Fri Sep 18, 2026 | Updated 01:38 PM IST

Ganesh Utsav 2026: क्यों 10 दिनों तक मिट्टी के रूप में विराजमान रहते हैं बप्पा? जानें कारण

गणेश चतुर्थी पर बप्पा को 10 दिनों तक घर में स्थापित करने और फिर विसर्जित करने के पीछे पौराणिक मान्यताएं हैं। जानते हैं इनके बारे में...
Updated:- 2026-09-18, 11:40 IST
ganesha idols mythological connection

भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि आते ही चारों तरफ 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे गूंजने लगते हैं। ढोल-नगाड़ों के साथ बप्पा का स्वागत किया जाता है और पूरे 10 दिनों तक देश भर में भक्ति का माहौल बना रहता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि विघ्नहर्ता गणेश जी को 10 दिनों तक ही घर में स्थापित क्यों किया जाता है और इसके बाद उनका विसर्जन क्यों होता है? इसके पीछे गहरी पौराणिक मान्यताएं और कथाएं छिपी हैं। इस लेख में दिए गए इनपुट वृंदावन के अनंतदास जी महाराज द्वारा दिए गए हैं। ऐसे में जानते हैं, क्या कहते हैं महाराज जी...

गणेश जी 10 दिनों तक मिट्टी के रूप में क्यों होते हैं विराजमान?

गणेश उत्सव का सबसे मुख्य संबंध महाभारत ग्रंथ के निर्माण से जुड़ा है। पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास जी को महाभारत जैसा महाकाव्य लिखने के लिए एक ऐसे लेखक की तलाश थी जो बिना रुके लगातार लिख सके। इसके लिए उन्होंने बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश से प्रार्थना की। 

1 - 2026-09-18T112515.635

(photo credit - Magnific)

जब मान गए बप्पा

गणेश जी लिखने के लिए तैयार हो गए, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि उनकी कलम एक पल के लिए भी नहीं रुकनी चाहिए। महर्षि वेदव्यास जी ने भी चतुरता से शर्त रखी कि गणेश जी हर श्लोक का अर्थ समझने के बाद ही उसे लिखेंगे। जब बप्पा कठिन श्लोकों का गूढ़ अर्थ समझते, उतने समय में वेदव्यास जी अगला श्लोक रच लेते। यह लेखन कार्य लगातार 10 दिनों तक बिना रुके चलता रहा।

बढ़ गया शरीर का तापमान

लगातार लिखने के कारण गणेश जी के शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया। शरीर की तपन को कम करने के लिए उनके शरीर पर मिट्टी का लेप लगाया गया। अनंत चतुर्दशी यानी दसवें दिन जब ग्रंथ पूरा हुआ, तब वेदव्यास जी ने बप्पा को जल में स्नान कराकर उनके शरीर को शीतलता प्रदान की। इसी याद में 10 दिनों तक मिट्टी के बप्पा बिठाए जाते हैं और दसवें दिन उनका विसर्जन किया जाता है।

कैलाश से पृथ्वी पर बप्पा का आगमन

एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। माना जाता है कि इन 10 दिनों के लिए गणपति जी अपने धाम कैलाश पर्वत से उतरकर पृथ्वी लोक पर अपने भक्तों के बीच रहने आते हैं।

इन दस दिनों में भक्त बप्पा को अपने परिवार का सदस्य मानकर उनकी सेवा करते हैं। उन्हें मोदक, लड्डू और विभिन्न पकवानों का भोग लगाया जाता है। दसवें दिन बप्पा भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर वापस कैलाश पर्वत लौटने की तैयारी करते हैं, इसलिए भारी मन से लेकिन अगले बरस जल्दी आने की कामना के साथ उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है।

2 - 2026-09-18T112511.457

(photo credit - Magnific)

निष्कर्ष

10 दिनों तक बप्पा को घर में विराजित करने की यह परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान गणेश के अथक परिश्रम और उनके प्रति भक्तों के अगाध प्रेम का प्रतीक है। मिट्टी के रूप में बप्पा की स्थापना हमें प्रकृति से जोड़ती है और 10 दिनों की सेवा के बाद विसर्जन यह सिखाता है कि जो इस संसार में आया है, उसे अपने लोक वापस लौटना ही है।

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Images: magnific

FAQ
महाभारत लिखते समय गणेश जी के शरीर का तापमान क्यों बढ़ गया था?
लगातार 10 दिनों तक बिना विश्राम किए लिखने की कठिन प्रक्रिया और श्रम के कारण गणेश जी के शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ गया था।
गणेश जी की मूर्ति पर मिट्टी का लेप क्यों लगाया जाता है?
महाभारत लिखने से उत्पन्न शरीर की गर्मी और तपन को शांत करने के लिए वेदव्यास जी ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप लगाया था।
क्या गणेश जी 10 दिनों के लिए कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर आते हैं?
जी हां, माना जाता है कि इन 10 दिनों के लिए गणपति जी कैलाश पर्वत से उतरकर अपने भक्तों के बीच रहने और उनकी सेवा स्वीकार करने आते हैं।
Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।