दुबई एयरपोर्ट पर उतरने के पहले ही ऊपर से उसका जो नजारा दिखता है, वही उसकी शानो-शौकत का परिचय दे देता है। उतरते ही आपको इमिग्रेशन काउंटर पर बैठे अरबी पोशाक में सुसज्जित अधिकारी मिलते हैं। कंधे से टखनों तक लंबा सफेद चोगा, जिसे कंदूरा कहते हैं, सिर पर सफेद और लाल चारखानों वाला एक बड़ा स्कार्फ या गुतरा और उस पर एक दोहरी काली मोटी डोरी यानी अगाल होती है ताकि वह अपनी जगह स्थिर रहे। पारंपरिक वेशभूषा, लेकिन आधुनिकतम तकनीक का प्रदेश है दुबई! यह संयुक्त अरब अमीरात के सात अमीरात यानी प्रदेशों में से एक है।

एक युवती हमारी ओर बढ़ी और हमें टैक्सी की ओर ले गई। रात के डेढ़ बजे दुबई की शानदार सड़कों पर महिला टैक्सी ड्राइवर द्वारा फर्राटे से गाड़ी चलाते हुए हमें होटल तक ले जाना दुबई के बारे में बहुत कुछ बता गया। और हां, किराया वही था जो मीटर में आया। न कोई बहस, न बख्शीश, न टिप और न ही कोई नाइट चार्ज। हमें ड्रॉप करके वह सीधा निकल गई, लेकिन अपने व्यवहार से मानो कह गई- मुस्कुराइए, आप दुबई में हैं।

 

बुर्ज खलीफा की शान निराली

दुबई के प्रमुख आकर्षणों में पहला नाम आता है— बुर्ज खलीफा का। यह दुनिया की सबसे ऊंची मीनार है, इसलिए हमारी पहली मंजिल वही थी। दुबई की गर्मी में शायद ही कोई कमरे के एसी से बाहर निकलना चाहे, लेकिन दुबई तो दुबई ठहरी! होटल के नजदीकी मेट्रो स्टेशन से हम जिस ठंडे वातावरण में घुसे, पूरे समय उसी में रहे। स्टेशन से मॉल तक पूरी तरह वातानुकूलित वॉक-वे बना हुआ है, जिसकी पारदर्शी दीवारों के बीच से गुजरते हुए आप बाहर के नजारों का लुत्फ उठा सकते हैं, बिना उसकी गर्मी से परेशान हुए।

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स्टेशन से मॉल तक चलते-चलते आप थक न जाएं, इसलिए पूरे रास्ते ट्रैवलर लगे हुए हैं। बस खड़े हो जाइए और आगे बढ़ते रहिए। आखिरकार हम उसके प्रवेश द्वार तक पहुंच ही गए और अब हमें जाना था 124वीं मंजिल पर। लिफ्ट में चढ़ना कोई नई बात नहीं थी, लेकिन 124 मंजिलों का सफर सिर्फ साठ सेकंड में तय करना किसी अजूबे से कम नहीं 

 

सोने और मसाला बाजार में मिला बहुत कुछ

यदि कम समय में पूरे शहर का भ्रमण करना चाहते हों, तो सिटी टूर सबसे अच्छा विकल्प है। हमने यही किया और हमारा यह भ्रमण शुरू हुआ दुबई के पुराने हिस्से से जिसे बर दुबई कहते हैं। यह दुबई क्रीक के किनारे बसा हुआ है। यह क्रीक दुबई का व्यापार मार्ग था और आज भी है। जाहिर है कि पुराना बाजार भी इसी के पास है। बाजार को यहां 'सूक' कहा जाता है। मुख्य तौर पर दो सूक हैं- स्वर्ण सूक और मसाला सूक। आप खरीदारी करें या नहीं, लेकिन इन बाजारों में घूमना अत्यंत रोचक है।

