नवरात्रि में देश के कई शहरों में रामलीला का आयोजन होता है। कहीं बड़े मैदान में रामायण के प्रसंग दिखाए जाते हैं, तो कहीं कलाकार राम, सीता, लक्ष्मण और रावण का किरदार निभाकर लोगों को कहानी दिखाते हैं। दशहरे पर रावण दहन के साथ इस आयोजन का खासतौर पर समापन होता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि रामलीला देखने के लिए सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी लोग जुटते हैं?
भारत के अलावा और किन-किन देशों में होती है रामलीला?
दरअसल, भारत के अलावा इंडोनेशिया, थाईलैंड और गयाना जैसे कई देशों में रामायण की कहानी वहां की अपनी भाषा, संगीत, नृत्य और पहनावे के साथ पेश की जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं उन देशों के बारे में, जहां आज भी रामायण और रामलीला की खास पहचान है।
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1. इंडोनेशिया
इंडोनेशिया में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, लेकिन यहां रामलीला जरूर होती है। यहां भगवान राम की कहानी दिखाई जाती है।
- कहां देखने को मिलती है रामलीला: जावा और बाली जैसे इलाकों में रामायण पर आधारित नृत्य और नाटक पेश किए जाते हैं।
- क्या है खास: कलाकार पारंपरिक कपड़े पहनकर संगीत, नृत्य और अभिनय के जरिए रामायण के अलग-अलग प्रसंग दिखाते हैं।
- क्यों है खास पहचान: यहां रामायण सदियों से कला और संस्कृति का हिस्सा रही है।
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2. थाईलैंड
थाईलैंड में भी रामायण की कहानी काफी पॉपुलर है। यहां इसे रामकियन कहा जाता है। हालांकि, यहां रामायण के किरदारों को पेश करने का तरीका भारतीय रामलीला से थोड़ा अलग है।
- क्या है खास: यहां खोन नाम की पारंपरिक नृत्य शैली में रामायण के प्रसंग दिखाए जाते हैं।
- कलाकारों का अंदाज: कलाकार खास तरह के मुखौटे और रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं।
- क्या देखने को मिलता है: नृत्य, संगीत और चेहरे के एक्सप्रेशन के जरिए कहानी दिखाई जाती है।
3. कंबोडिया
कंबोडिया में रामायण की कहानी को रीमकेर के नाम से जाना जाता है। यहां पुराने मंदिरों की दीवारों पर भी रामायण से जुड़े कई प्रसंग देखने को मिलते हैं। यहां कहानी को पेश करने का तरीका अपने आप में खास है।
- क्या है खास: रामायण की कहानी को पारंपरिक नृत्य और नाटक के जरिए दिखाया जाता है।
- कलाकारों का पहनावा: कलाकार सुंदर कपड़े, सिर पर खास सजावट और पारंपरिक गहने पहनते हैं।
- कहां दिखती है झलक: कंबोडिया के पुराने मंदिरों की नक्काशी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रामायण के प्रसंग देखने को मिलते हैं।
4. त्रिनिदाद और टोबैगो
कैरेबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो में भी रामलीला का आयोजन बड़े लेवल पर किया जाता है। यहां रामलीला पहुंचने की कहानी भारत से जुड़ी है। बताया जाता है कि 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान कई भारतीय मजदूरों को काम करने के लिए कैरेबियाई देशों में ले जाया गया था। वे अपने साथ अपनी भाषा, रीति-रिवाज और धार्मिक परंपराएं भी लेकर गए।
- कैसे पहुंची रामलीला: भारतीय समुदाय के लोगों ने यहां रामायण की कहानी और रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाया।
- कैसे होता है आयोजन: खुले मैदानों में कलाकार रामायण के प्रसंगों का मंचन करते हैं।
यहां रामलीला के दौरान बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। कई जगहों पर यह आयोजन कई दिनों तक चलता है।
5. गयाना
गयाना में भी रामलीला की परंपरा भारतीय समुदाय के साथ पहुंची थी। यहां भारतीय लोगों की अच्छी-खासी आबादी है। रामायण और रामलीला के जरिए यहां के लोग अपने कल्चर को अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं।
- कहां होती है रामलीला: कई इलाकों में खुले मैदानों और सामुदायिक जगहों पर रामलीला का मंचन किया जाता है।
- क्या है खास: कलाकार रामायण के अलग-अलग किरदार निभाते हैं और दर्शक पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम देखते हैं।
- कब होता है आयोजन: रामलीला का आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक मौकों पर किया जाता है। इसकी तारीख और कार्यक्रम जगह के हिसाब से अलग होती है।
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