Parenting Tips: बच्चा दोस्तों से फोन पर करता है लंबी बातें? ऐसे तय करें Time Limit
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आज के डिजिटल समय में बच्चों के लिए मोबाइल सिर्फ एक गैजेट नहीं है, बल्कि उनकी सोशल लाइफ का एक केंद्र बन गया है। अक्सर माता-पिता को ये शिकायत रहती है कि उनका बच्चा हर वक्त दोस्तों के साथ फोन कॉल या चैटिंग में बिजी रहता है, जिससे उसकी पढ़ाई और सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आप बच्चे को डांटने या हाथ से फोन छीनने के बजाय आप उनकी इस आदत को कंट्रोल कर सकती हैं। ऐसे में इन तरीकों के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चा यदि दोस्तों से फोन पर लंबी बातें करे तो कैसे उसे रोकें। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...
बच्चे पर पाबंदी न लगाएं
बच्चे पर सीधे पाबंदी नहीं लगानी चाहिए, वरना वह विद्रोही हो सकता है। ऐसे में सबसे पहले उसे विश्वास में लेना जरूरी है। साथ ही ये समझने की कोशिश करें कि बच्चा इतनी देर क्या बात करता है।

क्या वह अकेलापन महसूस कर रहा है या उसे दोस्तों के बीच से आउट होने का डर है? जब समस्या समझ आए तो उसे प्यार से समझाएं कि घंटों फोन पर रहने से उसकी आंखे, नींद और फोकस पर क्या असर पड़ रहा है। आप बच्चे से कहें, हमें दोस्तों के अलावा साथ मिलकर पढ़ाई और खेल के लिए समय निकालना होगा।
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'नो-फोन जोन' और टाइम लिमिट तय करना
घर में कुछ नियम और समय तय करना डिसिप्लिन की पहली सीढ़ी है। ऐसे में आप शाम को एक निश्चित समय तय करें जैसे - 5 से 6 बजे, जब वह अपने दोस्तों से बात कर सके। इसके बाद फोन को एक निश्चित जगह पर रखने का नियम बनाएं। डाइनिंग टेबल को भी 'नो-फोन जोन' बनाएं। इससे अलग खाते समय फोन का इस्तेमाल बिल्कुल बंद करें।

बच्चे के लिए कुछ मजेदार एक्टिविटी सोचें
बता दें कि बच्चा फोन की ओर तब ज्यादा भागता है जब उसके पास करने के लिए कुछ मजेदार नहीं होता है। ऐसे में आप आउटडोर गेम्स को उनके लिए तैयार करें। आप रोज शाम को बच्चों को पार्क में ले जाएं या किसी स्पोर्ट्स क्लब में उसका एडमिशन कराएं। फिजिकल थकान फोन की लत को कम करती है।
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