FASTag Scam Alert: फास्टैग अपडेट के बहाने आ रहे हैं फर्जी लिंक, जानें वेबसाइट और असली ऐप की पहचान

डिजिटल के इस दौर में जहां सब कुछ ऑनलाइन होने लग गया है वही सफर को और सरल बनाने के लिए फास्टैग की सुविधा भी बेहद उपयोगी है, लेकिन इस सुविधा को लेकर भी कई लोग निशाना बन रहे हैं। आपको पता होगा कि फास्टैग से संबंधित एक एनुअल पास होता है, जिसके माध्यम से आप पूरे साल बिना पेमेंट किए कहीं भी सफर कर सकते हैं। इसके लिए आपको बस एक बार में एक तय राशि जमा करनी होती है। वहीं, अब इसको लेकर भी कई फर्जी वेबसाइट और एप्स बनने लग गई हैं, जिसके माध्यम से लोग काफी फ्रॉड कर रहे हैं। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि किस तरीके से यह फ्रॉड हो रहा है और नकली वेबसाइट की पहचान कैसे की जाए। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि फर्जी लोग कैसे लोगों को फास्टैग के बहाने ठग रहे हैं। पढ़ते हैं आगे...
कैसे हो रही है यह ठगी?
बता दें, हाल ही में जयपुर में एक नकली वेबसाइट एनएचएआई की बनाई गई, जहां पर हू-बहू नकल तैयार कर दी। इस तरीके से डिजाइन, लोगो और लेआउट बनाया गया कि लोग उसे असली समझ बैठे और पेमेंट करने लगे। इस तरह उन लोगों ने न जानें कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया।
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उन लोगों ने वेबसाइट पर क्यूआर कोड भी दिया। जहां पर पेमेंट के लिए ₹3000 की राशि दी जाती थी और जैसे ही व्यक्ति उसे स्कैन करता था, खाते से सारे ही पैसे चले जाते थे और व्यक्ति को पता ही नहीं चलता था कि उसके पैसे कहां गए। मिनटो में होने वाला यह खेल लोगों का लाखों करोड़ों नुकसान कर रहा है। ऐसे में बता दें कि यदि समय रहते ही इस बात का पता चल जाए कि कौन सी वेबसाइट असली होने नकली तो इस ठगी से बचा जा सकता है।
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कैसे करें असली पोर्टल की पहचान?
यदि आपको कोई पास खरीदना है तो सबसे पहले आप राजमार्ग यात्रा एप या बैंक पोर्टल की वेबसाइट पर ही जाएं। इन वेबसाइट के अंत में यदि आपको कोई संदिग्ध इंग्लिश शब्द या अक्षर दिखाई दे तो समझ जाएं कि वह गलत है। कभी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। जब भी किसी क्यूआर कोड को स्कैन करें तो उसको पहले जांच लें कि वह असली है या नकली है, तुरंत पेमेंट ना करें। यदि भुगतान करते वक्त किसी व्यक्ति का नाम दिख रहा है तो भूलकर भी भुगतान न करें। बैंक डिटेल्स ओटीपी या कार्ड जानकारी किसी लिंक में भूलकर भी सांझा ना करें।
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अगर ठगी हो जाए तो क्या करें?
बता दें कि 1930 हेल्पलाइन नंबर हर वक्त आपके लिए मौजूद है। इस नंबर पर साइबर धोखाधड़ी दर्ज की जा सकती है।
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Images: Freepik/shutterstock
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