History of Katran Market: बात जब कपड़ों के फैब्रिक की आती है, तो लोगों को जुबान पर दिल्ली के मंगोलपुरी की मशहूर कतरन मार्केट का नाम जरूर आता है। यह जगह आज न केवल दिल्ली बल्कि एशिया की सबसे बड़ी कतरन बाजार है। अगर इसके नाम पर गौर करें, तो कतरन यानी कपड़ों के छोटे-छोटे टुकड़े और मार्केट यानी बाजार। इसका सीधा अर्थ है कि ऐसा बाजार जहां कपड़ों को टुकड़े मिलते हैं। हालांकि, वर्तमान में यहां पर सस्ते फैब्रिक से लेकर ब्रांडेड फैब्रिक मिलते हैं।

मगर क्या आपको पता है कि यह मार्केट आज जिस जगह पर बसी है वह कभी बंजर जमीन हुआ करती थी? नीचे लेख में जानें इस जगह का इतिहास।

बंजर जमीन पर बसी है कतरन मार्केट

मंगोलपुरी का वह इलाका जहां आज कतरन मार्केट शान से खड़ी है, कभी बंजर जमीन हुआ करती थी। दशकों पहले दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में छोटे दर्जी, कपड़ा व्यापारी और पटरी वाले अपनी रोजी-रोटी चलाया करते थे। जब प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, तो इन छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया।

ऐसे में सरकार और स्थानीय प्रशासन ने मंगोलपुरी की इस खुली और बंजर जमीन को इन विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास के लिए चुना। शुरुआत में यहां सिर्फ कुछ टिनशेड और फट्टियां लगाकर काम शुरू किया गया था।

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'कतरन मार्केट' नाम के पीछे की कहानी

दिल्ली की प्रसिद्ध कतरन मार्केट नाम के पीछे कपड़ों के बचे हुए टुकड़ों का एक दिलचस्प इतिहास जुड़ा हुआ है। आज से कई दशक पहले, जब दिल्ली में दर्जी कपड़ों की सिलाई किया करते थे, तो सिलाई के बाद जो छोटे-छोटे कपड़े के टुकड़े बच जाते थे, उन्हें कतरन कहा जाता था।

शुरुआती दौर में इन कतरनों को या तो बेकार समझकर फेंक दिया जाता था या बहुत ही कम कीमत पर बेच दिया जाता था। धीरे-धीरे कुछ स्थानीय व्यापारियों ने इन बचे हुए और रंग-बिरंगे टुकड़ों को इकट्ठा कर कम आय वाले लोगों और छोटे कारीगरों को बेचना शुरू कर दिया।

समय के साथ, जब इस खास जगह पर केवल इसी तरह के कपड़ों और छोटे कतरनों का व्यापार बड़े पैमाने पर होने लगा, तो लोगों ने इस जगह का नाम ही 'कतरन मार्केट' रख दिया।

छोटे टुकड़ों से ब्रांडेड फैब्रिक तक का सफर

समय के साथ कतरन मार्केट का स्वरूप भी पूरी तरह बदल चुका है। आज भले ही इसका नाम कतरन मार्केट है, लेकिन अब यहां सिर्फ छोटे टुकड़े ही नहीं बल्कि देश-विदेश के बेहतरीन और ब्रांडेड फैब्रिक भी थोक और खुदरा दामों पर मिलते हैं। यहां सिल्क, कॉटन, जॉर्जेट, शिफॉन, वेलवेट और ब्रोकेड जैसे तमाम कपड़े आसानी से मिल जाते हैं।

यहां बुटीक चलाने वाले लोग और फैशन डिजाइनिंग के छात्र अक्सर अपनी अनोखी और कम बजट की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसी बाजार का रुख करते हैं। यह बाजार आज हजारों लोगों के लिए आजीविका का एक बड़ा साधन बन चुका है।

दिल्ली की अर्थव्यवस्था में कतरन मार्केट का योगदा 

आज कतरन मार्केट सिर्फ कपड़ों की खरीदारी की जगह नहीं है बल्कि यह दिल्ली की उस जीती-जागती संस्कृति का प्रतीक है जो कम संसाधनों में भी अपनी एक अलग पहचान बनाना जानती है।

सिलाई के छोटे टुकड़ों से शुरू हुआ यह सफर आज एक बाजार का रूप ले चुका है, जो दिल्ली की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देता है। यहां आने वाले हर ग्राहक को सस्ते दामों पर वैरायटी मिल जाती है, जो इस बाजार की सबसे बड़ी खूबी है।

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यकीनन आप दिल्ली के कतरन मार्केट के इतिहास के बारे में जान गई होगी। मार्केट से जुड़ी ऐसी स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहे हरजिंदगी के साथ। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें।

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