कैलाश पर्वत पर ही क्यों रहते हैं महादेव? पढ़ें इसके पीछे का कारण

देवों के देव महादेव को 'शैलराज' यानी पर्वतों का राजा भी कहा जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में शिव पुराण से लेकर देवी भागवत पुराण तक इस बात का वर्णन मिलता है कि आखिर भगवान शिव ने बर्फ से ढके कैलाश पर्वत को ही अपना निवास स्थान क्यों चुना। हिमालय की दुर्गम चोटियों में बसा कैलाश केवल एक पर्वत नहीं है, बल्कि यह अनंत शांति, वैराग्य और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का सर्वोच्च केंद्र है। यहां भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती, पुत्र गणेश और कार्तिकेय के साथ निवास करते हैं। ऐसे में भगवान शिव का संबंध कैलाश पर्वत से क्या है, इसके बारे में जान लें...
भगवान शिव और कैलाश पर्वत का संबंध
भगवान शिव का स्वरूप अन्य सभी देवी-देवताओं से बिल्कुल अलग है। वे भगवान विष्णु की तरह राजसी वस्त्र या गहने नहीं पहनते, बल्कि वे गहरे ध्यान में लीन रहने वाले वैरागी देव हैं। वे इस दुनिया को बनाने वाले भी हैं और इसका संहार करने वाले भी।
उनके इसी शांत और प्रचंड रूप को दर्शाने के लिए कैलाश पर्वत सबसे सही जगह है। कैलाश की शांत, बर्फीली और अचल हवा शिव के स्वभाव से पूरी तरह मिलती-जुलती है। इसके अलावा शिव को योग का गुरु माना जाता है। कहा जाता है कि कैलाश की एकांत और शांत हवा में वे योग साधना करते हैं। पर्वत के नीचे स्थित प्रसिद्ध मानसरोवर झील के बारे में माना जाता है कि इसका निर्माण स्वयं महादेव की इच्छा से हुआ था।

शिव जी ने क्यों चुना कैलाश?
भगवान शिव ने कैलाश पर्वत अपने रहने के लिए क्यों चुना, जानते हैं कारण-
1. जिसे आज तक कोई जीत न सका
कैलाश केवल एक पहाड़ नहीं है, बल्कि यह समय से परे एक अचल स्थान है। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर हजारों लोग चढ़ चुके हैं, लेकिन कैलाश की चोटी पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया। तिब्बत के लोग इसे 'कांग रिनपोचे' कहते हैं, जिसका मतलब है 'बर्फ का अनमोल रत्न'।
माना जाता है कि कैलाश पृथ्वी का केंद्र बिंदु (एक्सिस मुंडी) है। भगवान शिव ने इस स्थान को इसलिए चुना ताकि वे यहां रहकर पूरी दुनिया और उसके जीवों का ध्यान रख सकें।
2. चार बड़ी नदियों का उद्गम और वैराग्य का प्रतीक
कैलाश पर्वत के पास से ही सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र और करनाली जैसी चार बड़ी नदियां निकलती हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि अचल शांति से ही जीवन की धारा बहती है। पुराणों के अनुसार, कैलाश के चार चेहरे स्फटिक, माणिक, सोना और लाजवर्द जैसे मूल्यवान रत्नों से बने हैं।
भगवान शिव किसी महल या सोने की नगरी में रहने वाले देवता नहीं हैं, वे तो त्याग और वैराग्य के प्रतीक हैं इसलिए उनका घर इंसानी बस्तियों से दूर, दुनिया के शिखर पर, बर्फ और सन्नाटे के बीच स्थित है।
3. माता पार्वती के लिए सबसे सही घर
कैलाश पर्वत शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। माता पार्वती प्रेम, सृजन और भक्ति की देवी हैं। जब शिव के वैराग्य का मिलन पार्वती के प्रेम से होता है, तो पूरी दुनिया में संतुलन बनता है। मान्यताओं के अनुसार, हिमालय माता पार्वती के पिता हिमवान का घर था। इस नाते कैलाश उनके लिए मायके का ही एक पवित्र हिस्सा था, जहां वे रानी बनकर निवास करती हैं।
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4. रावण का अहंकार और शिव का न्याय
शिव पुराण में कैलाश से जुड़ी एक बेहद प्रसिद्ध कथा भी है। लंकापति रावण अपनी भक्ति और ताकत के घमंड में कैलाश पर्वत को उखाड़कर लंका ले जाना चाहता था। शिव जी ने रावण के इस घमंड को देखकर अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को हल्का सा दबा दिया।
रावण पर्वत के नीचे दब गया और दर्द से चीखते हुए शिव जी की तारीफ में स्तुति गाने लगा, जिसे आज हम 'शिव तांडव स्तोत्र' के नाम से जानते हैं। हजार सालों की कठिन तपस्या और स्तुति के बाद शिव जी ने उसे आजाद किया। इस घटना ने साबित कर दिया कि कैलाश को हिलाया नहीं जा सकता।
5. अहंकार मिटाने वाली पवित्र जगह
महर्षि व्यास, संत मिलारेपा और आदि शंकराचार्य जैसे महान संत कैलाश के पास तो गए, लेकिन किसी ने उस पर चढ़ने की कोशिश नहीं की। माना जाता है कि कैलाश पर विजय नहीं पाई जा सकती, केवल उसकी परिक्रमा की जा सकती है। भक्तों का मानना है कि कैलाश की एक परिक्रमा करने मात्र से सारे पाप कट जाते हैं। यह पर्वत इंसान के घमंड को खत्म कर देता है।

