Sat Sep 12, 2026 | Updated 05:43 AM IST

'पंचायत और 'गुल्ल्क जैसी सीरीज ने बदला ट्रेंड, ओटीटी पर भी पसंद किए जाने लगे हैं फैमिली शोज

एक वक्त तक ओटीटी पर सस्पेंस, थ्रिलर या बोल्ड शोज की भरमार रहती थी। शायद इसके पीछे सोच थी कि ओटीटी देखने वाले यूथ को इसी तरह की कहानियां पसंद आती हैं। हालांकि, अब  ट्रेंड बदलता हुआ नजर आ रहा है। पारिवारिक रिश्तों के इर्द-गिर्द बुनी कहानियां जैसे गुल्लक और पंचायत लोगों को पसंद आ रही हैं और इसी के साथ अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एंटरटेंमेंट का ट्रेंड बदल रहा है।
Updated:- 2026-05-25, 18:00 IST
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Sakhi

एक वक्त तक ओटीटी पर सस्पेंस, थ्रिलर या बोल्ड शोज की भरमार रहती थी। शायद इसके पीछे सोच थी कि ओटीटी की टारगेट ऑडियंस यूथ है और उन्हें इसी तरह की कहानियां पसंद आती हैं। यही वजह है कि ओटीटी के किसी भी प्लेटफॉर्म पर फैमिली शोज नजर नहीं आते थे। यहां तक कि अगर किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर किसी लव स्टोरी की शुरुआत भी की जाती थी, तो उसमें इंटिमेट सीन्स की भरमार रहती थी और सॉफ्ट रोमांस या फैमिली बेस्ड शोज नहीं मिल पाते थे। आज भी काफी मेकर्स ओटीटी पर ऐसी कहानियां उतारने में कतराते हैं। हालांकि, अब ट्रेंड काफी हद तक बदलता हुआ नजर आ रहा है। पारिवारिक रिश्तों के इर्द-गिर्द बुनी कहानियां जैसे गुल्लक और पंचायत लोगों को पसंद आ रही हैं और इसी के साथ अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एंटरटेंमेंट का ट्रेंड बदल रहा है। चलिए इस नए ट्रेंड को समझने की कोशिश करते हैं।

ओटीटी पर क्यों नजर नहीं आती थीं पारिवारिक कहानियां?

एक वक्त तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने वाले शोज, वेब सीरीज या फिल्मों का टारगेट ऑडियंस महानगरों में रहने वाले युवाओं को समझा जाता था। पहले जहां परिवार के साथ बैठकर टीवी देखने की परंपरा थी, वहीं आज के दौर में हर व्यक्ति के लिए अपना स्क्रीन मौजूद है। जहां केवल अकेले रहने वाले युवा ही नहीं, बल्कि एक ही परिवार के सभी सदस्य घर के अलग-अलग कमरों में बैठकर टीवी, लैपटॉप, टैब या मोबाइल पर अपने मनपसंद शोज अकेले देख रहे होते हैं और इसी वजह से ओटीटी पर फैमिली शोज बहुत कम नजर आते थे।

मेकर्स को भी लगता था मुश्किल

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ओटीटी पर फैमिली शोज न आने की सबसे बड़ी वजह यही है कि ज्यादातर निर्माता इसे युवाओं का प्लेटफॉर्म मानते हैं। ऐसे में उन्हें ओटीटी के लिए फैमिली शो बनाना जोखिम भरा काम लगता है। भारत में ओटीटी (ओवर द टॉप) सर्विसेज की शुरुआत वेस्टर्न देशों से हुई है, इसी वजह से इसके कंटेंट पर वेस्टर्न कल्चर का प्रभाव साफ आता है। इस बारे में गुल्लक फेम अभिनेता जमील खान कहते हैं, 'अधिकतर बड़े ओटीटी प्लेटफार्म विदेश से ही आए हैं। लिहाजा अब तक यहां पश्चिमी समाज पर केंद्रित कहानियां ही सामने आ रही थीं। भारत में भी पहले मेट्रो सिटीज के युवाओं को ही इसका दर्शक माना जाता था, लेकिन अब छोटे शहरों और गांव के लोगों के बीच भी इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। गुल्लक जैसे शो की सफलता ने निर्माताओं को दिखा दिया कि हमारे यहां सिर्फ हिंसा और अश्लीलता से भरपूर कंटेंट नहीं चलता, बल्कि रिश्तों से जुड़ी कहानियां भी पसंद की जाती हैं। बशर्ते काफी रिसर्च करने के बाद उन्हें समझदारी के साथ परदे पर लाया जाए। पारिवारिक कहानियों की मांग हमेशा रहेगी, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सस्पेंस और थ्रिलर जॉनर के शोज के बीच अब पारिवारिक कहानियां भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी जगह बना रही हैं। 'पंचायत, 'गुल्ल्क, 'पॉटलक समेत 'मेट्रो पार्क जैसी वेब सीरीज ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अब लोग हल्की-फुल्की पारिवारिक कहानियां देखना पसंद करते हैं।

