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'हर हर महादेव' के बिना अधूरा है सावन, जानिए कैसे शुरू हुआ यह जयघोष?

'हर-हर महादेव का जयघोष' हम सभी करते हैं। मगर क्या आपको पता है कि इसकी शुरूआत सबसे पहले कब और कहां हुई? अगर नहीं, तो नीचे लेख में जानें- 
Updated:- 2026-07-23, 21:06 IST
Har Har Mahadev meaning and significance

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों तरफ शिव भक्तों की गूंज सुनाई देने लगती है। मंदिरों में जल चढ़ाते शिवभक्त हों या कांवड़ यात्रा पर निकले कांवड़िए, हर किसी की जुबां पर एक ही नाम होता है "हर हर महादेव"। इसके बिना यह पर्व अधूरा माना जाता है। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि यह जयघोष लोग क्यों करते हैं? इसकी शुरूआत कहां से हुई है?

'हर-हर महादेव' का उत्घोष पहली बार कब हुआ था?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से अत्यंत विषैला हलाहल विष निकला। इस विष की तपन से पूरी सृष्टि जलने लगी। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने विष को पीकर अपने कंठ में धारण कर लिया। शिव जी के इस त्याग से प्रसन्न होकर सभी देवताओं, ऋषियों और मुनियों ने आभार व्यक्त करने के लिए पहली बार हर हर महादेव का जयघोष किया। हर का अर्थ है दुखों को हरने वाला।

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'हर-हर महादेव' का कष्टों को दूर करने से नाता

'हर हर महादेव' केवल एक जयकारा नहीं बल्कि भगवान शिव से जुड़ी अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। जब-जब देवताओं पर कोई संकट आया या फिर कोई महान असुर सृष्टि पर अत्याचार करने लगा, तब सब लोगों ने मदद के लिए महादेव का ही आह्वान किया। भोलेनाथ ने हमेशा आगे आकर अपने भक्तों के सारे कष्टों और पापों का हरण किया। यही कारण है कि संकट या परेशानी के समय शिव को याद करते हुए भक्त हर हर महादेव का जयघोष करने लगे।

'हर-हर महादेव' का जयघोष करने से मिलती है ताकत

सावन के महीने में जब कांवड़िए पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल शिवधाम की ओर बढ़ते हैं, तो 'हर हर महादेव' का जयघोष करते हैं।

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सैकड़ों किलोमीटर की थकान भरे सफर में यह मंत्र भक्तों के भीतर एक नई ऊर्जा, जोश और भक्ति का संचार करता है। माना जाता है कि इस जयघोष के उच्चारण मात्र से मन की घबराहट और शरीर की शारीरिक थकान मिट जाती है। इसी वजह से सावन का पावन महीना इस पावन जयकारे के बिना अधूरा माना जाता है।

International Journal of Pharmaceutical Sciences and Research के अनुसार, शिव मंत्र या 'हर हर महादेव' का नियमित जाप करने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन (कॉर्टिसोल) कम होता है। इससे चिंता, घबराहट और डिप्रेशन दूर होता है और मन शांत रहता है। साथ ही, दिमाग की याददाश्त और ध्यान लगाने की क्षमता बेहतर होती है। सरल शब्दों में, यह जाप दिमाग को तनावमुक्त और तेज बनाने वाली एक नेचुरल थेरेपी है।

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हर-हर महादेव के जयघोष पहली बार कब किया गया था, इसके बारे में पता चल गया है। साथ ही यह भी कि इसके बिना सावन क्यों अधूरा माना जाता है। साथ ही अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो इसे शेयर करें। ऐसे आर्टिकल को पढ़ने के लिए जुड़े रहे हरजिंदगी के साथ।

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FAQ
हर हर महादेव' में 'हर' शब्द का क्या अर्थ होता है?
हर हर महादेव' में 'हर' का अर्थ दुखों, कष्टों और पापों का हरण करने वाला है।
धार्मिक कथाओं के अनुसार यह जयघोष सबसे पहले कब गूंजा था?
समुद्र मंथन के समय जब शिव जी ने विष पिया, तब देवताओं ने उनका आभार जताने के लिए यह जयघोष किया था।
सावन और कांवड़ यात्रा में इस जयघोष का क्या महत्व है?
सावन और कांवड़ यात्रा में जयघोष भक्तों को मानसिक शक्ति और अपार ऊर्जा देता है, जिससे वे बिना थके यात्रा पूरी करते हैं।
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