बॉलीवुड सिनेमा में जब भी पर्दे वा मां के सबसे यादगार किरदारों की बात होती है तो लीला चिटनिस (Leela Chitnis) का नाम जरूर लिया जाता है। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में ऐसी मां का रोल निभाया, जो अपने बच्चों के लिए हर मुश्किलें सह लेती थीं। दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद जैसे कई कलाकारों की मां बनकर उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी।
हालांकि, ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि पर्दे पर दिखाई देने वाली उनकी ममता और दर्द सिर्फ एक्टिंग नहीं थी। असल जिंदगी में भी उन्होंने ऐसे संघर्ष देखे थे। एक समय ऐसा भी था जब चार बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी और आर्थिक हालात बेहद खराब थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दम पर एक नई पहचान बनाई। आइए जानते हैं हिंदी सिनेमा की इस दिग्गज अभिनेत्री की कहानी।
पढ़ाई-लिखाई वाले परिवार में हुआ था जन्म
लीला चिटनिस का जन्म 9 सितंबर 1909 को एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर थे। उनके घर में शुरू से पढ़ाई का माहौल था। ऐसे में उस दौर में लीला चिटनिस ने बीए की डिग्री ली। वो हिंदी सिनेमा की शुरुआती पढ़ी-लिखी अभिनेत्रियों में से एक थी।
कम उम्र में हो गई थी शादी
लीला की शादी बहुत कम उम्र में डॉ. गजानन यशवंत चिटनिस से हो गई थी। शादी के बाद उनके चार बेटे हुए। शुरुआत में जिंदगी में सब नॉर्मल रहा, लेकिन धीरे-धीरे परेशानियां बढ़ने लगीं। बाद में वह अपने पति से अलग हो गईं। उस समय समाज में तलाक या अलग रहने वाली महिलाओं को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता था। ऐसे माहौल में चार बच्चों के साथ अकेले जीवन शुरू करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।
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बच्चों की परवरिश के लिए किया संघर्ष
पति से अलग होने के बाद लीला चिटनिस पर चारों बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। परिवार चलाने और बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्होंने नौकरी की। उन्होंने कुछ समय तक पढ़ाने का काम भी किया, लेकिन उन पैसों से घर चलाना आसान नहीं था। बच्चों की पढ़ाई, खान-पान और रोजाना की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें एक्स्ट्रा कमाई की जरूरत थी। इसी दौरान उन्होंने थिएटर से जुड़ना शुरू किया और बाद में फिल्मों में काम करने का फैसला लिया।
आसान नहीं था फिल्मी सफर
आज भले ही लीला चिटनिस को हिंदी सिनेमा की बड़ी अभिनेत्री के रूप में याद किया जाता है, लेकिन शुरुआती दिनों में उनका सफर आसान नहीं था। जागरण में छपी एक खबर के मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उन्हें छोटे-मोटे रोल मिले। कई फिल्मों में उन्होंने एक्स्ट्रा कलाकार के तौर पर भी काम किया।
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'कंगन' ने बदल दी किस्मत
उनके करियर का बड़ा मोड़ फिल्म कंगन साबित हुई। इस फिल्म की सफलता के बाद वो हिंदी सिनेमा की टॉप अभिनेत्रियों की लिस्ट में शामिल हो गईं। उनकी जोड़ी अभिनेता अशोक कुमार (Ashok Kumar) के साथ काफी पसंद की गई। धीरे-धीरे उनकी पॉपुलैरिटी बढ़ती गई और उन्हें कई बड़ी फिल्मों में काम मिला।
मां के रोल से मिली पहचान
समय के साथ फिल्म इंडस्ट्री में नई एक्ट्रेसेस भी आने लगीं। ऐसे में लीला चिटनिस ने मां के किरदार निभाने शुरू कर दिए। फिल्म शहीद में उन्होंने मां का रोल प्ले किया, जिसे खूब पसंद किया गया। इसके बाद उन्होंने आवारा, मां, काला बाजार और गाइड जैसी फिल्मों में भूमिकाएं निभाईं। दर्शकों को उनके चेहरे पर एक सच्ची मां का दर्द और प्यार दिखाई देता था।
निर्देशक भी थीं एक्ट्रेस
बहुत कम लोग जानते हैं कि लीला चिटनिस ने एक्टिव के अलावा डायरेक्टशन और प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया था। उन्होंने फिल्म आज की बात का निर्देशन किया था। हालांकि यह फिल्म ज्यादा चली नहीं थी, जिसके बाद उन्होंने फिर एक्टिंग पर ध्यान दिया।
आखिरी सालों में चली गईं अमेरिका
करीब पांच दशकों तक हिंदी सिनेमा में काम करने के बाद रहने के बाद लीला चिटनिस फिल्मों से दूर हो गईं। बाद में वो अपने बेटे के पास अमेरिका चली गईं और वहीं रहने लगीं। उन्होंने अपनी लाइफ के आखिरी पल शांत माहौल में बिताए थे। साल 2003 में 93 सारल की उम्र में उनका निधन हो गया।
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