भारत के मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ के लिए ही नहीं हैं। यहां जाने पर भगवान के दर्शन के साथ प्रसाद भी मिलता है, जिसे लोग श्रद्धा से ग्रहण करते हैं। कई मंदिरों का प्रसाद तो इतना खास होता है कि उसकी अपनी एक अलग पहचान बन चुकी है। कहीं गरमा-गरम कड़ा प्रसाद मिलता है, तो कहीं ऐसा लड्डू मिलता है, जिसे लोग घर लेकर आते हैं। कुछ जगहों पर प्रसाद के रूप में मीठे पकवान मिलते हैं, तो कुछ मंदिरों में पूरा भोजन ही प्रसाद का हिस्सा होता है।
खास बात तो यह है कि इन प्रसादों का स्वाद भी मंदिर की पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है। अगर आपको धार्मिक जगहों के साथ वहां के खास खाने के बारे में जानना अच्छा लगता है, तो देश के इन मंदिरों के प्रसाद के बारे में जरूर जानें। साथ ही जब आप यहां जाएं, तो यह प्रसाद ग्रहण जरूर करें।
जगन्नाथ मंदिर, पुरी- महाप्रसाद
ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद देशभर में काफी फेमस है। मंदिर की रसोई में चावल, दाल, सब्जियां, खिचड़ी, करी और कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं। इन सभी चीजों को मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी जबरदस्त होता है। यहां के महाप्रसाद को अभड़ा भी कहा जाता है।
तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुपति- श्रीवारी लड्डू
आंध्र प्रदेश के तिरुमला में स्थित वेंकटेश्वर मंदिर का लड्डू भी देश के सबसे मशहूर मंदिर प्रसादों में से एक है। इसे बेसन, चीनी, घी, काजू और किशमिश जैसी चीजों से तैयार किया जाता है। आपको बता दें कि तिरुपति लड्डू को GI टैग भी मिला हुआ है। जो भी भक्त यहां दर्शन करने के लिए आते हैं, वो भक्त इसे प्रसाद के तौर पर अपने साथ लेकर जरूर जाते हैं।
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पलानी मुरुगन मंदिर, तमिलनाडु- पंचामृतम
तमिलनाडु में तो ढेरों मंदिर हैं। ऐसे में यहां के पलानी मुरुगन मंदिर में मिलने वाला पंचामृतम भी लोगों को खूब पसंद आता है। इसे केले, गुड़, शहद, खजूर, किशमिश और इलायची से बनाया जाता है। इसमें अलग से चीनी नहीं डाली जाती। इस प्रसाद को भी GI टैग मिला हुआ है।
स्वर्ण मंदिर, अमृतसर- कड़ा प्रसाद
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में मिलने वाला कड़ा प्रसाद ताे पूरी दुनिया में फेमस है। इसे गेहूं के आटे, घी और चीनी से बनाकर तैयार किया जाता है। यह गर्म, नरम और बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट होता है। यहां कड़ा प्रसाद सभी लोगों को समान रूप से दिया जाता है।
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अंबलप्पुझा श्री कृष्ण मंदिर, केरल- पालपायसम
केरल में जो अंबलप्पुझा श्री कृष्ण मंदिर है, वहां पर प्रसाद के रूप में पालपायसम दिया जाता है। इसे दूध, चावल और चीनी से बनाया जाता है। धीरे-धीरे पकने पर ही इसका स्वाद काफी गाढ़ा और अच्छा हो जाता है। मंदिर की पुरानी परंपराओं से जुड़ा यह प्रसाद केरल में काफी मशहूर है।
सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई- मोदक
आपको बता दें कि मुंबई का फेमस सिद्धिविनायक मंदिर लोगों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाया जाता है। मोदक में नारियल और गुड़ की फिलिंग होती है।
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मीनाक्षी अम्मन मंदिर, मदुरै- सक्करै पोंगल
तमिलनाडु के मदुरै में जो मीनाक्षी अम्मन मंदिर है, वहां पर सक्करै पोंगल प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इसे चावल, गुड़, घी, काजू और इलायची से बनाया जाता है। इसका स्वाद बहुत ही मीठा होता है। धार्मिक मौकों पर इसे भोग के तौर पर तैयार किया जाता है।
गुरुवायुर मंदिर, केरल- पालपायसम
केरल के गुरुवायुर मंदिर का पालपायसम भी भक्तों को खूब पसंद आता है। इसे दूध और चावल से बनाया जाता है, जिसका टेक्सचर काफी क्रीमी होता है। इसे काफी देर तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। खास पूजा के दौरान कई भक्त इसके लिए पहले से बुकिंग भी कराते हैं।
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श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा- मथाड़ी
राजस्थान के नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथजी मंदिर भी भक्तों के बीच काफी पॉपुलर है। यहां का प्रसाद भी बहुत खास होता है। बताया जाता है कि यहां भगवान को कई तरह के भोग लगाए जाते हैं। इन्हीं में मथाड़ी भी शामिल है। यह कुरकुरी तली हुई पेस्ट्री जैसी मिठाई होती है, जिसे चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है।
वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू- ड्राई फ्रूट्स और हलवा
माता वैष्णो देवी के दर्शन करने तो हम सभी जाते हैं। इस मंदिर की यात्रा पूरी करने के बाद भक्तों को प्रसाद के रूप में ड्राई फ्रूट्स और मिश्री दी जाती है। कुछ मौकों पर हलवा भी प्रसाद में दिया जाता है, जिसका स्वाद आपको और कहीं नहीं मिलेगा।
काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी- प्रसाद
वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर तो भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। इसकी गिनती भगवान शिव के प्रमुख मंदिरों में होती है। यहां दर्शन के साथ भक्त प्रसाद भी लेते हैं। मंदिर और आसपास के धार्मिक बाजारों में अलग-अलग तरह के प्रसाद मिलते हैं, जिन्हें लोग भगवान को चढ़ाने और घर ले जाने के लिए खरीदते हैं। हालांकि काशी विश्वनाथ मंदिर का कोई एक खास पकवान तिरुपति लड्डू या स्वर्ण मंदिर के कड़ा प्रसाद जैसी पहचान नहीं रखता है।
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