धर्मग्रंथों में कैलाश और मानसरोवर का जिक्र
बता दें कि कई धर्मग्रंथों में कैलाश पर्वत का जिक्र भगवान शिव के साथ होता है-
1. शिव पुराण
शिव पुराण में कैलाश को भगवान शिव का अमर घर बताया गया है, जहां संत-महात्मा उनका ध्यान करते हैं-
"कैलासशिखरे रम्ये शूलपाणिं सनातनम्। ध्यानन्ति योगिनो नित्यं तं मां विद्धि परं शिवम्॥"
अर्थ: कैलाश के सुंदर शिखर पर हाथ में त्रिशूल धारण किए सनातन शिव का योगी हमेशा ध्यान करते हैं। उन्हें ही परम शिव समझो।
2. स्कंद पुराण
स्कंद पुराण में मानसरोवर झील की महिमा का वर्णन मिलता है-
"मानसं तु सरो यत्र पुण्यं पापप्रणाशनम्। तत्र स्नात्वा नरो याति शिवलोकं सनातनम्॥"
अर्थ: मानसरोवर वह पवित्र झील है जो सभी पापों को मिटा देती है। इसमें स्नान करने से इंसान सीधे शिवलोक को प्राप्त होता है।
3. महाभारत
महाभारत के वन पर्व में कैलाश को देवताओं और दानवों द्वारा पूजी जाने वाली जगह कहा गया है-
"कैलासः पर्वतो रम्यो देवदानवसेवितः। तत्र तीर्थानि पुण्यानि मानसं च सरोवरम्॥"
अर्थ: सुंदर कैलाश पर्वत देवताओं और दानवों दोनों द्वारा पूजनीय है, जहां कई पवित्र तीर्थ और मानसरोवर झील स्थित है।
4. वाल्मीकि रामायण
रामायण के उत्तर कांड में कैलाश की यात्रा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है:
"कैलासगिरिमासाद्य शंकरं प्रणम्य च। मानसं सरसि स्नात्वा पुनर्जन्म न विद्यते॥"
अर्थ: कैलाश पर्वत पर पहुंचकर भगवान शंकर को प्रणाम करने और मानसरोवर में स्नान करने से इंसान को दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता।
अलग-अलग धर्मों में कैलाश का महत्व
कैलाश पर्वत दुनिया का अकेला ऐसा पहाड़ है जिसे कई धर्मों में समान रूप से बहुत पवित्र माना गया है:
| धर्म | कैलाश का नाम | धार्मिक महत्व |
| हिंदू धर्म | कैलाश पर्वत | भगवान शिव और माता पार्वती का निवास, मोक्ष और भक्ति का सबसे बड़ा केंद्र |
| बौद्ध धर्म | खांग रिनपोचे/माउंट मेरु | चक्रसंवर (डेमचोक) का निवास, ब्रह्मांड का मुख्य केंद्र |
| जैन धर्म | अष्टापद | प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) को यहीं मोक्ष प्राप्त हुआ था |
| बोन धर्म (तिब्बत) | युंगद्रुंग गुत्सेक | आकाश की देवी सिदपा ग्यालमो का स्थान |
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कैलाश पर्वत को पृथ्वी का केंद्र क्यों मानते हैं?
विज्ञान और अध्यात्म दोनों ही मानते हैं कि कैलाश पर्वत पर एक अलग तरह की ऊर्जा महसूस होती है।
- इसे आकाश और धरती को जोड़ने वाला पुल माना जाता है, जो पूरी दुनिया की ऊर्जा को संतुलित रखता है।
- मानसरोवर और राक्षसताल जैसी जगहें मिलकर एक कुदरती आध्यात्मिक चक्र बनाती हैं।
- यहां जाने वाले यात्रियों का कहना है कि इस इलाके में आते ही मन बहुत शांत हो जाता है, नाखून और बाल तेजी से बढ़ने लगते हैं और शरीर में एक अलग ऊर्जा महसूस होती है।
निष्कर्ष
इस लेख के माध्यम से पता चलता है कि सच्चाई की खोज करने वालों के लिए कैलाश पर्वत आत्मा की उस ऊंचाई का नाम है जहां पहुंचकर इंसान का घमंड खत्म हो जाता है। वैज्ञानिकों के लिए कैलाश आज भी एक अनसुलझी पहेली है। शिव जी कैलाश पर इसलिए रहते हैं क्योंकि कैलाश कोई साधारण पहाड़ नहीं है, बल्कि कभी न मिटने वाले परम सत्य का प्रतीक है। शिव को समझा नहीं, केवल महसूस किया जा सकता है और कैलाश उसी अहसास का रूप है।
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- लंकापति रावण का कैलाश से क्या है संबंध?
- लंकापति रावण अपनी भक्ति और ताकत के घमंड में कैलाश पर्वत को उखाड़कर लंका ले जाना चाहता था। तब शिव जी ने रावण का घमंड तोड़ा।
- बौद्ध धर्म में कैलाश को किस नाम से पुकारते हैं?
- बौद्ध धर्म में खांग रिनपोचे/माउंट मेरु के नाम कैलाश को पुकारा जाता है।
- कैलाश पर्वत के पास जाने वाले यात्रियों का क्या कहना है?
- यहां आते ही मन शांत व नाखून और बाल तेजी से बढ़ने लगते हैं और शरीर में एक अलग ऊर्जा महसूस होती है।
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