बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक कुकू कोहली 77 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। 1991 में आई सुपरहिट फिल्म 'फूल और कांटे' का निर्देशन करने वाले कुकू कोहली ने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके जाने से जहां हिंदी सिनेमा ने एक कुशल फिल्ममेकर खो दिया है, वहीं उनके निधन के बाद अभिनेत्री अरुणा ईरानी के साथ उनके निजी संबंधों की चर्चाएं एक बार फिर गरम हो गई हैं। दोनों का रिश्ता कई दशकों तक दुनिया की नजरों से दूर रहा था।
शूटिंग के सेट से हुई थी प्यार की शुरुआत
अरुणा ईरानी और कुकू कोहली का विवाह 1990 में हुआ था। उस समय अरुणा की उम्र 40 वर्ष थी। दोनों की पहली मुलाकात एक फिल्म के दौरान हुई थी, जहां शुरुआत में उनके बीच काफी बहस और तकरार हुआ करती थी।
एक मीडिया हाऊस को अरुणा ईरानी ने बताया था कि जब वे दोनों साथ काम कर रहे थे, तब शूटिंग शुरू होने में अक्सर देरी होती थी, जिससे वे काफी चिढ़ जाती थीं। धीरे-धीरे कुकू कोहली उन्हें समझाने लगे और यही नोक-झोंक वक्त के साथ गहरे लगाव और प्यार में तब्दील हो गई।
शादी को क्यों सबसे छुपाया गया?
अरुणा ईरानी ने काफी समय बाद एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने अपनी शादी की खबर को समाज से छुपाकर क्यों रखा था। जब दोनों करीब आए, तब कुकू कोहली पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। अरुणा नहीं चाहती थीं कि उनकी वजह से कुकू कोहली के पहले परिवार में कोई स्ट्रेस पैदा हो।
यह भी पढ़ें- KSBKBT 2: तुलसी का सालों से दबाया राज आएगा सामने, तृप्ति उठाएगी पार्थ की मौत के सच से पर्दा
शुरुआत में अरुणा को इस बात की जानकारी नहीं थी कि कुकू पहले से शादीशुदा हैं। सच्चाई जानने के बावजूद वे उनसे अलग नहीं हो सकीं और दोनों ने एक-दूसरे का साथ निभाने का फैसला किया। अरुणा ने ये भी साफ किया था कि जब तक कुकू कोहली की पहली पत्नी जिंदा थीं, उन्होंने कभी अपने रिश्ते को पब्लिक नहीं किया। उनके निधन के बाद ही उन्होंने इस बारे में खुलकर बात की।
बच्चे न पैदा करने का फैसला
कुकू कोहली के पहले से शादीशुदा होने और परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए अरुणा ईरानी ने जीवन में कभी मां न बनने का निर्णय लिया था। अरुणा के एक डॉक्टर दोस्त ने उन्हें समझाया था कि ज्यादा उम्र में मां बनने से बच्चों के साथ विचारों का अंतर बहुत बढ़ सकता है। आज के समय में अरुणा अपने इस फैसले को बिल्कुल सही मानती हैं। वे मानती हैं कि कुकू कोहली के साथ उनका साथीपन ही उनके जीवन के लिए पर्याप्त था।
हिंदी सिनेमा में कुकू कोहली का क्या योगदान रहा?
कुकू कोहली केवल अपनी पर्सनल जिंदगी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा में अपने शानदार काम के लिए भी याद किए जाएंगे।
- अजय देवगन का डेब्यू: उन्होंने फिल्म 'फूल और कांटे' के जरिए अजय देवगन को बॉलीवुड में लॉन्च किया, जो एक ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
- यादगार फिल्में: उन्होंने हकीकत, ज़ुल्मी, अनाड़ी नं. 1 और ये दिल आशिकाना जैसी कई सफल और फेमस फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी अंतिम निर्देशित फिल्म 2004 में आई 'वो तेरा नाम था' थी।
यह भी पढ़ें- क्या आमिर खान की वजह से अटकी Batwara 1947 की OTT रिलीज? एक गलती ने कराया 60 करोड़ का नुकसान
निष्कर्ष
कुकू कोहली का निधन बॉलीवुड इंडस्ट्री के लिए किसी क्षति से कम नहीं है। उन्होंने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्में दीं और नए कलाकारों को मौका दिया। वहीं, अरुणा ईरानी के साथ उनका रिश्ता बेहद संवेदनशील रहा। तमाम सामाजिक बंदिशों के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे का साथ निभाया। आज भले ही कुकू कोहली हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन सिनेमा में उनका योगदान हमेशा याद रखी जाएगी।
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Images: instagram
