Histoy Of Bhindi: हम से अधिकतर लोगों को भिंडी की सब्जी पसंद होती है। इतना ही नहीं बल्कि वह बड़े चाव से इसे रोटी, पराठा और चावल के साथ खाते हैं, लेकिन कोई अगर यह कहे कि जिस सब्जी को हम मजे से खाते हैं वह जंगली और जानवरों की खुराक के लिए उगाया गया था। हो सकता है कि आप इस पर बहस या फिर अजीब तरह से शक्ल बनाने लग जाएं। मगर यह सच है।
बता दें कि अफ्रीका के जंगलों में जंगली घास की तरह उगने वाली भिंडी को जानवर और पक्षी ही खाते थे। इंसान तो इसे घास-फूस समझकर दूर ही रहते थे। नीचे जानिए भिंडी के इतिहास और किचन तक पहुंचने के सफर के बारे में।
अफ्रीका के जंगलों से जुड़ा है भिंडी का इतिहास
शुरुआती दौर में भिंडी का इंसानों की थाली से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। यह अफ्रीका, खासतौर पर इथियोपिया और पश्चिम अफ्रीका के घने जंगलों में एक जंगली पौधे के रूप में उगती थी। तब इसे कोई उम्दा सब्जी नहीं, बल्कि एक साधारण घास-फूस या पशुओं का चारा माना जाता था।
जंगली जानवर और पक्षी ही इसके बीजों और पौधों को खाते थे। शुरुआती इंसानों ने लंबे समय तक इसे नजरअंदाज किया, क्योंकि तब तक इसके पोषक तत्वों और खाने योग्य गुणों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी।
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मिस्र के लोगों ने शुरू की थी भिंडी की खेती
वक्त बदला और प्राचीन मिस्र के लोगों ने इस जंगली पौधे पर ध्यान दिया। उन्होंने पाया कि यह पौधा कड़े सूखे और गर्मी में भी आसानी से जिंदा रह सकता है। मिस्र के किसानों ने इसके बीजों को इकट्ठा कर के इनकी खेती करना शुरू किया। वे इसके बीजों को भूनकर एक तरह का पेय भी बनाते थे, जो कॉफी जैसा स्वाद देता था।
धीरे-धीरे लोगों को समझ आया कि यह पौधा सिर्फ जानवरों के लिए नहीं बल्कि इंसानों के पेट भरने और सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद हो सकता है। यहीं से भिंडी के जंगली पौधे से किचन की तरफ बढ़ने का सफर शुरू हुआ।
लाल सागर पार कर दुनिया भर में फैली भिंडी
मिस्र से निकलकर भिंडी ने मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका के देशों का सफर तय किया। 12वीं और 13वीं सदी तक अरबी व्यापारियों के जरिए यह भूमध्यसागरीय इलाकों और भारत तक पहुंच गई। इसके बाद व्यापारियों और उपनिवेशवाद के दौर में यह अमेरिका और यूरोप के देशों में भी फैल गई।
अंग्रेजों और फ्रांसीसी लोगों ने इसे अलग-अलग देशों में पहुंचाया। शुरुआत में यूरोप के कई देशों में लोग इसे अजीब और चिपचिपी सब्जी समझकर पसंद नहीं करते थे, लेकिन इसके औषधीय गुणों के चलते धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया के बाजारों में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गई।
भारतीय किचन में कैसे पहुंची?
भिंडी के इतिहास के बारे में हम जब पढ़ते हैं कि यह जंगली पौधा है, तो मन में सवाल आता है कि फिर यह भारतीय किचन की जान कैसे बन गया? बता दें कि भिंडी भारत पहुंची, तो यहां की उपजाऊ मिट्टी में तेजी से ग्रो करने लगी।
इसके बाद भारतीय रसोइयों ने इस विदेशी सब्जी को अपने मसालों के साथ पकाना शुरू किया। इसके बाद इसका स्वाद लोगों को इतना पसंद आया है कि यह धीरे-धीरे हर घर में बनने लगी। आज शायद ही कोई ऐसा भारतीय घर होगा जहां हफ्ते में कम से कम एक बार भिंडी न बनती हो। चाहे बात कुरकुरी भिंडी की हो, भरवां भिंडी की या फिर ग्रेवी वाली सब्जी की, हर रूप में इसे पसंद किया जाता है।
सेहत का खजाना और ग्लोबल सुपरफूड
भिंडी का स्वाद ही नहीं बल्कि यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन C, K और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो पाचन को सुधारने और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। अफ्रीका के जंगलों से शुरू हुआ इस पौधे का सफर आज दुनिया के लोकप्रिय सुपरफूड्स में शुमार हो चुका है।
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अब आप समझ गई होंगी कि आखिर जंगली भिंडी का पौधा आज लोगों की थाली का अहम हिस्सा कैसे बन गया? सब्जियों के इतिहास से जुड़े हैरान करने वाले तथ्यों के बारे में पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ। अगर आपको यह लेख पसंद आया है, तो इसे शेयर करें।
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