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Maha Kumbh 2025: महाकुंभ स्नान के समय संगम में क्या प्रवाहित करना चाहिए?

मान्यता है कि एक बार जिसने भी इस 144 साल बाद लगे महाकुंभ के दौरान संगम में स्नान कर लिया उसकी पिछली सातों पीढ़ियां और आने वाली सातों पीढ़ियां पापों के दुष्फल से मुक्त हो जाती है और पुण्यों में वृद्धि होती है।
Updated:- 2025-02-07, 16:34 IST
sangam mein kya pravahit karte hain

प्रयागराज महाकुंभ में अमृत स्नान या स्नान के लिए भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है। मान्यता है कि एक बार जिसने भी इस 144 साल बाद लगे महाकुंभ के दौरान संगम में स्नान कर लिया उसकी पिछली सातों पीढ़ियां और आने वाली सातों पीढ़ियां पापों के दुष्फल से मुक्त हो जाती है और पुण्यों में वृद्धि होती है। इसी कड़ी में ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि संगम में स्नान के दौरान कौन सी चीजें जरूर अर्पित करनी चाहिए। आइये जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

महाकुंभ स्नान के दौरान संगम में प्रवाहित करें जनेऊ

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महाकुंभ में संगम में स्नान के दौरान नया जनेऊ अवश्य अर्पित करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जनेऊ से पवित्र और कोई भी धागा नहीं होता है और इसे संगम में प्रवाहित करने से व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। व्यक्ति को मृत्यु के बाद कष्टदायी योनी में नहीं जाना पड़ता है।

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महाकुंभ स्नान के दौरान संगम में प्रवाहित करें दूध

महाकुंभ में सनागम में स्नान करते समय दूध भी प्रवाहित कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि संगम का नाता त्रिदेवों यानी कि भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्म देव से है। ऐसे में दूध अर्पित करने से त्रिदेवों को भी वह दूध अर्पित हो जाता है और तीनों एव्ताओं का आशीर्वाद व्यक्ति को प्राप्त होता है।

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महाकुंभ स्नान के दौरान संगम में प्रवाहित करें तिल

महाकुंभ में संगम में स्नान के दौरान काले तिल भी प्रावाहित करने चाहिए। असल में काले तिल पितरों का प्रतीक माने जाते हैं, इसके अलावा काले तिलों का संबंध शनि देव से भी है। ऐसे में काले तिल संगम में प्रवाहित करने से पितृ शांत होते हैं और शनि दोष एवं साढ़े साती-ढैय्या से राहत मिलती है।

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महाकुंभ स्नान के दौरान संगम में प्रवाहित करें चंदन

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महाकुंभ में संगम में स्नान के दौरान चंदन प्रवाहित करना शुभ माना जाता है। लाल या पीला चंदन कोई भी प्रवाहित कर सकते हैं। असल में ऐसा माना जाता है कि लाल या पीला चंदन संगम में अर्पित करने से रोग-दोष दूर हो जाते हैं। व्यक्ति को बीमारी से छुटकारा मिल जाता है और आरोग्य प्राप्त होता है।

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image credit: herzindagi 

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