मसाला बाजार या स्पाइस सूक में ढेरों मसाले तो दिखते ही हैं, साथ ही ढेर सारी सूखे हुए फूलों की बोरियां भी नजर आती हैं। पूछने पर पता चला कि ये फूल दरअसल चाय के लिए हैं। इन्हें गरम पानी में डालकर चाय की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद हम गोल्ड सूक गए। आपने चाहे सोने के कितने भी गहने देखे हों, पर दुबई के गोल्ड सूक के गहने नहीं देखे, तो कुछ नहीं देखा! एक से बढ़कर एक डिजाइन और सिर से पैर तक आपको ढक दें, ऐसे-ऐसे आभूषण वहां मौजूद थे। यहां सोने की कीमत भी भारत से कम है।

संस्कृति की झलक और आलीशान पाम जुमेरा

दुबई ऐसी जगह है, जहां मूल अरब निवासी कम और अन्य देशों से आए प्रवासी अधिक हैं। इनमें हिंदुस्तान और पाकिस्तान से आए लोगों की संख्या अच्छी-खासी है। लिहाजा बाजार में हिंदी खूब बोली जाती है। जो मूल रूप से हिंदी भाषी नहीं हैं, वे भी कामचलाऊ हिंदी बोल लेते हैं। अधिकतर लोग हिंदी, अंग्रेजी और अरबी तीनों भाषाओं में बात करते हैं।

पुरानी दुबई में जहां पुराने समय की मिठास है, वहीं नए हिस्से में अनगिनत आलीशान इमारतें और पूरी तरह से मानव निर्मित द्वीप 'पाम जुमेरा' है। पाम के वृक्ष के आकार में बने इस द्वीप पर आलीशान इमारतों के मध्य स्थित है दुबई का सबसे भव्य होटल अटलांटिस। इससे आगे बढ़ें तो बुर्ज अल अरब भी देख सकते हैं। इसके आसपास जहाज के आकार में बनी हुई खूबसूरत इमारतें हैं। यहाँ पास ही 'म्यूजियम ऑफ फ्यूचर' भी दिखाई देता है जो अपनी अनोखी बनावट से सबको हैरान करता है।

डेजर्ट सफारी और सांस्कृतिक की एक शाम

उजाड़ जगह समझे जाने वाले रेगिस्तान को गुलजार कैसे किया जाता है, यह देखना हो तो दुबई के डेजर्ट सफारी पर जाना जरूरी है। तय समय पर हमें लेने एक एसयूवी गाड़ी आई और हम चल पड़े सफारी पर। हमारे चालक थे सुलेमान। रेतीले मैदानों में प्रवेश करने के पहले गाड़ी के टायरों की हवा कम कर दी गई। 

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अब ड्यून बैशिंग का समय हो गया था। मैंने सुलेमान से पूछा, "हम सही-सलामत वापस तो पहुंच जाएंगे?" उन्होंने कहा, "इंशा अल्लाह!" कई जगहों पर सामने की ढलान और गाड़ी की तेज चाल देखकर ऐसा डर लगता कि आंखें अपने आप बंद हो जाती थीं। रेत के टीले पर चढ़ाई करती हमारी गाड़ी ऐसी चोटी पर पहुंच जाती जहां से नीचे कुछ भी नहीं दिख रहा होता था। पर गाड़ी धड़ल्ले से ढलान पर सरसराती हुई उतर जाती और हम कलेजा थामे रह जाते। जो भी हो, हम पूरी तरह सही-सलामत लौटे।

इसके बाद बारी थी खाने-पीने और नाच-गाने की। बीच में मंच था और चारों ओर दर्शक बैठे थे। सबसे पहले बेली डांस शुरू हुआ। नृत्यांगना ने कभी सिर पर तलवार टिकाकर तो कभी कमर के संतुलन से बेहतरीन नृत्य किया। इसके बाद एक नर्तक ने घूमर के अंदाज में चक्कर लगाते हुए तरह-तरह के करतब दिखाए। अंत में आग के खेल का प्रदर्शन हुआ, जिसमें कलाकार अपने मुंह से आग उगलता नजर आया। हम इस मायाजाल में डूबे ही रहते, अगर सुलेमान ने हमें वापस चलने का इशारा नहीं किया होता।

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Images: magnific