अक्सर हम यात्रा के लिए पहले से फ्लाइट टिकट बुक कर लेते हैं, लेकिन अचानक प्लान बदल जाने के कारण खुद सफर नहीं कर पाते। ऐसे में मन में यह सवाल आता है कि क्या हम अपना बुक किया हुआ फ्लाइट टिकट परिवार के किसी सदस्य या दोस्त के नाम पर ट्रांसफर कर सकते हैं? बता दें कि दुनिया भर के एविएशन नियमों और भारतीय विमानन नियामक (DGCA) के सुरक्षा प्रावधानों के तहत फ्लाइट टिकट पूरी तरह से नॉन-ट्रांसफरएबल होते हैं। इसका मतलब है कि जिस व्यक्ति के नाम पर टिकट बुक किया गया है, यात्रा उसी को करनी होगी। चलिए नीचे लेख में जानें इसके पीछे का कारण और नियम।

फ्लाइट टिकट दूसरे सदस्य को ट्रांसफर क्यों नहीं किया जा सकता है?

एयरलाइंस कंपनियों और एयरपोर्ट अथॉरिटी जैसे भारत में BCAS के कड़े नियम हैं कि विमान में यात्रा करने वाले यात्री की पहचान और उसका टिकट सौ फीसदी मेल खाना चाहिए। जानें इसके पीछे मुख्य कारण-

  • विमानन सुरक्षा के लिहाज से पैसेंजर मैनिफेस्ट (पैसेंजर की लिस्ट) का सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के पास पहले से मिलान होना अनिवार्य होता है। बिना पहचान की पुष्टि के किसी और की जगह दूसरे को सफर करने देना सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
  • अगर टिकटों के ट्रांसफर की खुली छूट दे दी जाए, तो लोग सस्ते दाम में टिकट बुक करके उन्हें महंगे दामों पर बेचना शुरू कर देंगे, जिससे बाजार में अनियंत्रित रीसेल मार्केट खड़ा हो सकता है।

फ्लाइट टिकट पर नाम करेक्ट कराने की होती है अनुमति

अगर आपको ऐसा लगता है कि आप नाम करेक्ट कराकर टिकट को किसी और को ट्रांसफर कर सकते हैं, तो बता दें कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अगर टिकट में स्पेलिंग की कोई छोटी-मोटी गलती हो गई है (जैसे 2 से 3 अक्षरों का अंतर), तो एयरलाइंस इसे सुधारने की अनुमति देती हैं। भारत के विमानन नियमों के अनुसार, कई एयरलाइंस बुकिंग के शुरुआती घंटों में या मामूली शुल्क के साथ स्पेलिंग ठीक कर देती हैं।

उदाहरण के लिए समझा दें कि राहुल की जगह अमित को टिकट देना यह नाम ट्रांसफर के अंतर्गत आता है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भी मुख्य एयरलाइन पूरी तरह से एक व्यक्ति के नाम का टिकट दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं देती है।

अगर आप यात्रा नहीं कर सकते, तो आपके पास क्या विकल्प हैं?

अगर आप खुद सफर नहीं कर पा रहे हैं और टिकट किसी और को भी नहीं दे सकते, तो नुकसान से बचने के लिए इन तरीकों को आजमा सकते हैं।

अगर आपका प्लान अचानक कैसिंल हो गया है, तो आप समय रहते टिकट रद्द करवा सकते हैं। एयरलाइन के नियमों के अनुसार कैंसिलेशन चार्ज काटकर बचा हुआ रिफंड या एयरपोर्ट टैक्स जैसे यूडीएफ या पीएसएफ वापस मिल जाता है।

कई एयरलाइंस रिफंड देने के बजाय टिकट की राशि को आपके नाम पर 'क्रेडिट शेल' में सुरक्षित रख लेती हैं, जिसका इस्तेमाल आप आने वाले कुछ महीनों के भीतर अपनी अगली यात्रा के लिए कर सकते हैं।

इस लेख में दी गई जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA India - Directorate General of Civil Aviation) की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित एयरलाइन (जैसे इंडिगो, एयर इंडिया आदि) के फेयर रूल्स (Fare Rules) सेक्शन से ली गई है। यहां पर क्लियर लिखा है कि सभी कमर्शियल फ्लाइट टिकट नॉन-ट्रांसफरएबल होते हैं।

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 Image Credit- magnific (all images)