राइटिंग पैटर्न में बदलाव है जरूरी

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पारिवारिक शो के लिए अच्छी कहानी तैयार करना लेखकों के लिए किसी चैलेंज से कम नहीं है, क्योंकि परिवार और उससे जुड़ी कहानियों से ऑडियंस हमेशा से जुड़ी रही है, ऐसे में कहानी को इस तरह ऑडियंस तक पहुंचाना कि एंटरटमेंट मिल सके और ऑडियंस जुड़ी रहे, ये काफी जरूरी है। इसके लिए राइटर्स को काफी मेहनत करनी पड़ती है। इस बारे में इंडस्ट्री के कई अनुभवी डायरेक्टर्स का कहना है कि क्राइम, थ्रिलर, सस्पेंस और अन्य जॉनर की कहानियों की तुलना में पारिवारिक ड्रामा कहानियों के लिए आठ-दस एपिसोड लिखना थोड़ा मुश्किल है। क्राइम और सस्पेंस से जुड़ी कहानियों को घटनाएं तेजी से आगे बढ़ाती हैं, लेकिन फैमिली शोज में इमोशंस डालना मुश्किल हो जाता है। लिहाजा निर्माता फैमिली ड्रामा के इर्द-गिर्द बुनी कहानियों पर शोज बनाने का रिस्क नहीं लेना चाहते, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि कोई भी दर्शक हमेशा सस्पेंस और क्राइम नहीं देख सकता। लोग हंसी-खुशी से भरपूर मनोरंजक कहानियां भी देखना चाहते हैं।

दर्शकों की बढ़ती दिलचस्पी

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर क्राइम, पॉलिटिक्स, सस्पेंस और रोमांस जैसे जॉनर में कुछ फिक्शन, तो कुछ रियल घटनाओं पर आधारित कहानियां बनती हैं। इन कहानियों से हर उम्र के दर्शक जुड़ नहीं पाते हैं, लेकिन पारिवारिक कहानियों से दुनिया का हर शख्स जुड़ाव महसूस करता है। लिहाजा काफी ऑडियंस ऐसे हलके-फुलके वेब सीरीज देखना पसंद करती है। इतना ही नहीं, अब इन प्लेटफॉर्म्स पर बॉलीवुड के मशहूर सितारे भी नजर आने लगे हैं। कौन बनेगी शिखरवती से डिजिटल वर्ल्ड में डेब्यू करने वाली अभिनेत्री सोहा अली खान कहती हैं, 'आजकल काफी लोग स्ट्रेस में रहते हैं। पारिवारिक कॉमेडी शोज के कंटेंट के साथ लोग खुद को आसानी से जोड़ पाते हैं। इसीलिए अब उन्हें पारिवारिक वेब सीरीज पसंद आने लेगे हैं।

बदलते वक्त की जरूरत

बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशक निखिल आडवाणी आजकल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी एक्टिव हैं। वह बताते हैं, 'कई लोग ऐसा मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जहां पहले से ही थ्रिलर और डार्क जोनर वाले कंटेंट मौजूद हैं, वहां पारिवारिक शो बनाना मुश्किल होगा, लेकिन बतौर निर्माता, मेरा काम है कंटेंट को ईमानदारी से बनाकर सही प्लेटफॉर्म तक पहुंचाना। एक ही घर में रहने के बावजूद लोगों के पास फैमिली के साथ देखने जैसा कंटेट नहीं है, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसे मनोरंजक शोज भी होने चाहिए, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों को दिलचस्पी हो।

जड़ों से जुड़ी कहानियां

वेब सीरीज पंचायत के अभिनेता रघुबीर यादव कहते हैं, 'मैं हमेशा से यही चाहता था कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और संस्कार को लेकर काम किया जाए। हमारी असलियत और मासूमियत को लेकर कहानियां बनाई जाएं। पंचायत के अगले सीजन के बारे जानने के लिए दर्शक मुझे अमेरिका और ब्रिटेन से मैसेज करते हैं।
पंचायत में कोई खलनायक नहीं है, सभी किरदार मासूम हैं। फिर भी युवा दर्शक पंचायत को पसंद कर रहे हैं। आजकल पारिवारिक शोज को दर्शकों की भरपूर सराहना मिल रही है। ऐसे में अब निर्माताओं और लेखकों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं।

 क्या है सेलेब्स की राय?

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अंकिता लोखंडे (अभिनेत्री)

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भले ही हर तरह का कंटेंट हो, लेकिन जब आप दर्शकों को फैमिली ड्रामा वाले ऐसे शो देते हैं, जिसमें परिवार की बात हो, तो अपने देश के साथ दूसरे देश के लोग भी कनेक्ट करते हैं। दर्शकों का अपना भी परिवार होता है, इसलिए ऐसे शोज के साथ वे खुद को आसानी से जोड़ पाते हैं। भावनाओं को हर व्यक्ति महसूस कर सकता है। पूरी दुनिया में प्यार की एक ही भाषा होती है, जो सबको समझ आती है।

 

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सायरस साहूकार (अभिनेता)

क्राइम और सस्पेंस से जुड़ी कहानियां मुझे बहुत पसंद हैं, लेकिन लगातार डार्क कंटेंट देखकर मुझे बोरियत होने लगी थी। वैसे भी हम सभी की जि़ंदगी में पहले से ही ढेरों परेशानियां हैं, इसलिए अब तो केवल हंसने-हंसाने वाले शोज देखने की इच्छा होती है। मेरी वेब सीरीज 'पॉटलक की कहानी कुछ वैसी ही थी। आज के दौर में पारिवारिक शो बनाना बहुत जरूरी है, उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे और भी कई शोज बनेंगे।

 

दीपेश पांडे (मुंबई ब्यूरो से)

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