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हॉस्‍टल में लाइफस्टाइल को एक्टिव बनाती है शेयर्ड लिविंग स्पेस, एक्‍सपर्ट से जानें कैसे?

आज के समय में ज्‍यादातर लोग पढ़ाई या जॉब के लि‍ए घर से दूर रहते हैं। ऐसे में लोग हॉस्टल या पीजी में रहते हैं। कई लोग इसे सिर्फ रहने की जगह मानते हैं, लेकिन सच तो ये है कि अच्छी शेयर्ड लिविंग स्पेस किसी की लाइफस्टाइल पर भी अच्‍छा असर ही डालती है।
Updated:- 2026-06-22, 12:17 IST
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आज के समय में हर कोई पढ़ाई या जॉब के स‍िलस‍िले में घर से दूर रह रहा है। ऐसे में कुछ लोग स‍िंगल रहना पसंद करते हैं, तो कुछ शेयर्ड रूम या हॉस्‍टल में रहते हैं। आमतौर पर लोग इसे स‍िर्फ रहने की जगह ही मानते हैं, लेक‍िन शेयर्ड ल‍िव‍िंग में रहने से लाइफस्‍टाइल पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। दरअसल, जब लोग एक साथ रहते हैं तो उनमें बातचीत बढ़ती है। रोजाना वे कई एक्‍ट‍िव‍िटीज में ह‍िस्‍सा लेते हैं।

इससे उनका कॉन्‍फ‍िडेंस बढ़ता है। वे ज्‍यादा एक्‍ट‍िव फील करते हैं। नाेएडा में एक हॉस्‍टल के चेयरपर्सन कुंअर गौरव गि‍री बताते हैं क‍ि आजकल शेयर्ड लिविंग स्पेस को सिर्फ रहने का ठिकाना नहीं माना जाता है बल्कि इसे अच्छी लाइफस्टाइल से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कैसे-

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सोशल कनेक्शन बढ़ती है

जब कोई स्टूडेंट या जॉब करने वाले लोग दूसरे शहर में आते हैं, तो शुरू-शुरू में अकेलापन फील होना तो लाजमी ही होता है। ऐसे में शेयर्ड लिविंग स्‍पेस लोगों को करीब लाता है। साथ रहने से नए दोस्त बनते हैं। उनमें गपशप होती है और इसका र‍िजल्‍ट ये होता है क‍ि उन्‍हें अकेलापन फील नहीं होता है। इससे मन भी खुश होता है और जब मन खुश होता है तो काम और पढ़ाई सब कुछ अच्‍छे से हो जाती है।

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कम्युनिकेशन स्किल्स होती हैं बेहतर

जो लोग हॉस्‍टल या पीजी में रहते हैं तो वहां पर अलग-अलग जगह के लोग एक साथ रहते ह‍ैं। ऐसी जगहों पर हर रोज नए लोगों से बात करने का मौका म‍िलता है। इससे कम्‍युन‍िकेशन स्‍क‍िल तो बेहतर होती ही है, साथ ह‍ी लोगों के साथ फ्रेंडश‍िप भी बढ़ती है। कुंअर ग‍िरी बताते हैं क‍ि हमारे यहां हॉस्‍टल में भी लोग ऐसे ही रह रहे हैं और उनमें लगातार नई स्‍क‍िल देखने को म‍िलती है।

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बनी रहती है एक्‍ट‍िवनेस

एक अच्‍छा शेयर्ड ल‍िव‍िंग स्‍पेस स‍िर्फ रहने के ल‍िए नहीं होता है बल्‍क‍ि यहां कई तरह की एक्‍ट‍िव‍िटीज भी होती हैं। इससे आपको बाेर‍ि‍यत नहीं होती है। आमतौर पर हॉस्‍टल्‍स में डांस रूम और ज‍िम तो होता ही है। साथ ही यहां कई तरह की एक्‍ट‍िव‍िटीज भी कराई जाती हैं, जैसे- कैरम, लूडो, चेस जैसे गेम्स भी खेलने को म‍िलते हैं। इससे उनका फ्री टाइम समय भी अच्‍छे से यूट‍िलाइज हो जाता है। इससे बॉडी और मांइड दोनों ही एक्‍ट‍िव रहते हैं।

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साथ में खाना खाने के भी हैं फायदे

हॉस्टल या शेयर्ड स्पेस में सब लोग साथ मिलकर खाना खाते हैं। इससे न केवल आपस में प्यार और दोस्ती बढ़ती है, बल्कि टाइम पर खाना खाने की आदत भी हो जाती है। ये तो हम सब जानते ही हैं कि एक हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए टाइम पर खाना-पीना बहुत जरूरी होता है।

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