इसकी मिठास गुलाब जामुन जैसी लग सकती है, लेकिन छेना की वजह से इसका स्वाद थोड़ा अलग होता है।
मिष्टी दोई
जिस तरह रोसोगुल्ला के बारे में लगभग हर कोई जानता है, उसी तरह मिष्टी दोई भी बंगाल की सबसे फेमस मिठाइयों में से एक है। इसके नाम का अर्थ ‘मिष्टी’ यानी मीठा और ‘दोई’ यानी दही है। मिष्टी दोई बनाने के लिए बहुत ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं होती। यह कोलकाता जाने वाले लोगों के लिए फूड कल्चर का हिस्सा माना जाता है। कई जगह मिष्टी दोई को बनाते समय चीनी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन असली स्वाद गुड़ डालने पर ही आता है।
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इसकी खासियत
- मिष्टी दोई मिट्टी के बर्तन में जमाया जाता है। इससे मिष्टी दोई ज्यादा गाढ़ा बनती है।
- इसका रंग सफेद दही जैसा नहीं होता। यह क्रीम या भूरा दिखाई देता है।
- मिष्टी दोई का स्वाद मीठा होने के साथ-साथ हल्का खट्टा भी होता है।
- इसके जमने के बाद इसे ठंडा करने के लिए रख दिया जाता है।
- गर्म और मसालेदार खाने के बाद यहां लोग ठंडा मिष्टी दोई खाते हैं।
- घर में कोई खास मौका हो या मेहमान आए हों, तो बंगाली इसे जरूरी सर्व करते हैं।
इन डिशेज के अलावा आप लंगचा और कमलाभोग भी ऑर्डर कर सकती हैं, जो बंगाल की सबसे मशहूर मिठाइयों में से एक है। लंगचा खाने में बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से नरम होता है और कमलाभोग रसगुल्ले जैसा दिखता है।
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Image Credit- gemini
