उत्तराखंड का नैनीताल एक बहुत ही खूबसूरत डेस्टिनेशन है। इसे सिटी ऑफ लेक्स भी कहा जाता है। यह शहर अपनी खूबसूरत झीलों, पहाड़ों और हरियाली के लिए जाना जाता है, लेकिन यहीं पर एक ऐसी झील भी है जिसकी कहानी काफी दिलचस्प लगती है। यह कोई और लेक नहीं बल्कि परी ताल है। इसका नाम सुनते ही सबसे पहले मन में यही ख्याल आता है कि आखिर इस लेक का नाम परी ताल क्यों पड़ा? क्या सच में यहां परियां आती हैं?
क्या है परी ताल की दिलचस्प कहानी?
दरअसल, इस जगह को लेकर कई सालों से एक दिलचस्प कहानी सुनने को मिलती है। कहा जाता है कि पूर्णिमा की रात यहां परियां स्नान करने आती हैं। आज का हमारा लेख भी इसी विषय पर है। हम आपको परी ताल से जुड़ी दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं-
नैनीताल से कितनी दूर है परी ताल?
आपको बता दें कि परी ताल नैनीताल के पास चाफी गांव की तरफ है। चाफी गांव नैनीताल से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर है और यहां से परी ताल तक जाने के लिए आपको करीब 3 से 4 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ सकता है। यह रास्ता आम घूमने वाली जगहों जैसा नहीं है। रास्ते में आपको पत्थर, चट्टानें और जंगल का इलाका भी मिलेगा। कुछ जगहों पर नदी को पार करके आगे बढ़ना पड़ता है। इसलिए परी ताल तक पहुंचना अपने आप में एक एडवेंचर है।
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क्या सच में परी ताल यहां आती हैं परियां?
अब आते हैं इस जगह के सबसे बड़े सवाल पर। लोगों का कहना है कि पूर्णिमा की रात यहां परी ताल में देव परियां स्नान करने के लिए आती हैं। इसी मान्यता से इस ताल का नाम परी ताल पड़ा। जो भी वहां घूमने जाता है, उसे भी लोग इसी तरह की कहानी बताते हैं। मुझे खुद यही किस्सा सुनने को मिला था। कुछ लोग तो ऐसा भी कहते हैं कि उन्होंने ताल से परियों को निकलते हुए भी देखा है। हालांकि, यह सिर्फ मान्यता है। इनके सच होने की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
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पूर्णिमा पर लोग क्यों नहीं जाते परी ताल?
ऐसा भी कहा जाता है कि पूर्णिमा के समय लोग यहां परी ताल जाने और ताल में डुबकी लगाने से भी बचते हैं। इसकी वजह ताल की गहराई और परियों का रहस्य भी है। वैसे भी ताल तक जाने वाला रास्ता आसान नहीं है। इसलिए अगर कोई यहां घूमने जाता भी है तो वो पानी में उतरने के बजाय नेचर व्यू देखकर ही लौट जाता है।
ताल की गहराई भी बनी हुई है रहस्य
परी ताल का रहस्य इसकी गहराई से भी जुड़ा हुआ है। कहते हैं कि इसकी सही गहराई का आज तक पता नहीं चल पाया है। यही वजह है कि परी ताल को सिर्फ खूबसूरत जगह नहीं बल्कि एक रहस्यमयी जगह भी माना जाता है। इसके आसपास काली चट्टानें भी दिखाई देती हैं। यहां के लोग इसे शिलाजीत वाली चट्टानें मानते हैं।
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यहां की खूबसूरती भी है खास
परी ताल की पहचान सिर्फ इससे जुड़ी कहानियों की वजह से नहीं है। यह जगह पहाड़ों, जंगल और शांत माहौल में है। ताल के पास झरना भी है, जिससे आसपास का नजारा और खूबसूरत नजर आने लगता है। कुल मिलाकर यहां आपको नैनीताल जैसी भीड़ नहीं देखने को मिलेगी।
परी ताल जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप परी ताल जाने का सोच रही हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जैसे-
- परी ताल तक पहुंचने के लिए चाफी गांव से पैदल जाना पड़ता है।
- रास्ता पत्थरों और चट्टानों वाला है, इसलिए अच्छी ग्रिप वाले शूज पहनकर ही जाएं।
- ताल के पानी में उतरने से बचें।
- बारिश के समय रास्ता फिसलन भरा हो सकता है, इसलिए ज्यादा सावधानी रखें।
- पूर्णिमा की रात यहां जाने से लोग बचते हैं।
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